पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३९२

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३२४ विजागापट्टम् को अपनी संपतिकी रक्षा करने यि विशाखपत्तन | भेजी एक फोजने फ्रांसीसियों पर आक्रमण कर दियां: यन्दरमें फिले बनानेशी माझा दे दी। अप्रेजेनि बाहरी | किन्तु यह भमपूर्ण था [ रंगरावका उद्देश्य नहीं था कि thणसे पाने के लिए सद किला! फ्रांसीसियों पर आक्रमण किया जाये।इस घरनाक प ... . . . . . - . . | कारण मीमी: na a कारण फ्रांमीसी: स्वत: उनके विरोधी हो उठे। अंद - मुगल-शक्तिफे गमसान होने के बाद 'उत्तर सरकार' विजयनगरमराजको मौका मिल गया। उन्होने फ्रांसी- 'प्रदेश परावादफे निजाम हाथ भाया । निजामने राज्यं- सियोंकी सहायता पक फौज भेज कर वयिलीकै पात्य , शासन और राजम्यको घसूरीके सम्वन्धमें पहले की अपेक्षा दुर्ग पर भाक्रमण किया । क्रमशः यह फाएर बढ़ता गयो। . भनेक सुध्ययस्याये तो थौं। उनके अधिकारके समय नररक्तसे रणक्षेत्र प्लायित मौर भीषण दृश्पम परिणत राजमहेन्द्री और श्रीमाकोलमें एक मुसलमान राजकम हुआ। फिर मा रङ्गराय और उनके अनुवरवर्ग मामी. धारी रहता था। सियोंके पदानत होने पर राजी नहीं हुए। । किन्तु प्रथम मिजामको मृत्युझे याद हैदराबादका सिंहासना तमें देखा गया कि प्रवले शव सैन्यक साग धिकार ले कर उत्तराधिकारियों में विरोध उपस्थित हुमा । थोड़ो सेना ले कर लडना और विजयलाभकी भाशा मामीसियांने सलायत्जको हैदराबाद के सिंहासन पर करना वृथा है। यह सोच विनार कर: घे सब । धैठाने का विशेष उद्योग किया था। इम उपकारके कारण | अपनी अपनी स्त्रियों और पासव'को बाने हायमे हत्या सलायनशंगने उन लोगों के हाथ म नगर, इलोरा कर तलवार ले रणक्षेत्र में उतरें। कई सामनोंने रङ्गरायको राजमा दो और श्रोकागेल नामक चार साकारों को आश्रय देने की बात कही थो, किन्तु उन्होंने शव के सामने. दे उला । मन् १७५३ ई०१ मोसमेनानि महाबोर से भागने को अपेक्षा युद्ध में मर जाना हो मन समन्दा युगोने मनायनाङ्गमे इस विपरका एक फर्मान पापा | और भोपण.मार काट करने करने 'युद्धक्षेत्र में ये काम गा। इसके कुछ दिनों के बाद मन १७५७ ई० में बुगी | ठाये । रङ्गरायके छाटे नाबालिग पुत्रने 'इम भ'पण हत्या नाटक विभागके गवर्नर हुए। इस समय उनके द्वाग | काण्ड में रक्षा पई गो। राजाका कोई विश्वामो नौकर - हानेवाले युदो मन्त्रि गेमा विस्पान अपराध संघटिन | वालकको ले कर भाग गया। राजारदेव को रणक्षेत्र में हुआ। इस युद्ध में फ्रानोमी मैन्यने जिम रण चातुर्या और गनिन देख उन चार विस्त नौकरीने राज जोयनका ' य पताका प्रदर्शन किया था, यह उम स्थान हिन्दुक | प्रतिशोध लेनेको प्रतिक्षा को। ये चारों गहरी रातको हदय पर गहगे रेख जम गई। वे इस भयावह काण्डको | निश्रयी अङ्गलसे निकल कर: विजयनगरम् के राजाके साज भी नहीं भूठे हैं और गान में बने गाने हैं। । शिशिरमें घुसे और उनको मार कर गुप्त भाषसे लौट - म ममर मरर 'श्राहाकोल के सम्मान हिंदू | माये । . . .:: :: : : : मामांम विजयनगरम् सिंहापन गर गजति वितयं. | उपरोक्त रूपमे श्रीकाकोलको शासनव्यवस्था रामराज विराजमान थे। झन सासनापति मुसो युना। स्थिर कर सेनापति बुशीने विशाम्नपत्तनमें आ कर अङ्ग फे. माय उनका' सदभाव या । हिंदू नरपतिके प्रति रेजोको कोठो पर अधिकार कर लिया। किन्तु फारसो. शता या पुरस्कारस्वरूप उन्होंने गति अवर राजस, सी मधिक समय तक फलमोग नहीं कर सके । बङ्गाल निरित कर गजा गजति विजयरामको श्रोफाकोट में यह संवाद पहुंचने पर लाई क्लाइवने १७५६ में एक और गजमहेनी सरकार मरित कर दो। ... सैन्यदलके साथ वहां कर्नल फोर्डको भेजा । फेार्ड उत्तर:

. इस मम पिंजयनगरमज सांय वनिलांगज : सरकारमें उपस्थित हो विजयनगरम् राजके साथ मिल

रङ्गराधका वा शत्र ना जाग उठी। विजयनगरमाज ! गया। उक्त राजाने अपने पिताफे प्रीत फ्रान्सोसियाँको नेशन का क्षयं करने के लिये फ्रांसीमा सेनातिसे अनुरोध मित्रतासे विरक्त होकर.फ्रासासियोके दाधस उक्त राज्य किया। घर भस्मात् एक दुर्घटना होगा। रङ्गरायको . 'विच्छिन्न कर लेनेफे लिये पहले ही मनोको दुला