सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:समाजवाद और राष्ट्रीय क्रान्ति.pdf/१९०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

थी। युद्ध बहिष्कार की बात सामने लाकर, उससे उटने वाली संघर्ष की मांग की और से उदासीनना हो जाना बुरे नंनत्व का परिचा- इसके अतिरिक्त हमार विचार से, वर्तमान परिस्थितियों में ब्रिटिश भर कार और कांग्रेस के बीच समझौता होना सरल नहीं है। कांग्रेस (अाज की भी सुधारों की एक और किश्न से और अनिश्चित समय पर औपनिवेशिक स्वराज्य दे देने के वायदे म सन्तुष्ट नहीं हो भकती । और न ब्रिटिश सरकार ही कुछ वास्तविक मत्ता छोड़ने का तैयार हैं। अतः समझौता कटिन प्रतीत होता है । दमन जी बोलकर किया जा रहा है । जैसी वस्तुस्थिति है, उसे देखते हुए मंवर्ष में पीछा छूटना सम्भव नहीं दीग्वता । कामर गय की बातों के अाधार पर भी हम मघर्ष के लिए नयार रहना चाहिए । कामरेड राय ने कांग्रेस के प्रधान में ब्रिटिश सरकार के साथ कुछ शर्तों के आधार पर बान चीत चलाने का अनुरोध किया था। मान लीजिए कि उनकी राय मान ली जाती, और जो माँगें उन्होंने नय्यार की थीं ब्रिटिश सरकार के सामने रग्ब दी जाती, और मान लीजिए कि उन मांगों को टुकरा दिया जाता, तो उस दशा में कॉग्रेस क्या करती । संघर्ष निश्चय ही अनिवार्य हो जाता। यह अचम्भे की बात है कि कामरेड राय ने इस अवस्था के लिए कुछ नहीं सोचा । इसका उनर यह दिया जा सकता है कि जो शते उन्होंने सुझाई थीं वे इतनी नरम और उचित थीं कि ब्रिटिश सरकार उन्हें टुकरा नहीं सकती थीं । परन्तु अपने विरोधियों की मधुर औचित्यबुद्धि । (sweetreasonableness) पर भरोसा करना मूर्खता है । शत्रु की नीति हमें लड़ने को बाध्य करने की भी