पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/१०५

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कविता और स्वप्न--कल्पना शून्यता अर्थात् अपने विषय के अतिरिक्त किसी दूसरी वस्तु का भान न होना । _ दिवा-स्वप्नों में भी करीब-करीब यही बातें होती हैं किन्तु उनका प्रत्यक्षी- करण इतना सजीव नहीं होता जितना कि रात्रि-स्वप्नों का। इसका कारण यह है कि दिन में कल्पना के बहाव में बह जाने पर भी बुद्धि का कठोर शासन . बना रहता है और वास्तविक संसार से हमारा पूर्ण विच्छेद भी नहीं होता। यहाँ पर कल्पना के सम्बन्ध में दो-एक शब्द कह देना अनुपयुक्त न होगा। कल्पना वह शक्ति है जिसके द्वारा हम अप्रत्यक्ष के मानसिक चित्र उपस्थित करते हैं । कल्पना का अंग्रेजी पर्याय 'Imagination' है । यह कल्पना शब्द 'Image' या मानसिक चित्र से बना है । संस्कृत में कल्पना शब्द 'कल्प' धातु से बना है, जिसका अर्थ है सृष्टि करना । स्वर्ग के कल्पवृक्ष की भाँति कल्पना भी मनचाही परिस्थिति उपस्थित , कर देती है । कल्पना द्वारा उपस्थित किये हुए चित्र भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों काल के हो सकते हैं । मैं कालेज में बैठा हुआ घर पर जो हो रहा होगा उसकी कल्पना कर सकता हूँ। यह वर्तमान किन्तु अप्रत्यक्ष के सम्बन्ध में कल्पना है । शिवाजी या शाहजहाँ औरङ्गजेब द्वारा कैद किये जाने पर क्या सोचते होंगे यह भूत की कल्पना है और भावी युद्ध कैसे होंगे यह भविष्य- सम्बन्धी कल्पना है। कल्पना असङ्कल्पित ( Passive ) और सङ्कल्पित (Active) दोनों प्रकार की होती है । असङ्कल्पित कल्पना ही दिवा-स्वप्नों और स्वच्छन्द कल्पना ( Fancy ) में परिणत हो जाती है । स्वप्न में भी इसी प्रकार की कल्पना काम करती है। जब हमारे मानसिक चित्रों का तारतम्य बिना किसी प्रयास के चलता रहता है तब वह निष्क्रिय कहलाती है और जब वह प्रयास से चलता है तब वह सक्रिय होती है। इसके अतिरिक्त कल्पना का एक और विभाग किया गया है; जब पिछले दृश्य जैसे-के-तैसे कल्पना में दुहराये जाते हैं तब उसे पुनरावृत्त्यात्मक ( Reproductive) कहते हैं और जब पहले के चित्रों में उलट-फेर होता है या उनके नये योग किये जाते हैं तब वह सृजनात्मक ( Productive ) कहलाती है। हमने स्वर्ण भी देखा है और मृग भी। इस प्रकार हम स्वर्ण-मृग की कल्पना कर सकते हैं किन्तु इस प्रकार की कल्पना की सीमाएँ होती हैं। हम दो विरोधी बातों को एक साथ नहीं जोड़ सकते हैं । हम ऐसी वस्तु की कल्पना नहीं कर सकते हैं जो एक साथ नारङ्गी- सी गोल और पैसे-सी चपटी भी हो तथा जो एक ही साथ सफेद हो और काली भी। .. कल्पना का हमको हर समय काम पड़ता है। साधारण प्रत्यक्ष में आधा