पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२६१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


'वाला-चालको २२५ ले कर' युद्धके समय तक यालसेषिकोका विप्लव- खिल ऋर्षि। प्रत्येक पि डोल डील में अंगूठेके घरावर कारो कार्यकलाप दिनों दिन बढ़ता गया। साम्य हैं। (कर्मपु० १२ १०) धादियोंकी . ( Communists) पद्धतिके अनुयायो वालिद (अ० पु०) पिता, धाप। . सैनिकों तथा कलकारखाना असन्तोषका वीज वोया बालिन् (सं० पु०) बाल एव उत्पत्तिस्थानत्वेन विद्यते गया। इसीके फलसे १६१७ ई०को जार गवर्नमेएटका यस्य, बाल-इनि । १ इन्द्र के पुत्र वानरराज, बदका पिता पतन हुआ तथा केरेनस्की ( Kcrensky )के कुछ समय और सुप्रीयका वडा भाई। मोधवीर्य इन्द्रदेवके वीर्य शासन करने के बाद पालसेविकेने पूरा अधिकार हासिल वालदेशमें गिरनेसे इसकी उत्पत्ति हुई, पाली नाम पड़ने. किया और एक नया शासनतन्त्र चलाया जिसका नाम का यही कारण है। वालि देखो। रखा गया 'सोवियेट' (soriet) या शासनपरिषद वाला फेशाः सन्त्यस्य बाल इनि । (त्रि०)२ वाल- द्वारा परिचालित शासनतन्त । अन्यान्य विवरणा रूस और विशिष्ट । साहयेरिया शब्दमें देखो। चाली (सं० पु०) वाजिन देखो। याला (सं० स्त्रो०) १ स्यनामख्यात औपविशेष । २ इन्द्रः चालु (सं० स्त्री० ) चलतेऽनेन घलं-प्राणने वल-उण। एल. वना और उपेन्द्रवन्नाके मेलसे बने हुए उपजाति नामक । वालुक नामक गन्धद्रव्य । सोलह प्रकारके वृत्तमिसे एक । इसके पहले तीन चरणों घालुक (सं० लो० ) वालु रेय स्वायफन् । १५लवाल क, में दो तगण, पक जगण और दो गुरु होते है तथा चौथे एक गन्धद्रव्य। (पु०)२पगियाल । चरणमें और सब हो रहता है, सिर्फ प्रथम वर्ण लघु वालुका (स० स्त्री० ) वालुक-टाप । १ रेणुविशेष, बालू होता है। . । पर्याय--सिकता, सिक्ता, शीतल, सूक्ष्मशकरा, प्रवाही, वालाक्षी (सं० स्त्री० ) वाला: केशाइय अक्षिसदशश्च पुणे महासक्ष्मा, पानीययर्णिका । गुण-मधुर, शीतल, सन्तापं . यस्याः। मैशपुष्पा वृक्ष, एक पौधा जिसके फूलोंके दल और भ्रमनाशक । (राजनि०) २ शाखा। ३ हस्तः । आंखके आकारके लगते हैं। पर्याय-मानसी, दुर्गपुष्पो, पादादि, हाथ पैर ! ४ करो , ककड़ी 1५ कपूर, कपूर ।' केशधारिणी। .. . ६ वैद्यकोक्त यन्त्रविशेष, पालुकायन्त्र । वालाम ( स० क्लो०) १ केशान । २ एक प्राचीन मान जो चालुकागड़ (सं० पु० ) वालुकया: गड़तीति तस्मात् भाठ रजका माना जाता था। . . क्षरति यो वालुकागड़ 'पचायच् । मत्स्यविशेष, एक वालाप्रपोनिका (सं० स्त्री०) लताविशेष । । प्रकारकी मछली। पर्याय--सिताङ्गः । पालि (सं० पु०) याले फेशे जातः वाल इम्। कपि वालुकात्मिका ( स० सो) वालुकाद्वात्मा स्वरूपो यस्याः विशेष;.. किष्किन्धाका बानर राजा जो अङ्गन्दका कन् अत इत्व'1 १ शर्करा, चीनी । (त्रि०) वालुका पिता और सुप्रीयका वडा भाई था । पर्याय -याली, यानर आत्मा यस्य । २ वालुकामय । राज । विशेष विवरण यालि शब्दमें देखो। वालुकामभा (स. स्त्री) वालुकानांमुष्णरेणुनां प्रभा- पालिका (सं० स्त्री० ) वाला एव वाल स्याङ्क-कन् राप्। यस्यां। एक नरकका नाम । अत इत्वं । १ वाला, कन्या । २ वालुका, यालू । ३ स्वर्ण- घालुकयिन्त्र (स ) औषध सिद्ध करनेका एक प्रकार- भूषण, याला । ४ पला, इलायची। -... . . का यन्न। यालिकाध्यविध (सं० पु. ).यालिकास्य देश।। ..चालुको ( स०सी० ) १ कर्फ टोभेद, एक प्रकारको ककड़ी। ... ... . (पा ४१२२५४ ) ! पर्याय-बहुफला, स्निग्धंफली, क्षेत्रकर्कटो, लरक्षा, पालिकायन (सं०नि०) बलिको होनेवाला। . कान्तिका; मूत्रला । (राजनि०) . चालिखिल ( सं०.पु०.) पुलस्त्यकी कन्यासन्ततिके गर्भसे यालुफैश्वरती (सक्लोतीभेद ।" ... भौर फतुषे औरससे उत्पन्न साउहजार ऋषिविशेष, वाल: यालुकी (स स्त्री० ) करीभेद, एक प्रकारको ककड़ी, ____Vol, XxI. 37