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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/५४९

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परिशिष्ट


परिशिष्ट १
गांधीजीके नाम लेनका पत्र
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अप्रैल ११, १९११
 

प्रिय श्री गांधी,

प्रवासी विधेयकके सम्बन्धमें आज तीसरे पहर आप यहाँ आये थे। उसीके विषय में खेदपूर्वक सूचित कर रहा हूँ कि इस समय जनरल स्मट्स आपको विधेयक या उसमें होनेवाले किसी संशोधनके बारेमें इससे पहले कि वह फिर संसद में लाया जाये कोई सूचना देनेकी स्थिति में नहीं हैं। पूरे मामलेपर अभी भी विचार किया जा रहा है और सम्भव है उसपर सप्ताह के अन्ततक विचार चलता रहे। इन परिस्थितियोंमें मुझे खेद है, हम आपको ऐसी कोई रूपरेखा नहीं दे सकते जिसका उपयोग आप अपने तार में कर सकें; मै तो केवल इतना ही सुझाव दे सकता हूँ कि आप तार दें कि आप विभाग से सम्पर्क बनाये हैं और जब वहाँसे कुछ निश्चित रूपसे पता लगेगा तो फिर भारत तार भेजेंगे।

आपका विश्वस्त
 
अनॅस्ट एफ० सी० लेन
 
श्री मो० क० गांधी
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मूल अंग्रेजी प्रति (एस० एन० ५४५१ ) की फोटो नकलसे।


परिशिष्ट २
गांधीजीके नाम लेनका पत्र
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अप्रैल २१, १९११
 

प्रिय श्री गांधी,

प्रवासी विधेयकके मसविदेके सम्बन्धमें आपके १९ और २० अप्रैलके लिखे पत्र मुझे मिल गये हैं और मैंने दोनों पत्र मन्त्रीके सामने पेश कर दिये हैं।

जनरल स्मटसने मुझसे आपको यह सूचित करने को कहा है कि अगले सप्ताहके प्रारम्भमें संसदके सत्रावसानकी सम्भावनाको देखते हुए, सरकारके लिए इस अधिवेशनमें प्रवासी कानूनको किसी रूपमें आगे बढ़ा सकना सम्भव नहीं होगा।

सरकारकी यह हार्दिक इच्छा है कि इस पेचीदा प्रश्नका कोई हल निकाला जा सके; वह इस बीच फिर इस मामलेका अध्ययन करेगी और देखेगी कि समझौता कर सकनेकी दिशामें क्या किया जा सकता है।