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पृष्ठ:समाजवाद और राष्ट्रीय क्रान्ति.pdf/१६०

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( १३३ ) संघर्ष में बिना रियासती जनता को साथ लिए आगे नहीं बढ़ सकतं । रियासतों ने दमन से काम लिया है और गोलियां भी चलवाई हैं। कान्करेंस के प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया गया है और इन्दौर ने एक ऐसी अाजा निकाली है जिसके परिणामस्वरूप श्री. सुभाष बोस इन्दौर जाने से रुक गये । राजा लोग ब्रिटिश माम्राज्यवाद के सार्थी है। कृत्रिम बाधाएँ सदा नहीं रह सकती। स्वतन्त्रता की लड़ाई सबकी है, और राजनैतिक दृष्टि से भारत एक और अविभाज्य है । रियासतों के बारे में कांग्रेम की नीति उत्तरोत्तर अधिक विकसित होती जा रही हैं और जो कांग्रेसी रियासती जनता के संघर्ष में भाग ले रहे हैं, उनके लिए त्रिपुरी प्रस्ताव स्पष्ट ही एक . आगे बढ़ा हुअा कदम है। रियासती जनता यदि कांग्रेस कार्यसमिति से एक रियासती उपसमिति रखने की अाशा करे, तो उचित ही है । काँग्रेस का झण्डा रियासती जनता का भी झण्डा है, और वह ब्रिटिश शासन और सामन्नशाही स्वेच्छाचारिता से उसकी मुक्ति का प्रतीक है। मुझे हर्ष है कि आपने उसे अपना लिया है। कांग्रेस के संघर्ष में रियासती जनता का सम्मिलित हो जाना कांग्रेस की शक्ति का द्योतक है। परन्तु कांग्रेसी सरकारों के सामने कठिनाइयां और पेचीदा समस्याये पा रही हैं, और उनके कारण कांग्रेस मित्रो और विरोधियों की आलोचनात्रों और श्राक्षेपों का लक्ष्य बन गई है। कांग्रेस के कार्य में जो कमियाँ हैं उनका कारण यह है कि उसके पास पूर्ण और वास्तविक सत्ता नहीं है । अतः जनता को सामाज्यवाद से लड़ने, इस दासतापूर्ण विधान का विध्वंस करने, छः सौ के लगभग रियासतों की जनता को मुक्त करने और पूर्ण सत्ता पर अधिकार करने में अपनी सारी शक्ति लगा देनी चाहिये। रियासती जनता को आने वाले युद्ध के लिए धन-जन से