पृष्ठ:स्टालिन.djvu/४९

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५ सन् १९०१ की क्रांति में भाग रूसी क्रान्तिकारी लोग अत्यन्त शान्ति तथा धैर्य के साथ गुप्त रूप से काम किया करते थे। अत: उन का काम लम्या और थका देने वाला तथा प्रायः जमीन के नीचे किया जाता था। इसीलिये उसका परिणाम भी घागे चल कर निश्चित रूप से इच्छानुसार निकला। रूस-जापान युद्ध में जब रूस की हार हुई तो एक नियत समय पर देश के प्रत्येक भाग में क्रान्तिकारी अान्दोलन इस प्रकार प्रारम्भ हो गा मानो किसी ने अपने विशेष निर्देश से उन सेवका आरम्भ किया हो। यदि ध्यान पूर्वक देखा जाये नो मन १६५ की रूसी- क्रान्ति जिसे जार के शासन ने घार अत्याचार के बल पर दबाया था, अस्तृवर १६१७ की क्रान्ति का एक आदर्श-पूरा रूप थी। नाट्यकारों के शब्द में दूसरी क्रान्ति को यदि 'तमाशा' कहा आ सके तो प्रथम को उसको 'रिहर्मल' कहना अनुचित न होगा। लेनिन और हॉटस्की दोनों सेट पीटर्स वर्ग में थे। वहां रूसी कार्यकर्ताओं की प्रथम सोवियः (चुनी हुई सभा) स्थापित हो चुकी थी। उधर स्टालिन दक्षिणी रूस में लगा हुआ था। स्टालिन की कार्य-पद्धति के सम्बन्ध में यह बात विशेषतः कहनी पड़ती है कि जब १९०५ को क्रान्ति का प्रारम्भ हुआ तो -