पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६७७

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विवेकानन्द ५८७ 'वंडा आदर महंकार किया । कुछ दिनों तक खेतडीमें रह कर ब्राह्मधर्मको वक्तृता समाप्त होते ही स्वामी विवेका. स्वामीजी अमेरिका जाने के लिये प्रस्तुत हुए। महाराजने | भन्द व्याख्यान मञ्च पर खड़े हुए। एक अपरिचित उनके अमेरिका जानेका आवश्यक प्रश्न्य कर दिये। महा. अहात-नामा संन्यासी इस समारोह में हिन्दूधर्मकी विशे. राजको आशामे मुशी जगमोहनलाल जो पबई तक | पता बतलानेके लिये खड़ा हुआ है-यह देख कर स्वामीजीको पहुँचाने के लिये गये और स्वामोजोका मय | अन्यान्य विद्वान् चकित हो गये। दूसरोको पात फ्या प्रवन्ध उनके अधीन हुआ। कहो जाय, स्वयं प्रतापचन्द्र मजुमदार भी इससे बम्बई में जाकर मुंशी जगमोहनलालने सभी साम आश्चर्यान्वित हो गये। प्रियोका प्रबन्ध करके स्वामीजीको जहाज पर बैठा दिया। स्वामीजीने घोरे धीरे व्याख्यान देना प्रारम्भ किया स्वामीजीको विदा करनेके लिये जो लोग जहाज पर गये और हिन्दूधर्म की विशेषता लोगों को समझा दी। उन थे घे लौट आये। कट्टर युवकों को धारणा शोघ हो यदल गई जो हिन्दधर्म- • स्वामी विवेकानन्द चिकागोको धर्मसभामें हिन्दूधर्म | को धर धर्म और पौत्तलिक धर्ग समझ हुए थे। के प्रतिनिधि बन कर गये सदी, परन्तु इन्हें उस समासे __स्वामोजोकी वक्तृताशक्ति, शास्त्रज्ञान, अकाट्य युक्ति निमन्त्रण नहीं मिला था। अमेरिकामै इनका कोई | और तर्षाप्रणालीको देख कर विद्वन्मएडली और साधु. परिवित भी नहीं था जहां जा कर स्वामी जी ठहरने, !. समाजको वक्ति होना पड़ा था। चारों ओरसे धन्य तथापि स्वामीजीने अमेरिकाके लिये प्रस्थान कर दिया । | धन्यको चौछार आने लगी। समस्त अमेरिकामें स्वामी यथासमय जापान होता हुया जाहाज अमेरिकाके | जीको वतृताको प्रशंसा होने लगी। सब लोगोंने जान 'वन्दर में पहुंचा। अन्यान्य यात्रियों के समान स्वामोजी लिया कि स्वामोजो सत्य सत्य शानो पुरुष है। अमे- भी गहाजसे उतर फर चिकागो शहरको ओर चले।। रिकाके सभी पत्रोंने स्वामीजीकी प्रशंसा की। स्वामोजीका वेशभूषा देख कर यहांके यासियोको बड़ा स्वामीजीकी कीर्ति चारों ओर फैल गई। अमे आश्चर्य हुमा। बड़े कौतुइलसे लोग स्वामीजीकी ओर रिकाकै भन्याम्य स्थानों से रफ्तृता देने के लिये स्वामी- 'देखने लगे और उनका परिचय पूछने लगे। स्वामीजीने | जीके पास निमन्त्रण आने लगे ; प्रायः दो घर्म अमे. भी अपने भानेका पूरा पूरा वृत्तान्त उनसे कह सुनाया। रिका अनेक स्थानों में 'ध्याख्यान दे कर और धर्मकी उन पूछनेवालों समो बटोही ही नहीं थे, 'कतिपय गण्य | सार्वजनीनता समझा कर "हिन्दूधर्म हो आदि और सत्य मान्य व्यक्तियोंने स्वामीजीकी विद्वत्ता और गुणोंस है" यह बात अमेरिकावालों के हृदय में दरूपसे अद्वित आकृष्ट हो कर उन्हें अपने यहां ठहराया और धर्मस्मामें ! कर अमेरिकायासो स्त्रीपुरुषों को ब्रह्मचर्य अवलम्बन स्थामीजीको भी निमन्त्रण देनेके लिये उक्त समाके | द्वाग येदारत शिक्षा दे कर और उनको धर्म-प्रचार कार्य- सभापति व्यारो साइवसे अनुरोध किया। पहले तो में नियुक्त कर स्वामोजो अमेरिकासे इङ्गल एड गये। . ध्यारो साइप होला" हवाला करने, लगे परन्तु पीछेसे | स्वामीजीने अमेरिका जा कर पहले दो वर्ण अमेरिका. उन लोगों के विशेष दबाव डालने पर व्यारो साहबने, वासों मैडम लुइस और मिस्टर सैण्डेस वर्गको ब्रह्म. 'स्वामोशीको निमन्त्रण दिया। चर्य प्रहण करा कर घेदान्तकी शिक्षा दो। इस समय धर्मसभा अधिवेशनका समय 'उपस्थित हुआ। ये स्यामी अभयानन्द और स्यासी कृपानन्द नाम धारण इङ्गले एड और अमेरिका के प्रसिद्ध पण्डित धार्मिक और ! कर अमेरिका और यूरोपो वेदान्तका प्रचार करते थे। धर्मयाजाने उस ममामें अपने धर्मको महिमा गाया 11 स्वामी विवेकानन्द अपने कतिपय यूरोपीय शिष्यों वनालफे ग्राह्मसमाजके प्रसिद्ध प्रचारक प्रताप चन्द्र मजुम के साथ १८९६०में डाल एडस भारतवर्ष मानेके लिये 'दार इस समामें निमन्त्रित हो कर गपे थे। उन्होंने भी । रवाना हुए। मारत आने समय सिहल शासियों को इस समामे घ्याण्यान दिया। .......... - ओरसे उन्हें कोलम्बोम मानेके लिये निमन्त्रणपत मिला ।