पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६५३

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विवाह . माई यदि छोटे भाईके विवाह हो जानेके बाद अपना | भोगार्थ नदी। इन कन्याओंका कोई उपभोग नहीं कर विवाह कर ले, तो दोपायह होगा। सकता । इनको स्वतन्त्ररूपसे रख कर अन्नवस्त्रादि • प्रायश्चित्त निदिए करनेवालों के मतसे-जेठ भाईको द्वारा भरण-पोषण करना चाहिये, यही शास्त्रका आमा ले कर छोटा यदि विवाह कर ले तो भी यह दोषो । अभिप्राय है । अतएव बड़ी बहन पदसूरत हो या वोगा। यह कहते हैं-जय अग्रज अर्थात् बड़े भाईको खूबसूरत उसका विवाह न होनेसे छोरी बहनका कभी आशासे कनिष्ठके लिये केवल अग्निहोत्र प्रहणका ही विवाह न होगा। विधान है, तव छोटा अग्निहोत्र मात्र हो करे, किन्तु बड़े का विवाह न होने तक छोटेका विवाह नहीं विवाह न करे। पदि करेगा, तो यह दोषी है। हे! सकता। यमज सन्तानमे छोटे बड़े का विचार . जैसे जेठ भाईके विवाह न होने पर छोटे भाईका इस तरह किया जाता है, कि जो पहले पैदा हुभा हो, विवाह निषिद्ध है, वैसे ही जेठो पहनकी शादी जय तक | वह बड़ा है। यमज सन्तानोंके पैदा होनेका यदि यह न हो, छोटो पहनको शादी नहीं हो सकती। कुछ लोग ठोक न मालूम हो सके, कि कौन पहले पैदा हुगा है कहते हैं कि बदसूरत जेठो यहनके कारी रहने पर. भो कौन पोछे, तो माता जिसको पहले देखे, उसोको बड़ा छोटोका विवाह कर देनेसे होप नहीं होता। किन्तु माने । यह युक्तिसंगत नहीं मालूम होता। विवाहके इस | । एक दिन दे। सहोदर या दो सहोदराका विवाह निषेध यायको प्रसध्यप्रतिषेध कहा नहीं जा सकता, कर्त्तव्य नहीं। शास्त्रानुसार यह निन्दनीय और पाप. पोंकि अप्रामाणिकका ही निषेध होनेसे यह सम्पूर्ण जनक है। रूपसे अपौक्तिक हुआ है। अतपच यह निषेध पर्यु दास एक दिन सहोदरों में दोका विवाह और दो सहो- होगा। इससे ऐसा तात्पर्य दिखाई देता है, कि दराकन्याका दान भी नोय है । . उपदेशीय जेठो वहन यदि बदसूरत न हो, तो उसके विवाह पण्डितोंने 'वासर' पदके स्थानमें वत्सर' पदका निर्देश पहले छोटी बहनका विवाह होने पर दोप होगा। किया है। इसके अनुसार एक वर्ष में है। सहोदरोंका किन्तु शास्त्रकारके अभिप्रायके अनुसार विचार विवाह होना निषिद्ध है और इसी तरहका यहां काम करने पर समझ में आता है, कि यह कार्य्या सम्पूर्णरूपसे | भो होता है। अन्यान्य विषय विवाहविधि शब्दमें देखो। योपजनक होगा। पयोंकि, दही बहनके अविवाहिता पात्रीको खोज। - अग्रस्थामें रख कर छोटो बहनका यदि विवाह किया। प्राचीनकाल में हिन्दू केवल पात्रको ही खोज मही' जाये, तो इस कन्याको अदिधिषु और उसी नरहको करते थे, वर उनको वियाहको उपयुक्त सुलक्षणा जेठी बहनको दिधिषु कहते हैं। अपने दिधिपुका जो | पानीकी खोज भी करनी पड़ती थी। पधौ कोई विप्न पाणिग्रहण करेगा, उसे १२ रात कृष्छ पराकयत माचरण न हो और शीघ्र विवाह के लिये सुपात्री मिल जाये, करके दूसरी एक कन्या विवाह करना होगा और उम | इसके लिये देवताओंसे ये प्रार्थना करते थे। जैसे- साविधिपुको जेठो वहनके वरके हाथ सौंप देना होगा। ____ "अनुभरा स्वजवः सन्तु पग्या 'पेभिः सारूपापा फिर विधिपु पाणिप्रपणकारीको भी कृच्छ, और अति । यन्ति ना घरेय'। ममामा संभगो नो निनातयात कृच्छ पे दो प्रायश्चित कर जेडाको छोटोफे वाफे हाथ जाम्पत्य सुखममस्तु व्याः ॥" . सौंप देना होगा और फिर वह दूसरा एक विवाद | ' (ऋग्वेद० १० म०६५ सूक्त २३ पक्) करेगा। .. . ___ अर्थात् जिन सब पर्योसे हमारे सखे वियाह करने के ___ छोटी कन्याको बड़ी कन्याके और बड़ी कन्याको लिये कन्या टूढ़ने जायें, ये पंथ सेरल तथा करदाशम्य छोटो कन्याके परफे हाथ सौंप देने की बात जो कही गई हो। अर्यमा और भगदेय ! हमें गतियिधि । • यह फेवल शास्त्रको मर्यादा रक्षाके लिये ही है, उप. देवगण ! पतिपतोका सम्बन्ध उत्तमरूपसे स्थापित हो।