पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/९९

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राबिन्सन क्रूसो ।

राबिन्सन से। उसे मैं भग्न जहाज के लूटने ही में लगाता था। लकड़ी का तख़्ता, लोहा, सीसा आन्द जो कुछ पाता था । ले आता था । सेलहवीं जून -मु समुद्र के किनारे एक कछुआ मिला। सत्तरहवीं जूनमैंने कछुए को पकाया, उसके पेट में ६० अंडे थे । जब से यहाँ आया तब से लगातार बकरों और चिड़ियों का मांस खाते खाते जी ऊब गया था । आज कछुए का मांस बड़ा स्वादिष्ट जान पड़ा। मानो ऐसा स्वादिष्ट पदार्थ आज तक मैंने जीवन भर में कभी न खाया था । क्रसे की बीमारी अट्ठारहवीं जून से चौबीसवीं जून तक दिन भर पानी बरसता रहा, इस कारण मैं घर से बाहर न निकल सका। कुछ कुछ जाड़ा भी मालूम होने लगा। धीरे धीरे सारे शरीर काँपने लगा। मैं रात भर बेचैन पड़ा रहा। सिरदर्द के साथ स्साथ बुखार चढ़ आया। क्रमशः बेचैनी बढ़ने लगी । इस मानवन्य टापू में अकेला में, बीमारी के भय से ही, अधमरा सा हो गया। हल बन्दर के तूफ़ान के बाद आज मैंने फिर परमेश्वर से प्राणरक्षा के लिए प्रार्थना की । पर मैंने उन से क्या क्या कहा, यह मुझे स्मरण नहीं । उस समय मेरा मन ऐसी घबराहट में था कि मैं एकदम हतशान सा हो रहा था। मेरी बुद्धि ठिकाने न थी । दो एक दिन कुछ अच्छी हालत रही, फिर दो एक दिन बहुत ख़राब मालूम होने लगी। सिर के दर्द से में और भी अधिक कट पा रहा था।