पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३७०

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भारत में क्रसे का निर्वासन । ३५ यदि कप्तान हम लोगों की बात न मानेंगे तो हम लोग जहाज़ से उतर कर चले जायेंगे । के मेरा भतीजा बड़े संकट में पड़ा । नाविकों की बात मानता तो मुझसे उसे नाता तोड़ना पड़ता है और यदि मेरा 1 से पक्ष लेता है तो वे लोग बिगड़ कर च ले जायेंगे । नाविक न रहने से जहाज़ कैसे चलेगा १ किन्तु उन लोगों के कारण वह मुझको कैसे छोड़ दे, इस चिन्ता ने उसके चित्त को मथ डाला। तब उसने कुछ बात बनाकर उन लोगों से कहा-मेरे चचा साहब इस जहाज़ों के हिस्सेदार हैं, इसलिए उनको अपनी निज की सम्पत्ति से दूर करने वाला मैं कौन हूँ १ तुम लोग रहना न चाहो तो जहाज़ छोड़ कर चले जाओ। किन्तु इस बात को भली भाँति याद रक्खो कि देश लौटने पर तुम लोग सहज ही न छुट सकोगे। बेहतर होगा कि माँझी मेरे साथ चले । इस विषय में सब आदमी मिल कर जो राय तय करेंगे वही होगा (?’ माँझी ने कहा -“उसके साथ हम लोगों से - है का कोई सम्पर्क नहीं है । वह यदि जहाज़ पर आवेगा तो हम लोग उतर जायेंगे । तब कप्तान ने उन सबोंसे कहा-अच्छा, तो मैं ही जा कर उनको खबर देता हूँ। जब मैंने भण्डारी को उसके पास भेजा उसके कुछ ही देर बाद मेरा भतीजा मेरे पास आ पहुंचा। उसे देख कर मैं बहुत प्रस न हुआ। मुझे इस बात का भय था कि शायद नाविकगण उसे मुझसे भेट न करने दें। इस दूर देश में मुझे खजनहीन निःसहाय अवस्था में छोड़ जाने से मैं निःसन्देह बडी विपत्ति में पड़ जाता । मैं उस निर्जन द्वीप में जैसा पहले पहल जा पैड़ा था, उसकी अपेक्षा भी यहाँ की अवस्था च- ‘