पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३४८

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३२३ क्रसे का फिर मंजिल में आना। रिश की किन्तु उससे भी कुछ फत न हुआ । मेरे द्वीप के अद्भुत कार्यकलाप की ख्याति भी हम लोगों को इस अनुग्रह का पात्र नहीं बना सकती थी । तब मेरे हिस्सेदार को स्मरण हुआ, कि मैंने वहीं को धर्मशाला के फण्ड और दरिद्रों के भरण- पोषण के लिए यकिश्चित् दान दिया था । इससे उन्हेंने धर्म शाला में जाकर महन्त को मेरी उदारता का स्मरण दिलाया और उन्हें नगराधीश के निकट, हम लोगों के लिए जहाज़ से उतरने की, अनुमति लाने को भेजा । बड़ी बड़ी मुश्किल से मैं, मेरा भतीजा कप्तान)और छः व्यक्ति, कुल आठ आदमिये को जहाज़ से उतरने की आज्ञा मिली। किन्तु यह भी इस शर्त पर कि हम लोग जहाज़ से कोई माल न उतारेंगे और बिना सरकार की आशा के किसी व्यक्ति को वहाँ से अपने साथ न ले जा सकेंगे । इस शर्त का पालन इतनी कड़ाई से हुआ कि अपने हिस्सेदार को उपहार देने की सामग्री भी मैं बड़ी कठिनाई से जहाज़ पर से उतारने पाया । । । मेरे हिस्सेदार बड़े सज्जन थे । वे भी मेरी ही भाँति बिना कुछ पूंजी के व्यापार शुरू कर के अब अच्छे धनी हो गये थे। जितने दिन तक हम लोग जहाज़ से न उतर सके उतने दिन तक उन्होंने तरह तरह की खानेपीने की स्वादिष्ठ वस्तुएँ भेज कर हम लोगों का सत्कार किया था। मैंने जहाज़ से उतर कर उनको प्रतिदानखरूप विविध उपहार दिये । श मैं हूँगलैन्ड से जो एक छप्परवाली नाव का प्रेम लाया था उसमें इन्हींकी सहायता से तख्ते जड़वा लिये । उन्हेंाने मिस्त्री के द्वारा उसे सली भाँति ठीक ठाक करा दिया। मैंने वह ‘नाव एक व्यक्ति को सौंप कर उसकी मारफत भाँति भाँति . ।