पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७३६

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६४८ विश्वेश-विश्वेश्वरभट्ट । विश्वेश (स० पु०) विश्वस्य ईशः। १ शिव, महादेव । विश्वेश्वर आचार्य-१ काशीमोक्षके प्रणेता । २: पदः . २विष्णु। विश्वं ईश्वरोऽधिपतिर्यस्य । ३ उत्तरापाढा वाफ्यार्थ-पक्षिका नाम्नी नैषधीय टोकाकर्ता । ये मलि. नक्षत्र। इस नक्षल के अधिपतिका नाम विश्व है। . नायके पहले विद्यमान थे । विश्वमित (सं० पु०) विश्वका ईश्वर, सर्वेश्वर्यका विश्वेश्वर काली-चमत्कारचन्द्रिका काव्यके रचयिता।। विश्वेश्वर तन्त्र-तन्त्रभेद । विश्व श्वर (सं० पु० ) विश्वस्य ईश्वरः। १ काशीस्थ विश्वेश्वर तीर्थ- सिद्धान्तकौमुदी-टीकाकर्ता । २ ऐत. महादेव। ये काशीधाम, अविमुक्त श्वर नामसे प्रसिद्ध रेयोपनिषद्भाध्यविवरण नामक आनन्दतीर्थाकृत भाष्यको है। क्योंकि सपनो दुष्कृतिके कारण जिन्हें कभी भी| टीका-प्रणेता। मुक्तिलाभको आशा नहीं, ये भी यदि कायपलेशसे उक्त विश्वेश्वर दत्त-रामनाममाहात्म्यके प्रणेता। धाममें देहत्याग करें, तो ये आसानीसे उन्हें मुक्तिदान | विश्वेश्वरदत्त मिश्र-भास्करस्तोत; योगतरङ्ग और सांस्य. देते हैं। इसी कारण यह धाम भी अविमुक्त क्षेत्र नाम- तरङ्ग भादिप्रन्धोंके प्रणेता। ये विद्यारण्यतीर्थ के शिष्य से जगत में प्रसिद्ध है। विशेष विवरण काशी और धारापासी थे। संन्यासंग्रहण कर इन्होंने येदतीर्थ स्वामोका नाम: शम्दमें देखो। धारण किया । १८५२ ई०को काशीधाममें इनका देहांत विश्वेश्वर-१ तस्यार्णव प्रन्थके प्रणेता राघवानन्द पानमा हुआ। . . . सरतस्यतोके परम गुरु और अद्वयानन्दके गुरु।२ प्रसिद्ध विश्वेश्वर देवश-ज्योति-सारसमुच्चयके रचयिता । ज्योतिवेत्ता कमलाकरके गुरु । ३मीमांसा कौतूहलवृत्तिके विश्वेश्वर नाथ-दुर्जनमुखचपेटिका और भागवतपुराण- रचयिता, वासुदेव अध्वरीके गुरु। ४ एक कवि। ५) प्रामाण्य नामक दो प्रयोंके प्रणेता। .. मलकारकुल प्रदीप और अलङ्कारमुक्तावलीके प्रणेता। विश्वेश्वर पण्डित:-१ वाफ्यवृत्तिप्रकाशिका, वाफ्यसुधा. ६ अध्यात्मप्रदीप नामक अष्टावक्रगीता-टोका ओर | टीका और वाफ्यश्र ति-अपरोक्षानुभूति नामक तीन गोपालतापनीको टोकाफे रचयिता । ७ गर्गमनोरमा | " प्रथो के प्रणेता। ये माधवनाशके शिष्य थे। टीका नाम्नी ज्योतिथ और पञ्चस्वरटीकाके प्रणेता। २ अलङ्कारकोस्तुभ और उसकी टीका तथा व्यङ्गवार्थ- . ८ गृहपति-धर्म नामक एक प्रन्धके रचयिता । १ तर्क- कौमुदी नाम्नी रममसरी रोकाके प्रणेता। कुतूहल नामक एक पुस्तक रचयिता । १० द्वगशा- विश्व श्वरपूज्यपद-वेदान्तचिन्तामणिके रचयिता शुद्ध- विवेक नामक चेदान्त प्रन्थप्रणेता। ११ निर्णयकौस्तुम | तुम | भिक्ष के गुरु । नामक ग्रन्थ रचयिता। १२ न्यायप्रकरण नामक ग्रन्धके विश्व श्वरमट्ट-१ कुण्डसिद्धिके प्रणेता। २ सुखबोधिनी प्रणेता। १३ भगवद्गीता-भाष्यकार । १४ मनोरमा. नामक एक व्याकरणके रचयिता। ३मदनपारिजात, खण्ड नामक व्याकरण रचयिता। ५ रसचन्द्रिका नाम्नी महादानपद्धति, महार्णव-कर्मविपाक, विज्ञानेश्वरकृत अलङ्कार-प्रन्धके प्रणेता। १६ रोमावलीशतकके प्रणेता । मिताक्षराके व्यवहाराध्यायके सुबोधिनी नामक सार- १७ लीलावत्युदाहरणफे रचयिता । १८ विश्वेश्वरपद्धति सङ्कलन और स्मृतिकोमुदी : आदिप्रन्धोंके रचयिता । नामक प्रन्य-प्रणेता । १९ वेद-पादस्तव-प्रणेता। २० मदनपारिजातादि शेपोक्त अन्य विश्वेश्वरस्मृति नामसे शब्दार्णवसुधा-निधि नाम्नी एक व्याकरणफे रचयिता । प्रसिद्ध है। पे पेटि (पेखि ) भट्टके पुत्र और राजा २१ अतिरञ्जिनी नाम्नी गीतगोविन्दके टीकाकार । २२ | मदनपालके आश्रित थे। ४ मशौचदीपिका, पिएडपितृ- सप्तशती-काव्यके कधि । २३ साहित्य सारकाध्यके प्रणेता। यशप्रयोग, प्रयोगसार, भचिन्तामणि नामक जैमिनिसूत्र. २४ सिद्धान्तशिखामणि नाम्नी तन्त्रप्रन्धके रचयिता।। टोका मीमांसाकुसुमाञ्जलि, राकागम नामक चन्द्रालोक. ' २५ संन्यासपद्धति और विश्वेश्वर-पद्धति नामक प्रधके । रचयिता । इस प्रन्यकी भानन्दती और आनन्दाश्रम रीका, शिवाकोदय नामक श्लोकवार्तिकटीका, निरूढ़. रचित टोका भी मिलती है। " | पशुवध प्रयोग तथा सुशानदुर्गादय आदि प्रन्योंके प्रणेता।