पृष्ठ:स्टालिन.djvu/९७

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[हियानवे के पास बैठ जाता है और पाइप जलाकर दिन भर के समाचार पढ़ता है। वह प्रायः वही स्यूट पहने रहता है जिसे पहने हुए आपने उसे उसके फोटो में प्राय: देखा होगा। वह स्यूट देखने में सैनिक सिपाही की वर्दी से मिलता जुलता है। किन्तु वास्तव में वह रूसी मजदूरों का साधारण लिवास है। इसे सैनिक वर्दी और साधारण नागरिक लिबास के सम्मिश्रण से तयार किया गया है। पाइप मुख में लिए हुए और तानेभरी मुखमुद्रा के साथ ऐसा प्रतीत होता है कि वह सदा हसता ही रहता है। वह अपने भेंट करने वालों से मुलाकात करता है। रूस के हेनरी बाईस नामक कवि ने एक बार स्टालिन की रहस्यमय हँसी पर एक विशेष लेख लिखा था, जिसका यह वाक्य उल्लेखनीय है "उसकी आंखों या रूपरचना में कोई ऐसी बात है जिसके आधार पर देखने वाले समझते हैं कि स्टालिन हर समय मुस्कराता रहता है" परन्तु इससे आगे उसने लिखा है कि वास्तव में हंसी का यह धोखा उसकी मुखमुद्रा से नहीं, वरन् आँखों की दबी हुई रचना से होता है। यह भी हो सकता है कि इस गर्जस्तानी कृषक पुत्र के रूप रंग के कारण-जिनमें द्वेष, कपट और स्यानपत यह सब बातें सम्मिलित रूप में पाई जाती हैं-उसके मुख पर हास्य का वातावरण बन गया हो। स्टालिन की बड़ी विशेषता यह है कि रूसी क्रान्ति के किसी भी नेता थे उसकी समानता नहीं है। वहां के शेष सभी नेवा लेखक ये। वह क्रान्ति के विषयों पर पुस्तकें और लेख लिखा करते थे। उन्होंने इस कला में विधिपूर्वक शिक्षण भी प्राप्त किया था। वह नेता लोग समाजवादी इतिहास से भली भांति परिचित थे। वह प्राचीन विद्रोह से लेकर फ्रान्सीसी कान्ति और वर्तमान काल के मजदूरों के विद्रोह तक के सभी