पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१५७

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वायव-बायसाहा १४३ चायत (सं० पु.) वयतके पुत्र । राजा पाशा न. इनके । . काकके एक चक्षु नष्ट होनेका कारण नृसिंहपुराणमें 'शधर थे। .:. . इस प्रकार लिखा है-जब चित्रकूट पर्वत पर राम और यायती -पश्चिम बङ्गवासी निम्नश्रेणोको पक जाति । सीता दोनों रहते थे, उस समय एक दिन एक कोयने इस जातिके लोग अकसर चूनेका प्यवसाय किया करती सीताफे स्तन में चीन मारी थी। स्तनसे रक्तका वहना है। बादती देखो।" देख कर रामचन्द्रने फोका वध करने के लिये ऐपिकास्त्र वादि (सं० पु०) मत्स्यविशेष, एक प्रकारको मछली। फेंका। यह कौवा इन्द्रका पुत्र था, इसलिये वह डरफे Pseudentropius taakree. मारे इन्द्र के पास भाग गया। यहां उसने अपना वायदण्ड (सं० पु०) घायस्य दण्डः यद्वा वायतेऽनेनेति अपराध स्वीकार कर माणभिक्षा मांगी। इस पर इन्द्र कोई याय, वाय पय दण्डः। वायदण्ड, जुलाहोंको ढरकी। उपाय न देख देवताओं के साथ रामचन्द्र के पास गये पायन (सं० क्ली०) पिष्टकविशेष, घह मिठाई या पक्यान और उस कौवेको प्राणदान देनेको प्रार्थना की । गमचन्द्र- जो देवपूजा या विवाहादिक लिये बनाया जाय। . ने कहा, मेरा अत्र निष्फल होनेको नहीं, इसलिये घर ग्रायनिन् (-सं० पु०) एक ऋषिपुत्र। (सकारकौमुद्रो) अपनी एक आंप दे दे। कीर्वा राजी हो गया और खायरज्जु (सी .) जुलाहोंके करयेको पै या कंघी । | यह याण एक मात्र नष्ट करके हो स्थिर हुआ। तभीसे वायलपाड़-मन्द्राजप्रदेशके कड़ापा जिलान्तर्गत पायल. कौवोंको सिर्फ एक मांस है। (नरसिंहपुराण ४३ अ०) -

पार तालुकेका सदर। यहां प्रत्मतत्त्वफे निदर्शनस्वरूप पूरकपिण्डदानके पाद काकर्फ उद्देशसे वलि देनी

रापस्यामीका एक प्राचीन मन्दिर और शिलालेख है। होती है। काक धर्माधर्मका साक्षी है तथा पिण्डदानादि- याय (सं० लि.) यायोरय वायु-मण । यायुसम्बन्धीय । का विषय यमलोकमें जा कर यमराज RAT है। पाययो (सस्त्री०) १ उत्तरपश्विमदिक उत्तर-पश्चिमका ! नयान थाद्धके बाद भी काकफे उनसे . लि देनेकी कोना) २ कार्तिक अनुचर एक मातृमेद। प्रथा है। काफचरित्र मालूम होने पर भूत, भयिप और . . . (भारत ६४६ ३७) पर्तमान विषय जाने जा सकते हैं। घायवीय (स'०नि०) यायुसम्यम्धीय । जैसे-पाययोय . . विशेष विवरण काक शब्दमें देखो। परमाणु। (त्रि.)२यायससम्बन्धी। पायथ्य (स० वि०) वायुदे यतास्पेति घायु ( वाचतुपि- वायसजना (स. स्त्री० ) १ काकजा, चकसेनो। ऋयसो यत् । पा ४१२१३१ ) इति यत् । १ वायुसम्बन्धी।। २ गुञ्चामल, घुघचीको जड़ । २ यायुघटिन, वायुसे बना हुआ। ३ जिसका देवता यायसतन्तु (स.पु.) १ हनुफे दोनों जोड़का नाम | घायु.हों। (पु.) ४ पद कोण या दिशा जिसका २ काण्डिका, फौमाठोंठौं। कौयेको टोटो। अधिपति वायु है, पश्चिमोत्तर दिशा। ५ चौबीस हजार पायसतोर (सली .) एक नगरका नाम । छासी श्लोकात्मक घायुपुराण । यह अठारद पुराणों में । यायसविद्या (स' खी० ) बायससम्बन्धीय विद्या, क.

पक है। पुराण शादमें विस्तृत विवरण देखो। ६ एक | चरित।

- अस्त्रका नाम। | पायंसानो (स० स्त्री०) वायलेन अपने इमि भद-कर्मणि. पायस ( स. पु०) ययते इति पय-गती । (यश्च । उण ल्यूट, सोप् । १ महाज्योतिष्मती लता।. २ फाफतुण्डी, .. ३.१२०) इति गस, सच कित्। १ अगुरुक्ष, अगर कौमाटोंठो। . का पेड़। २ श्रीवास, सरल निस। ३ काक, कौवा । पापसान्तक (से. पु.) पेचक, उल्ला - मग्निपुराणमें लिखा है, कि अरुणके श्येनो नामकी पत्नो- यायसाराति (स पु०) पायसस्य अरातिः शनुः। पेचक, से जटायु और सम्पाति नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए थे। उल्ट। इमो जटायुसे,काक की उत्पत्ति हुई। यायसाहा (स० स्त्री०) यायसम्य आहा नाम यस्याः । सतह।