पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३९१

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३६६ राबिन्सन क्रसो । अच्छा लाभ उठाया और उस जहाज़ को तिजारती जहाज़ कायम कर सनद लिखा ली। मैनिला सरकार की ओर से

बह जहाज़ भाड़े पर मैक्सिको भेजा गया । मेरे मुंशी ने

मैक्सिको जाकर उस को बेच डाला । कोई आठ वर्ष के बाद वह मुंशी प्रचुर धन उपार्जन करके गलैण्ड लौट आया। चीन में क्रम अभी मैं चीन में हूं । देश से कितनी दूर आ गया हूं ! मेरा देश पृथिव के एक प्रान्त में है, और आया हूं दूसरे प्रान्त मे । अपने देश लौट जाने का कोई सुयाग या संभावना अभी देखने में नहीं आती । चार महीने बाद यहाँ एक और मेला होगा । तब एक नाव मिल जायगी ते ख़रीद लेंगा और भारत को लौट जाऊँगा। इसके पहले लौटने का कोई सुयोग , देखने में न आया । उस मेले के अवसर पर यदि कोई यूरोपीय जहाज़ भाग्य से मिल जाय तब तो सब भाँति अच्छा ही होगा। अब बदकार जहाज़ चला गया, किसी का कुछ भय नहीं रहा। इसी आशा से हम लोग वहाँ ठहर गये । यहाँ ठहरने से धीरे धीरे कई एक यूरोपीय पादरियों से परिचय हो गया । हम लोग उनके साथ चीन देश देखने के लिए घूमने लगे । इस देश में अब भी कुछ विशेष उन्नति नहीं हुई । प्राय: सभी लोग जाहिल हैं। ग्रहण होने से वे लोग समझते हैं कि राहु नामक एक दैत्य स्य केा निगल जाता है, इसलिए दैत्य के भय दिखाकर भगाने के लिए सभी लोग मिलकर घड़ी-घंटा बजाते और खूब शोरगुल रचाते हैं।