पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३६४

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मदागास्कर टापू में हत्याकाण्ड । ३३S 2 हत्याकाण्ड को रोकने के लिए चश्चल हो उठा । मैं अपने साथियों को पुकार कर चलना ही चाहता था कि इतने में जहाज़ का मॉकी और चार नाविक हताहत स्त्रीपुरुषों के शरीर कT पैरों से कुचलतेउछलतेकूदते मेरे पास आये। उनका शरीर लहू से लथपथ था तो भी उन लोगों की रक्तपिपासा अब तक मिटी न थी । भू वे बाघ की भौति वे लोग तब भी अनावश्यक नरहत्या के लिए लोलुप बने फिरते हैं । थे । हमारे साथियों ने उन्हें पुकार कर बुलाना चाहा, पर वह पुकार क्या उनके कानों में प्रवेश करती थी ? बड़ी बड़ी । मुश्किल से एक ने हम लोगों की पुकार पर ध्यान दिया। पीछे सभी मेरे पास आ गये । माँझी हम लोगों को देखते ही मारे उल्लास के सिंहनाद कर उठा । उसने समझा कि उनके इस पैशाचिक कर्म के पृष्ठ पोषक और भी कई व्यक्ति आये हैं । वह मेरी बात सुनने की । कुछ अपेक्षा न करके उच्चस्खर से बोला –“कतान, कप्तान ! आप आये हैं, अच्छा हुआ । हम लोगों को अब भी आधा काम करना है। टाम जेफ्री के सिर में जितने बाल हैं उतने मनुष्यों का जब तक बलिदान न करेंगे तब तक हम लोग दम न लेंगे । इन दोजी कुत्तों का इस दुनिया से नामनिशान मिटाकर ही यहाँ से हम लोग जायेंगे । अभी क्या हुआ है ?' यह कहकर उन लोगों ने दौड़ लगाई । मेरी एक भी बात सुनने की अपेक्षा न की। उनको रोकने के लिए मैंने चिल्लाकर कहा “अरे नीच, • पिशाच ! तुझे क्या सूझा है १ ख़बरदार ! अब एक आदमी को भी तू न मार सकेगा। किसी पर हाथ चलाया कि समझ से . .