पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१०८

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१०४ पाहुक- वालिदके सामने लाई गई। उनसे बड़ोने करण डिनो (पं.सो.) पात्रा हुन । २ जोतको पात्रा: बरसे कहा-"धर्मावतार ! हम पापके लायक नहीं डिक्शनरी ( स्त्री) शब्दकोष । १. महबाटयन काशिमने परले ही हमारा धर्म नाश डिगना (हिं० कि०) १ प्रतिज्ञा छोड़ना. अपनी बात पर कर डाला है ।" खले का म बासको सुन कर कायम नरहमा। २ समान परित्याग करना, जगह अत्यन्त काब हुए, उन्होंने सत्यासत्यवा विचार विमा किये छोड़ना. हिचमा, टलना। की महम्मदवेन कासिमको चामको थैलोमें भर लामिका डिगरी ( मो.) विविद्यालयको परीक्षा उत्तीर्ण प्रादेश दे दिया। उनका पादेश प्रतिपालित या पोर होने की उपाधि । २ समकोलका. भाग, पंच, कला । वयाममय पर बैन-कासिमकी मृतदेह खलीफाके सामने ३ यायालय का वा फैसला जिसके बारा सड़ने वाले लाई गई: राजकुमारोने पिशव को मृतदेहको देख पक्षों मेंसे किसोको कोई हक मिलता है। कर कहा-"पतमे दिन बाद समारो अभीष्टमिचि हुई। डिगरीदार ( पु.) वर मनुष्य जिमके पक्षमें पदालत- मैंने मिथ्या कह कर पपर्म कुलोच्छदकारी रस दवस को डिगरी हुई। प्राणनाश करवाये।" इस साल डारिरकी कशानों- डिगवा (हि.पु.) एका-पक्षीका नाम । ने पितृनिधनकी प्रतिहिमा साधन को। डिगाना ( वि.) जगासे पटाना, खमकाना, और डाक (हि.पु.) टिटिहरीके प्राकारका एक पक्षो। काना । २ विचलित करना, बात पर कायम न रहना। या सदा जलाशयों के निकट पाया जाता है। डिग्गा (हि.सो.)१ सालाब, पोखरा। हिन्यात, हिंगल (हि. वि.) १ दूषित, घृणित नोच, अधम, पामर साहस । (सी.) २ राजपूतान को एक भाषा। मम भाटपौर डिझार ( पुर) डार एषो. माधुः। १डार. मोटा चारच काय तथा वंशावली पादि लगाते हैं। पादमी, मोटासा। २ धूत, बदमाग, ठग । ३ क्षेत्र, डिंगसा (हि.पु. ) हसिया पर्वत तथा चटगांव पोर फेंकना। ४ वन, जंगल। ५ मेवक, दास, गुलाम । परमाको पहाड़ियों पर होने वाला एक प्रकारका पेड़। डिजि--बम्बई प्रदेश के अन्तर्गत सिन्धु प्रदेशमें बरपुर इससे एक प्रकारका उमदा गोद या राल निकलतो गन्यका एक दुर्ग । यह पक्षा. २६ ५२ ७० और देशा है। तारपीनका तेल भी इससे निकलता है। ' ४०' पूमें अवस्थित है। यहां जल बहुत डिस (हि.पु.) एक प्रकारको तरकारो। मिलता है। डिसी (हि.सो.) टिंडया टिंडमी नामकी तरकारी। डिटेकिव ( पु.) गुमचर, भौदिया, जासूस । डिडिभो (हि. स्त्रो०) डिग्रिम देखो। डिठार (हि. वि.) खिवाला, जिसे सुझाई दे। डिभिया (हि. वि.) १ पाखण्डी, जो पाडम्बर रचता डिठोहरी (हि.सो.) एक जाली पड़के फलमा बोस । । २ अभिमानो, घमंडी। इसको तागेमें पिरोकर शेटे छोटे लड़कोंको पहनात डिकामालो हि सो.) मध्यभारत तथा दक्षिणमें है। कहा जाता है कि इससे उन दूसरेको दृष्टि नहीं होने वाला एक पेड़। इसमें से एक प्रकारका गोद निक- लगती है। लता है। गोंद होगके तस मृगी रोगमें दिया जाता डिठोना ( पु.) काजलका टीका । त्रियाँ लड़कों है। इसमे घाव जम्दो सूखता है और मक्खिया बेठने के मस्तक पर नजरसे बचाने के लिये वह लगा देती है। नहीं पाती। डिडवा (स.सो.) योवनकामजान रोगभेद, मुहांसा। जिसी (हि.सी.) १ सींगोंका धमा। २ पाक्रमण "यौवने डिडकास्वेष विशेषाकर्दम हित ।" (अ ) बाबा, भापट। इस रोग वमन विशेष उपकारो।। भन्या, बच, जिन ( पु.) वह वाक्य जो लिख लिए बोला बोध और कुछ पबचा रोग, बस, संभव और सप जाय, मला । एबव करके प्रसव देना सेन पारोन्यता।