पृष्ठ:विनय पत्रिका.djvu/४

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[ ७] पद-सूचना पद-संख्या पद-सूचना पद-संख्या ... २५ पात वात-सजात ... कहु केहि कहिय कृपानिधे "११० | जयत्यंजनी-गर्म कहे विनु रह्यो न परत २५६ / जयति जय शत्रु-करि-केसरी कहो न परत. विनु कहे .. २६२ जयति जय सुरसरी ... कही कौन मुँह लाइ कै ... १४८ जयति निर्भरानद-सदोह ... काजु कहानरतनु धरि सारयो २०२ जयति भूमिजा-रमण काहेको फिरत मन ...१९६ / जयति मर्कटाधीश ... काहेको फिरत मूढ मन धायो १९९ | जयति मगलागार ... २७ काहे ते हरि मोहिं विसारो ९४ जयति राज-राजेंद्र राजीवलोचन ४४ काहे न रसना गमहि गावहि २३७ / जयति लक्ष्मणानंत ___... ३८ कीजै मोको जमजातनामई १७१ जयति वात-संजात कृपासिंधु ! जन दीन दुवारे १४५ / जयति श्रीजानकी ...४०क कृपासिंधु ताते रहौं । १४७ | जयति सच्चिदव्यापकानंद ... ४३ कृपा सो धौ कहाँ बिसारी राम ९३ / जय-जय भगीरथनन्दिनि ... १७ केसव! कहि न जाइका कहिये १११ / जाउँ कहाँ ठौर है कहाँ ... २७४ केसव ! कारन कौन गुसाई ११२ जाउँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे १०१ केहू भाँति कृपासिंधु १८१ / जाके गति है हनुमानकी ... ३० कैसे देउँ नाहिं खोरि .."१५८ जाके प्रिय न राम-बैदेही .. १७४ कोजॉचिये सभुतजि आन - ३ जाको हरिदृढ़ करि अंगकरयो२३९ कौन जतन विनती करिये १८६ जागु, जागु, जीव जड़ !... ७३ कोसलाधीश, जगदीश • ५२ जानकी-जीवनकी बलि जैहौं १०४ खोटो खरो रावरो हौं ... ७५ जानकी-जीवन, जग-जीवन ७७ गरैगीजीह जो कहीं औरको हौं २२९ जानकीनाथ, रघुनाथ ... ५१ गाइये गनपति जगवदन १ जानकीसकी कृपा जगावती ७४ जनम गयो बादिहि वर बीति २३४ | जानत.प्रीति-रीति रघुराई १६४ जमुना ज्यों-ज्यों लागी बाढन २१ जानि पहिचानि मैं बिसारे हौं २५८ जय जय जगजननि देवि ... १६ | जॉचिये गिरिजापति कासी ६