पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३४१

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राबिन्सन से। मैं इन लोगों से बिदा हो।छठी मई को जहाज़ पर सवार हुआ । आज कल करते करते टापू में पच्चीस दिन बीत गये । हँगलैन्ड से मैं जो पशु लाया था वे रास्ते ही में मर गये थे। इसलिए जीनिवासियों से मैंने चलते समय कहा कि हो सकेगा तो इंजिल से कुछ पशु भेज ढंग । दूसरे दिन पाँच बार तोप की आवाज़ के द्वारा रवानगी का संकेत कर के मैं जहाज़ पर चढ़ा । फ्राइडे की मृत्यु मैं अपने टापू का सुप्रबन्ध कर के बिदा हुआ। तीन दिन समुद्रयात्रा करने के पीछे नाविकों ने ब ज़ोर से चिल्ला कर कहा ‘पूरब और स्थल दिखाई दे रहा है ।', साँझ होने के पहले ही स्थलभाग का किनारा देखते ही देखते घोर कृष्णवर्ण हो उठा। किन्तु ऐसा क्यों हुआ, इसका कुछ कारण हम लोग समझ न सके। जहाज़ का मेट मस्तूल के ऊपर चढ़कर दूरबीन से देखकर चिल्ला उठा “सैन्यदलसैन्यदल ।’ मैं उसके कथन का अविश्वास कर उसकी बात काटने लगा। तब वह बोला-आप मेरी बात का विश्वास कीजिए । डगियों पर करब एक हज़ार सैनिक-स वार हो हमारी ओर दौड़े चले आ रहे हैं। यह सुन कर मैं और जहाज़ का कप्तान मेरा भतीजा बड़े ही अचम्भे में पड़ गया । वह बेचारा कभी इतनी दूर न आया था । उस पर मेरे टापू में जाकर असभ्यों की भयडूर वृत्ति की कहानी सुन कर उसे अत्यन्त भय हुआ था। उसने दो तीन बार मुझसे कहा –अब की बार वे लोग आकर हम लोगों को ज़रूर मार कर खा डालेंगे ।' मेरा भी