पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३६२

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मदागास्कर टापू में हत्याकाण्ड। ३३७ के विध्वंस की बात पढ़ी है, एक ही दिन में सहल सहस्र नरनारी और बालवृद्धों के विनाश का वृत्तान्त चुना है। किन्तु मेरी धारणा में न था कि वह व्यापार इतना घृणोत्पादक और बीभत्स होता है । हम लोग शहर में जा पहुंचे। किन्तु आग को चीर कर किसका सामथ्र्य था जो रास्ते पर चलता १ कितने ही घर जल कर खाक हो गये थे । उस भस्मराशि में और उसके पास कितने ही जले और अहत लेग इधर उधर मरे पड़े थे । चारों ओर हाहाकार मच रहा था। हम लोगों के साथ के आदमी इतने बड़े शैतान और राक्षस होंगे, यह विश्वास के बाहर की बात थी । जो लोग ऐसा अमानुषी काम कर सकते हैं उनका उचित दण्ड घोर यन्त्रणामय मृत्यु के सिवा और हो ही क्या सकता है ? हम लेग धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे। जहाँ भाग खूब तेजी पर थी वहाँ जाकर देखा कि तीन स्त्रियाँ बिलकुल । नहूधड़ इस प्रकार दौड़ी हुई आ रही थीं जैसे उड़ती आती हों और उनके पीछे वहीं के सोलह सत्रह पुरुष उसी तरह भय से व्याकुल होकर बेतहाशा दौड़े आ रहे थे । तीन मृशंस अँगरेज उनका पीछा कर रहे थे। जब वे उन भगोड़े। स्त्रीपुरुषों को न पकड़ सके तब उन पर गोली चलाई । हम लोगें की आंख के सामने ही एक आदमी ली की चेट खा कर गिर पड़ा । बचे हुए क्री-पुरुषों ने दौड़ कर आते आाते सामने हम लोगों को देखा । वे लोग हम लोगों को भी हत्याकारी शत्रु समझ कर चिल्ला उठे। पीछे , आगे शः वे लोग भागें तो किधर १ त्रियाँ ऐसी भयभीत हुईं कि उनमें दो ट्रैच्छित होकर गिर पड़ीं। २२