पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५२४

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४३८ विन्ध्यादि-विपक्ष पोछे पत्रपुष्पसमन्धित एक बड़ा वृक्ष है । मूर्शिके दोनों विधेश्वरी प्रसाद-एक प्रकार | इन्होने कथामृतिका मोर अनुचर हैं। इन अनुचरों में पांच खड़े और दो मानो नामक फुमारसम्भघको रोका, घटकपरको टीका, तर. दौड़ रहे हैं। यह स्रोमूर्सि इस समय सङ्कटादेवीके | ङ्गिणो नामको तर्कसंग्रहटीका, न्यायसिद्धांत-मुकाबली- नामसे पूजित हो रही है। हाफ्टर कनिदमका कहना | टीका और श्रीशतक नामक ज्योतिप्रय लिखा। है, कि यह षष्ठी देवीको प्रतिमूर्ति है, किन्तु प्रत्नतत्त्वविद् चिन्न ( स० वि०) विदक्त (नुदवितिः । पा ८/२.५६) फुहरारका कहना है, कि यह मूर्ति महायोर स्वामीको इति नत्वं । १ विचारित । २ प्राप्त । ३ज्ञात । ४ स्थित । माता त्रिशला देयोको प्रतिमूर्ति है। चिन्नप (स० पु०) काशोके एक राजाका नाम। विन्धयाद्रि ( स० पु०) विध्यपर्वत । (देवीभागवत ) (राजत० ५।१२।६) विन्ध्याधिवासिनी (सं० स्त्रो०) विध्यपराकी अधि. | विन्निभट्ट-तर्कपरिभाषाटोकाके प्रणेता : प्याली देवी, दुर्गा, विधवासिनी । विन्यय ( स० पु०) वि.नि-इ-गए । विनिगम, पिनिगम । विन्ध्यवासिनी पौर विन्ध्याचा देखो। ( विन्यस्त ( स० वि० ) वि-नि-अस-त । १ स्थापित, रखा विन्ध्यावली (स० स्त्री०) दैत्यराज वलिको स्त्री और वाण | हुआ । २ यथा स्थान बैठाया हुधा, जड़ा हुआ । ३ क्षिप्त, राजाकी माता । बलि पामन रूपी भगवान्को त्रिपादभूमि डाला हुआ । ४ करीनेसे लगा हुआ। ' दे कर जय दक्षिणान्त न कर सके, तब भगवान्ने उन्हें विन्यस्य (सं० वि०) घि-नस-यत् । विन्यासके योग्य, वांध लिया । इस समय विधावलीने हाथ जोड़ कर विन्यासके उपयुक्त । ... भगवान्की स्तुति को मोर कहा, "भगवन् ! माप गर्वियो- विन्याक (संपु०) वि.नि.अक-धन् । विद्धड़क पृक्ष, के गर्वको चूर्ण किया करते हैं। इससे आपने जो परियारा नामका पौधा। : कुछ किया यह ठीक ही है। जो जगत्पति हैं, ब्रह्माण्ड विन्यास (सपु०) वि-नि-अस घन् । १ स्थापन, रखना, जिनका कोड़ास्थान है, उनको 'यह मेरी चीज है' फह, धरना । २ यथा स्थान स्थापन, ठीक जगह पर करीनेसे कर किसी चीजका दान करना गर्व का चूड़ान्त परि रखना या बठाना, सजाना । ३ किसी स्थान पर डालना। चायक है । अतः मापने कर्त्तव्यकार्य ही किया है। किंतु ४ जड़ना। . ... . . प्रभो ! (महाराजके लिये नहीं) भविष्य में आपको किसी विपक्तिम (स'० लि०) घिपाकेन निवृत्तः विपच निमः । तरह कलङ्क न लगे, इसके लिये सीवुद्धिसे डर कर प्रार्थना · विपाक द्वारा निवृत्त, अतिशय परिपक्व ।। करती हूँ, कि महाराजको बंधनमुक्त कीजिये। महाराज विपपच ( सं. त्रि०) विपच क । १ विशेषकपसे भी आपके भक हैं। उन्होंने केवल आपके पादयुगर्लोको परिपाकमाप्त, खूब पका हुआ। २ पाकहोन, जो पका निरीक्षण कर दुरत्यज्य लै लोपयराज्य और स्वपक्षदल न हो, कया। ३ पूर्ण अवस्थाको प्राप्त । अनायास हो त्याग किया है। गौर तो क्या, आपके लिये विपक्ष (स० पु०) विरुद्धः पक्षी यस्य । १ शत्रु पक्ष, विरोध गुरु माझाको भी अवमानना की है। इस पर गुरुने बभि - करनेवाला दल । २ भिन्नपक्षाधित, विरुद्ध पक्ष । ३शन शाप भी दे डाला है। अतपय भगवन् | इस क्षेत्र में उन या विरोधोका पार्श्व । ४ प्रतिवादी या शत्रु, विरुद्ध दल को मुक्त कर देनेसे हम लोग कृतार्थ हो सकते हैं।" का मनुष्य । ५ व्याकरणमें किसी नियमके कुछ विरुद्र विध्यावलोफे युक्तिपूर्ण वाक्य पर प्रसन्न हो कर भगवान्- | ध्यवस्था, वाधक नियम, अपवाद । किसा वातके ने उसके पतिको धनमुक्त किया । यजि देखो। । विरुद्धको स्थापना, विरोध सडन । ७ न्यायमतसे साध्य विन्ध्याचलोपुन (स० पु०) विन्ध्याचल्योः पुत्रः । वाण का अभावविशिष्ट पक्ष । न्यायमतसं किसी किसी विषय. राज' (त्रिका) को मोमांसा करने पर हेतु, साध्य और पक्ष स्थिर कर विन्ध्यावलोसुत (स.पु. ) विन्ध्यावल्याः सुतः। वाण करना होता है, साध्य मभापरिशिष्ट हो विपक्ष क६. राज। (जटाधर) . . लाता है।