पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८५६

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यीजगणित ७४८ जाती है, उसे (Vinculum ) कहते हैं। जैसे (८) चीजविज्ञान राशियोंके गणितको सीमा पार . कxग+घx-च, इससे मालूम होता है, कि क करने पर भी उनमें निषद्ध · वर्णमालासंख्या में मूल .. गकेली एक राशि है। ग+घका योगफल द्वितीय राशि राशिकी शक्ति सीमावद्ध नहीं रहती। राशि संशा जिस है। तथा -चके वियोगफलसे जो राशि निकलती है, तरहसे पहले ममियाक्त होती है, क्रमस यह विशिष्ट यह तृतीय राशि है। इन तीनों राशिको एक साथ गुणा संशाप्राप्त होती है। जैसे कि यदि कभी -क लाभांश करना होगा। ऊपरवाली रेखा द्वारा चिह्नित न करके समझा जाये,ता-क उसी यागफलकी मतिकाश उन सब राशियोंको धनी में भी रखा जा सकता है। समझा जायेगा। इस तरह यदि + कभी 'क' संज्ञक जैसे, क (ग+घ (3) अथवा (ग+घ)x, कीटमाणको अप्रगति समझा जाये, तो-क उक्त संण्या- (उ-च)। मानकी पश्चादगति समझी जायेगी। इससे स्पष्ट ___बीजगणितमें प्रयुज्य इस प्रकारको वर्णमालाके पहले ही समझा जाता है, कि +, और - चिहद्वय परस्परको ___ यदि कोई सांखया व्यवहन हो, तो उस संख्याको अङ्क विपरीत क्रियाकै समष्टिचिह हैं। इस तरह अनुशी- घटित प्रकृति कहते है। अङ्क कितनी बार लिया जाये, लनका पक्षपाती है। हम x मोर + दोनों चिह्नोंका। इससे वही वेध होता है। जैसे, ३ क इस राशि द्वारा | राशिवरण संज्ञाके परस्परका विपर्याययोधक मान . बोध होता है, कि 'क' को ३ बार लेना होगा। सकते हैं । वोजगणितमें राशिको क्रियाफे समाधानके (५)एक राशिको दूसरी राशिसे भाग देने पर लिये उक्त चार चिह्नोंके जो कार्य हैं वे निम्नक्ति दृष्टांतमें .. भागफल जो निकलेगा, यह एक रेखाके ऊपर विभाज्य स्पष्टभावसे दिखाये जा सकते हैं। जैसे+क-क + राशि रख उसके नीचे भाजक रखनेसे समझा जाता है ० या- जहां +० रहता है, वहां यह • द्वारा वृद्धि । जैसे, १२स राशि द्वारा यही समझा जाता है, कि प्राप्त और-० की जगह • द्वारा लघ्योकृत समझा। विभाज्य १२मे भाजक ३का भाग देनेसे ही भागफल ४ | जायगा । इसी तरह xफ+क-x१ या+१.४.१.. निकलेगा, अधवा इससे समझा जाता है, कि कहनेस १'द्वारा गुणित और+१ कहनेसे १ द्वारा विभाज्य 'ख' को 'क' से विभाग करनेसे ही भागफल विभक करना होगा। निकल आयेगा। (६) संख्यागणितमें जिस प्रणालोसे चिह राशिको ___(६) किसी देश संख्याकी समानता मालूम होनेसे संयोग करता है, घीजणतमें उसका व्यतिकम दिखाई उनके बोच= (समान चिह्न) दिया जाता है। जैसे, 'नहीं देता। किन्तु साधारणको सुविधा लिपे निम्न क+ख =ग-ध इससे यही समझा जाता है, कि क और लिखित ३ नियम विवृत किये जाते हैं-...।। खका योगफल ग और धफे वियोगफलके समान है। १म +या-विहारा राशियां परस्परका सम्बन्ध .. ___(७) अविमिश्र राशि और मिश्रराशिकी संख्या एक १. और भावान्तर प्राप्त होने पर भी कमी भी संयुक्त ही वर्णमाला या वर्णमालाके समष्टीबद्ध होनेसे उनको | राशियों द्वारा परिचालित नहीं होता। . . समश्रेणादिभुतराशि कहा जाता है। जैस + क ख और | • २य । जिस किसी संख्यासे जिस किसी संख्याका ' -~५ फख ये दो राशियां समपर्यायकी है। किन्तु+क योग या पियोग किया जा सके, उसको Distributive ' ख और + क ख ख, ये समपर्यायकी नहीं हैं। lay कहते हैं। । . . गणितमें अन्यान्य कई विपयोंके बदले दूसरे प्रकारके ! ३२ । गुणन या भाग भी इसी तरह दोनों राशिपमें चिहादि भी व्यवहत होते हैं। जैसे यह चिन अधिक किया जाता है। इसको Commutative lam' कहा जाताई। . . .', सांख्याशापक, < इससे न्यून संख्याको अर्थ समझा जाता है और ... इस चिहसे "इसलिये" का अर्थ सुचित सघ विषयों में बीजगणितका प्रयोग सहजसाध्य होता है। ____.. होगा, ऐसो चिन्ता कर उपर्युक्त साधारण नियम बोज.