पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१४६

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१४२ ढहानाहाका ढाना (हिं.क्रि.) ध्वस्त करना. गिराना। भूभाग कुछ जचा है। यह भूभाग मैमनसिंह और ढोक (हि पु० ) कुश्ती का एक पेच । ढाका जिलेमे ले कर ढाका शहर तक विम्त त है। वर्षा ढाँकमा (हि. कि. ) १ छिपाना. अोटमें करना । २ यद्यपि रस विभागमें कम होती है तो भो रस विभागको किमी वस्तु को इस प्रकार फैलाना जिममे उसके नोचेको आज तक दुर्भिक्षका सामना न करना पड़ा है, कारण वस्तु छिप जाय। यहाँको जमोन बहुत ही उर्वरा है। विक्रमपुर और ढाँचा (हिं. पु० ) १ किमी रचनाको प्रारम्भिक अवस्था, : सोनारगांवमें प्राचीन अट्टालिकाओं के भग्नावशेष देखे ठाट, ठट्टर. डोन । २ पंजर, हटरी। ३ रचना प्रकार, जाते हैं। कहते हैं, कि पहले यहां सेनवश तथा मुसल- बनावट, गढ़न। ४ प्रकार, भाँति, तरह। ५ भित्र मान राजाओंको राजधानी थो। भिन्न काँमे एक दूसरे के साथ इस प्रकार जोड़े हुए २ पूर्व बङ्गालका एक जिला। यह पक्षा. २३१४ लकड़ी आदिके बड़े या छड़ जिममे उनके बांच में कोई मे २४२० उ० ओर देगा. ८८४५ से २०५८ पूमें वस्तु जमाई या जड़ो जा सके। ६ चार लकड़ियाँका अवस्थित है। क्षेत्रफल २७८२ वर्गमोल और लोकसंख्या बना हुभा खडा चौखट। इसमें जुलाहे नचनो प्राय: २६४८.५२२ है। इसके उत्तर में मनसिंह जिला, लटकाते हैं। पूर्वमें त्रिपुरा, दक्षिण पश्चिममें वाकरगञ्ज, फरिदपुर एवं ढापना हि क्रि० ) ताकना देखा। पश्चिममें पावना जिलेका कुछ अंश है। इसको सब दिशा- ढाँस (हि स्त्री० ) सूखी खांसो पाने पर गमका शब्द। ये नदोसे सोमाबद्ध हैं, पूर्वम मेधना दक्षिण पश्चिममें पद्मा ढाँसना हि क्रि० ) मूग्वी ग्वाँसो खाँमना । और पश्चिममें यमुना नदो नामक ब्रह्मपुत्र नदोको प्रधान ढाई (मि. वि. ) १ दो में आधा अधिक । ( स्त्रो. ) २ शाखा अवस्थित है। ढाका नगर इम जिलेका सदर है। कौड़ियोंसे खेले जानका लड़कोका एक खेल। ३इम ढाका जिले को भूमि समतन्त है। धलेखरी इसो खेलमें रखी जानेको कौड़ी। समतलमें पूर्व से पश्चिमको भोर प्रवाहित हो कर इसको ठाक ( पु.) १ पलाशका पेड़। २ वह बड़ा ढोल दो भागम विभक्त करती है। इन दोनो भागों को जो लड़ाई में बजाया जाता है। प्रकृतिमें बहुतसे विभेद है। उत्तर भाग फिर लाक्षा ढाका-१ कमिश्नरके अधीन पूर्व बङ्गालका एक विभाग। नदीसे दो भागोंमें विभक्त है। इन दोनों भागोंके पश्चिम यह पक्षा० २१४८ से २५ २६ उ • और देशा० ८८ दिशामें ढाका नगर अवस्थित है। इसकी भूमि बाढ़के १८ से ८११६ प में अवस्थित है। इसके उत्तरमै गारो जनको अपेक्षा ऊँची है। स्थान स्थानमें कीचड़ है और पहाड़, पूर्वमें मरमा, त्रिपुरा और मेघना, दक्षिणमें वनोपः उमके जपर गली हुई उद्भिज वस्तु भी देखी जाती है। सागर तथा पश्चिममें खुलना, यशोर, पावना, बगुड़ा, लाक्षा नदीके दोनों किनार जंचे तथा गभीर जलपूर्ण मधुमती और रजपुर जिला है। लोकसंख्या प्राय: है। स्थान स्थानमें नदीतीरका दृश्य अत्यन्त मनोरम १०७८३८८८ और क्षेत्रफल १५८३७ है। अधिवासियों में मालूम पड़ता है । हाकाले प्रायः २० मोल उत्तर मधुपुर अधिकांश मुसलमान है। इसके मिवा यहां हिन्दू, जङ्गलमें छोटे छोटे पहाड़ पर्थात् टोले देखे जाते हैं। ईसाई और बौद्ध भो रहते हैं। इम उपविभागमें १७ इन टोलोंको ऊँचाई कहीं भो ३०४० फुटसे पधिक नहीं शहर पौर २६८.२८ ग्राम लगते हैं, जिनमेंसे ढाका और है और ये प्राय: तृणगुल्म वा जङ्गलादिसे ढके हुए हैं। भारायणगा सबसे बड़े हैं । ढाका, मै मनमिह, फरिद- इस भूमिखगडका अधिकांश पनुर्वर है तथा खार, जंगली पुरं पौर बाकरगन्ज नामके चार जिला इस उपविभागके जन्तुसे भरा अरण्यमय है। सम्पति इस विभागमें कषि भन्सर्गम है । ब्रह्मपुत्र, पद्मा और मेघना यहो तोन नदियों विस्तारको चेष्टा हो रही है। नगरके निकट झोल पौर इस विभागमें जल देतो हैं। पर इनका जल सुसङ्ग पहाड़ी नहरोंके चारो तरफको भूमि, धान, सरसों और निल तकनी पहुंच सकता । प्रसिर 'मधुपुर जङ्गस' नामक प्रादि पैदा करनेके लिए उपयोगी है। ढाकाके पूर्वभावले