पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८७०

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ता। बौरद्र. वीरभट पोरद, (सं० पु०) अर्जुन वृक्ष। . . . . 'वीरपाणन्तु यत्पानं वृत्त भाविनि मारणे (भमर). थोर मन (१० पु० ) राजपुत्रभेद । ( भारत शान्तिपर्व) (वाभावफरणयोः । पा ८४१०) पाणिनिके इस सवा. पौरभम्पन (सं० पु० ) कामदेव । नुसार पानशब्दका न यदि विकलरमें णत्व हो, तो 'घोरपाण' 'योरपान' पे दो पद बनेगे। वीरनगर-बङ्गालके नदिया जिलान्तर्गत एक प्राचीन . ' नगर। यह उला नामसे प्रसिद्ध है। एक समय यह / पीरपागड य-पाण्ड य वंशीय राजभेद। स्थाम धनजनसे पूर्ण था। कालके फवलमें पड़ कर वीरपाल ( स० पु. ) काश्मीरके सामन्तभेव ।' पायण महामारीसे यह नगर जनशून्य और श्रीहोन हो। (राजतर०८२१९३) गया है। प्राचीन समृद्धिफे निदर्शन आज भी माना वोरपुर ( स०७०) १ कान्यकुब्जराजधानी। हिमा- स्थानों में देखे जाते हैं। उमा देखो। लय शिखर पर अपस्थित एक नगरका नाम । । । पोरनाथ (सं० त्रि०) वीरथेष्ठ । (पु०) २ काश्मीर के (कथासरित्सा ५२१६९) ज्यक्तिभेद । ( राजतरङ्गिणी ६।११०) योरपुरुष (सं० पु० ) घोरा पुरुषा। वीर्यविशिष्ट पुरुष, पोरनायफ (सं० पु०) १ बीरसाधक । २ उशीर, यस। ' शूरयोर । (ये द्यकनि०) . योरपुष्पो ( स० स्त्री० ) पाट्यालकमेव, सह।, पीरमारायण (सं० पु० ) १ राजपुत्रभेद । २ एक कपि।। २ सिन्दूरपुष्पी, लटकन । इसके पनाये कई काप्योका उल्लेख मिलता है । ३ साहित्य- घोरपेशस् ( स० लि.) १ बलिष्ठ देहयुक्त, बलशाली । चिन्तामणि नामक अलङ्कार प्रायके प्रणेता। । (ऋक ४।११।३ सायण )२ दीप्तिविशिष्ट, चमकीला । पोरन्धर (सं० पु० ) १ मयूर, मोर । २ पायपशुफे साथ घोरप्रजापिनी (स. 'स्रो०) योरप्रसचिनी, पीरमाता। युद्ध, जंगली पशु के साथ होनेवाला युद्ध । ३ पक वीरप्रजापती ( स. स्त्री० ) चीरममा विद्यतेऽस्या। मतुप प्राचीन नदीका नाम । मल्य घ, स्त्रियों डी । पोरसन्ततियुक्ता, जिनके पुत्र पीरपट्ट ( स० पु०) युद्धकालका परिच्छद विशेष, यह वीर हो। (मा० ५० १२५५७) . . पहनाया जो युद्ध के समय पहना जाता है। योरप्रभ ( स० पु० ) व्यक्तिभेद । (कथासरित्सा० ५६।२५) वीरपत्नी (म० सी० ) १ वैदिक कालको एक नदीका वीरप्रमोक्ष (स' ली० ) तीर्थभेद । ( भारत पनप०) . नाम । २ वह जो किसो वीरकी पत्नी हो। वीरप्रसवा (स'. स्त्री०) घोरपुत्रप्रसदकारिणी। यह पोरपना (सं० स्त्री० ) वोरप्रियाणि पक्षाणि यस्याः || स्त्री जो वीर संतान उत्पन्न करती हो। विजपा, भग। यह वीरोंको वहुत प्रिय है, इसीसे इस. वीरप्रसू (सं. स्त्रो०) वीरान् प्रसूते प्र-सु किप। योर- का यह नाम पड़ा है। २धारणी नामक महाकाय । | प्रसयिनी स्त्री, यह स्त्री जो घोर संतान उत्पन्न करती। पीरपर्ण (सं० क्लॉ० ) सुरपर्णभिध सुगन्ध पत्र, माची. । पौ । वीरयाहु ( स० पु०) पोराः संमः पायो यस्या पीरपस्टम (सं०नि०) पुत्रादियुक्त, गृहप्रन्। . १ विष्णु। २ धृतराष्ट्र के एक पुत्र का नाम (भारत (एक ६॥५४॥४) १६७।१०३) ३ रायणके एक पुत्रका नाम । ४ एक घोरपान (सं० पु०) वीराणां पानं । वीरोंके श्रमनाशके प्रकारका बन्दरं । (गोः रामायण ११५) ... लिये पान,. वह पाग जो चोर लोग युद्धका श्रम मिटाने पीरभर ( स० पु०) ताम्रलिप्तिके एक प्राचीन राजा । कमिपे करते हैं। . . . : : ... . . . . . . (कथासरित्सा. ४४४२).