पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/४०५

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राबिन्सन क्रूसो।

३७ राबिन्सन क्रूसे। तातार देश के प्रायः हरेक गाँव में चामचीथोंशु देवता ही प्रधान है। यहाँ रहने वालों के घर घर में मूर्तिपूजा होती है । इसके सिवा वे लोग सूर्य, चन्द्र, ग्रह, नक्षत्र, जलवायु और बर्फ़ आदि समस्त प्राकृतिक पदार्थों को पूछते थे मानों प्रकृति ही उनकी देवीदेवता है । सम्पूर्ण प्रतिमयी सृष्टि में एक ईश्वर ही की शक्ति का विकाश है, इसका ज्ञान उन लोगों को कुछ भी नहीं है। वे लोग विद्या के गाढ़ अन्धकार में पड़कर सभी को भिन्न भिन्न मानकर पूजते हैं । 7 सब आया इस एक में झाड़-पात फलफूल । कबिरा पाछे क्या रहा गहि पकड़ा जिन मूल ॥ क्रमशः हम लोग टोबालस्क नगर में उपस्थित हुए । हम लोग सात महीने से बराबर रास्ता चल रहे थे । अब पाला पड़ने लगा । जाड़े की मात्रा उत्तरोत्तर बढ़ने लगी । हम लोग चिन्तित हो उठे । किन्तु रूसी लोग उत्साह देकर कहने लगे , कि चलने का मज़ा तो शीतकाल ही में है । सफ़र शीतकाल ही काअच्छा । जब जल, थलपहाड़ और मैदान सभी स्थान कठिन बफ से ढंककर एक से चिकने हो जाते हैं तब उनके ऊपर बल्गा हरिण की बेपहिये की गाड़ी में बैठ कर दिनरात चलने में बड़ा आनन्द और आराम मिलता है । तुम लोगों का आनन्द और आराम तुम्हें मुबारिक हो । बर्फ से आच्छादित देश में मुझे तो विशेष सुख का अनुभव न होता था । हाय ! इस समय मुझे वह अपना टापू स्मरण हो आाया। वहाँ बराबर वसन्त ही बना रहता था । देह पर कपड़ा डालने की भी प्रायः आवश्यकता न पड़ती थी, और यहाँ यह दुरन्त दारुण शीतकाल की कठिन विभीषिकां! कितना ही बदन में कपड़ा लपेटो तो भी बदन गरम न हो।' हैं !