पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३७४

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चोरी के जहाज पर क्रूसो।

प्र चोरी के जहाज पर ऋसो। ३४8 जान मैं लवन खरीदने चला। मैं बोर्नियो टापुओं में ' प्रमति घूमताफिरता पाँच महीने में फिर अपने मुद्दे पर आ पहुंचा और फ़ारस के सौदागरों के हाथ लव और जायफल बेंच कर एक के पाँच वसूल कर मैंने बहुत धन कमाया । हम लोगों ने लाभ का रुपया आपस में बाँट लिया। मेरे साझीदार अँगरेज ने मुझ पर जरा आक्षेप करके कहा- “कहिए साहब ! आलसी होकर बैठ रहने की अपेक्षा इधर उधर घूमनाफिरना अच्छा है या नहीं ?' मैंने कहा- हाँ, अच्छा तो है, किन्तु आप मेरे स्वभाव को भली भाँति नहीं जानते । जब भ्रमण का उन्माद मेरे सिर पर सवार होगा तब आपको दम लेने की भी फुरसत न हूँगा । आपकी नाक में रस्सी डाल कर अपने साथ साथ लिये फिरतुंगा। । चेारी के जहाज़ पर क्रूसे इसके कुछ दिन बाद बाताविया से एक पोर्तगाल का जहाज आया । जहाज़ के मालिक ने उस जहाज के बेचने का विज्ञापन दिया । मैंने जहाज मेल लेने का निश्चय करके अपने साझी से कहा । वे भी राजी हुए । हमने मूल्य देकर जहाज ले लिया। हमने जहाज के नाविकों को नौकर रखने की इच्छा से उनको खोजने जाकर देखा कि जहाज पर एक भो प्राणी नहीं है । सभी न मालूम कहाँ चम्पत हुए। ख़बर मिलो कि वे लोग यहाँ से मुग़लों की राजधानी आगरा जागे । वहाँ • से सूरत, और सूरत से फ़ारस की खाड़ी होते हुए अपने देश को लौट जायेंगे ।