खूब गुनगुनाती मोतो को कडियाँ न-न-न न-न-न धुन मे क्या ही मधुर नकार छुपाया किंकिणियो की रुनझुन म । इस नकार को मोमासा का अर्थ जरा समझा देना- मेरी उलझी हृदय ग्रन्थि को और जरा उलझा देना हिस्ट्रियट जैल, गाजीपुर १० दिसम्बर १९३० 1 दुल-मुल आण तुम्हारी आखो मे आंसू देखे तडपन देखी अमित चाह देखी, रिस देसी, लोक लाज अडचन देखी, आज तुम्हारे नयन पुटो में सपनो को जगते देखा, आज अचानक सजनि, तुम्हारे यि की सत्र धडकन देखी। अलस शिथिलता लिये, विवशता लिये, पराजित भाव लिये,- निपट दीनता लिये, सलीने हिय का चित चाव लिये, पारणा भरे दृगो से तुमने क्यो देखा यो अकुला के ? आज सभी कुछ प्रकट हो गया, रहान रच दुराव, प्रिये । हो जायेगा धीरे - धीरे वही घाव इतना गहरा, यह न पता था, क्योकि सदाका जो मैं नौमिसिया ठहरा, यदि में यही जानता होता, तो पया यो बढके आता? सच बाहता हूँ, विठला देता मैं निज पुनली पर पहरा । हम विषपार्यो जनम फ
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