पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/१०१

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काव्य के हेतु-प्रतिभा और रुचि ६३ पाश्चात्य देशों के कुछ प्राचार्यों (जैसे स्पिन्गन) ने दोनों प्रकार की प्रतिभाओं (Genius and Taste ) को एक बतलाया है क्योंकि आलोचना भी एक प्रकार का सृजन है, सृजन न सही तो पुनःसृजन तो है ही । अपने को कवि की स्थिति में किये बिना भावक को पूरा-पूरा आस्वाद नहीं मिलता और प्रास्वाद लेकर ही अपने अनुभव का दूसरों के लिए परिप्रेषण करना पड़ता है। कवि जिस प्रकार संसार का भावक है उसी प्रकार आलोचक कवि का भावक है। ___ जहाँ तक अपने भावों को दूसरों तक पहुँचाने की बात है वहाँ तक कवि और भावक की प्रतिभा एक ही होती है किन्तु सृजन और प्रास्वादन की प्रतिभा में अन्तर है । भावक में कवि-की-सी कल्पना होती है किन्तु उसमें बुद्धितत्त्व का अपेक्षाकृत आधिक्य रहता है। उसमें कवि की अपेक्षा निरपेक्षता भी अधिक होती है। उसी के साथ तन्मयता की मात्रा भी कम हो जाती है। कवि अपनी कृति का पूर्ण रूप केवल कल्पना में ही अनुभव करता है, वह जङ्गल के सामूहिक प्रभाव का ध्यान रखते हुए भी वृक्षों को ही अधिक देखता है । भावक वृक्षों को तो कवि को भाँति ही देखता है किन्तु पीछे जङ्गल को भी सावधानी से देख लेता है। कवि अपना कवित्व निःशेष कर ही जङ्गल को वास्तविक रूप में देखता है किन्तु भावक उसको सजी-सम्हली पूर्ण वास्त- विकता में देखता है। कवि अपनी व्याख्या सबसे अच्छी कर सकता है, इसी प्राशय की फारसी में एक कहावत है-'तसनीफ रा मुसन्निा नेको कुनद बयाँ (अर्थात् लिखे हुए की लिखने वाला ही अच्छी तरह व्याख्या कर सकता है)- किन्तु कभी-कभी भावक काव्य में से वह बात खोजकर निकालता है जो शायद कवि की कल्पना में भी न रही हो। प्रतिभा और रुचि को हमारे यहाँ दो मानते हुए भी रुचि को प्रतिभा का ही भेद माना है । इसमें भेद और अभेद दोनों ही पाजाते हैं । रुचि कवि में भी किसी अंश में अपेक्षित है। कवि की प्रतिभा का शास्त्रीय प्रतिरूप औचित्य का ज्ञान है। रुचि स्वाभाविक है, औचित्य या विवेक शास्त्रीय ज्ञान से प्राप्त होता है। गोस्वामीजी की निम्नोद्धृत चौपाई में इसी विवेक का उल्लेख किया गया है :--- 'कवित्त-विवेक एक नहिं मोरे । सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे ॥' -रामचरितमानस (बालकाण्ड) रुचि दो प्रकार की होती है-एक वैयक्तिक, दूसरी लोकरुचि । वैयक्तिक रुचि प्रायः भिन्न होती है किन्तु लोकरुचि कम-से-कम एक देश या प्रान्त में एक-सी होती है । लोकरुचि ही प्रायः शास्त्रीय रुचि होती है। जहाँ भावक की रुचि