पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६४८

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विवाह

तक और मातृबन्धुसे नोचेके पांच पुश्त तक सपिण्ड | · वृक्ष. नदी, पर्वत, पक्षी, सर्प आदि नामवाली कन्याए कहलाता है। इसके सिवा ), छोटो उम्रको, नोरोगो, विवाह करने योग्य नहीं। किन्तु मत्स्यसूक्तमें लिखा भातृयुक्ता असमान प्रवरा, असगोत्रा तथा मातृपक्षसे | है-ऐसा समझना भूल है, कि केवल नक्षत्रों के नामको पांच पुश्त तथा पितृ पक्षसे सात पीढ़ो परधर्सिनो कन्या होनेसे विवाह करने योग्य नहीं हो सकती। परं . सुलक्षणा कन्याये ही विवाह विषपमें उपयुक्त हैं। जिस उसमें एक विशेषता है- वशी कोढ़ आदि भयङ्कर रोग हैं, और जो वश संस्कार पुत्रोका नदापाचक नाम रखना नही चाहिपे । किन्तु विहीन है, उस वंशकी कन्याको प्रहण न करना चाहिये। नदियों में गङ्गा, यमुना, गोमतो. और सरस्वती; पक्षोम ____ गुणवान् . दोपविवर्जित, सवर्ण अर्थात् ब्राह्मणों में : मालती और तुलसी तथा नक्षत्रों में रेवती, अश्विनी और ब्राह्मण, क्षत्रियों में क्षत्रिय आदि, विद्वान्, अस्थविर, रोहिणी नाम शुभ हैं। इन सब नामावलो कल्यामों के पुस्त्यविषयमें परोक्षित और जनप्रिय..व्यक्ति हो पर साथ विवाह करनेसे हानि नहों परं शुभ हो होता है।' होनेके उपयुक्त है । इस तरह घर स्थिर कर उसके साथ वृहत्संहितामे लिखा है कि मानय यदि पृथ्वीके - कन्याको विवाह कर देना उचित है। अधिपतित्वको इच्छा करे, तो वह ऐसी स्त्रीसे विवाह . (याशवल्क्य १४ अ०)। करे जो सुन्दर हो, जिसके पैरके नख मुलायम, उन्नताप, विवाहके पहले ही कन्याफे लक्षण आदिके विषयों | सूक्ष्म और रक्तवर्ण हो, जिसके चरणतल या परके तलघे . ' शाच्छी तरह जांच पड़ताल कर लेनी चाहिये । ज्योतिस्त: कमलके रंगकी तरह मुलायम हो और दोनों पैर उसके स्य और बृहत्स हितामे इसके सम्बन्धमे लिखा है- समानरूपसे उपचित, सुन्दर अयच निगूढगुल्कविशिष्ट ___ श्यामा, सुन्दर केशवाली स्त्री, जिसके बदन तथा मत्स्य (मछली), अङ्क श, शङ्ख, यय, यज, इल और में रोए कम हो , सुन्दर और सुशीला हो, बालमें अच्छी तलवार चियुक्त और नन्न हो, जिसके दोनों जंधे हाथोकी हो अर्थात् हस्तिगामिनो हो, जिसका करिदेश वेदोको सूड़की तरह, शिराहीन और रोमरहित हो, जिसके । तरह हो, जिसको मांखें कमलकी तरह लाल हो-ऐसो । घुटने समान अयच सन्धिस्थल सुन्दर हो, जिसके । लक्षणयुक्ता कन्या यदि होगकुल में भी हो, तो उसे ग्रहण , | ऊरद्वय रोमधून्य हो, जिसका नितम्य विपुल, फिर भी करने में उन्न नहों करना चाहिये। शास्त्र में अच्छे । पीपलके पत्तके आकारका हो, जिसको श्रोणी गौर ललाट कुलको कन्याको प्रहण करनेकी आशा है, किंतु ऐसी 'चौड़ा मथच कूर्मपृष्ठकी तरह उन्नत हो, जिसकी मणि लक्षणवाली कन्या यदि होनफुल में भी हो, तो उपरोक्त । अत्यन्त निगूढ़ हो और जो अत्यन्त. रूपवती हो, ऐसी प्रमाणसे ग्रहण की जा सकती है। 1. स्त्रो विवाहके लिये ठोक है। ऐसी स्त्रोसे विवाह __ जो नारी धृष्टा, घुरे दाँतवाली, पिङ्गलाक्षी (भूरो करनेसे मुखसौभाग्यको पृद्धि होती है। आंत्रवाली ) हो, जिसके सारे शरीर में रोहों और . :. ....(वृहत्स० ७०९) जिसका मध्यदेश मोरा हो यानी जिसकी कमर मोटो, जिस स्त्रीका नितम्य चौड़ा, मांसोपचित और गुरु हो, ऐसी कन्या यदि राजकुल अथवा उचकुलको भी हो, हो, जिसकी नाभि गहरी और दक्षिणावत हो, जिसको ता, विवाह न करना चाहिये। कमर पतली और रामरहित हो, जिसके पयोधर (स्तन) ___जिनके नेन पिङ्गल . वर्ण के हो अथवा रक्तान्यः | गोल, धन, नतोन्नत, फिर भी कठिन ( कड़े), जिसकी और चञ्चल हों, जो दुःशीला, सम्मितयोनि, सन्दिग्ध छाती रोमान्य, फिर भी कोमल गौर जिसकी गरदनमै चित्ता हो और जिसके क्रयोल.कूप की तरह गहरे हो, | शङ्खकी तरह तीन रेखाए हों, इस तरहको , लक्षण उसको बन्धकी नारो कहते हैं। ऐसी स्त्रीसे विवाह | समन्धिता नारी विवाह के लिये उत्तम है। जिसके न करना नाहिये । (ज्योतिस्तत्त्वधृत कृत्यचिन्तामणि) घर (होट) याधुजीव फूल की तरह तथा विम्यफलको पहले मनुके चाफ्योंमें कहा जा चुका है, कि नक्षत्र, | तरह हो, कुन्दकुसुमकी कलियोंकी तरह जिसकी दाना