पृष्ठ:विनय पत्रिका.djvu/७६

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७७ विनय-पत्रिका सकल सौभाग्य-सौंदर्य-सुषमारूप, मनोभव कोटि गर्वापहारी ॥३॥ (जयति) सुभग सारंग सुनिखंग सायक शक्ति, चारु चर्मासि वर वर्मधारी। धर्मधुरधीर, रघुवीर, भुजवल अतुल, हेलया दलित भूभार भारी॥४॥ जयति कलधौतमणि-मुकुट कुंडल,तिलक झलकभलिभाल,विधु-वदन-शोभा। दिव्य भूषन, बसन पीत, उपवीत, . . कियध्यानकल्यान-भाजननकोभा ॥ ५॥ (जयति)भरत-सौमित्रि-शत्रुघ्न-सेवित,सुमुख, सचिव-सेवक-सुखद, सर्वदाता। अधम, आरत, दीन, पतित, पातक-पीन सकृत नतमात्र कहि पाहि पाता ॥ ६॥ जयति जय भुवन दसचारिजस जगमगत, पुन्यमय धन्य जय रामराजा। “चरित-सुरसरित कवि-मुख्यगिरिनिःसरित, पिबत, मज्जत मुदित संत-समाजा ॥ ७॥ जयति वर्णाश्रमाचारपर नारि-नर, सत्य-शम-दम-दया दानशीला । विगत दुःख-दोष, सन्तोष सुख सर्वदा, सुनत, गावत राम राजलीला ॥ ८॥ जयति वैराग्य-विज्ञान-वारांनिधे, नमत नर्मद, पाप-ताप-हा।