पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१५

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टंकारी. हा टहारी (स' स्त्रो० ) टङ्ग ऋच्छति ऋकमणि-पण ततः टटावली (हि.सी.) टिटिहरो नामको चिड़िया, डोष । वृक्षभेद, एक पेड़। इसकी पत्तियाँ सम्बो. कुररी। तरी होती है। फलके भेटमे इसकी कई जातियां टटिया ( सी० ) टट्टी देखो। हैं। किसो में लाल फल. किमोमे गुलाबी और किसी मेटटियामा (Eि कि०) सूख जाना, खुश्क हो कर पकड़ मफेद फल लगते हैं। जब फ ल झड़ जाते तब छोटे आना। छोटे फस्नों के गुच्छ लगते हैं। दमकै फलका गुण- टटोबा ( पु.) घिरनो, चक्कर । बातम्लेष्म, शोथ और उदरव्यथानाशक. तिला, दीपन और टटीरो मि. सा.) टिटिहरी देखो। लघु है। टटा (Eि'• पु०) टा देखो। टनिका ( स्त्री. ) यन्त्रविशेष, एक प्रकारका औजार रटई ( हि स्त्री०) मादा टह । जिमसे पत्थर काटा जाता है, टॉको. छेनी। टटोना (जि.क्रि. ) टटोलना देखो। टन्ति ( स० वि० ) टङ्क त । १ उलिखित । २ वद, रटोरना (Eि क्रि. ) टटोलना देखो। जो सिया गया हो। ३ शब्दित, धनुषको डोरीका शब्द रटोन ( कि. म्खो ) गूढ स्पर्श, उंगलियोंमे छ कर माम्नम किया हुआ। करनेकी क्रिया। "नाकृष्टं न च टंकितं न नमितं नोत्थापितं स्थानतः।" ( उद्भट ) . टटोलना हि क्रि० ) १ गूढ स्पर्श करना, उँगलियों से क टङ्ग ( स० पु० लो० । टङ्ग पृषोदरादित्वात् माधुः । कर किमो चोजका अनुभव करना। २ किसो चोजका १ खनित्र, कुदाल। २ परशु, फरमा। ३ जना, जांध। पता लगान के लिये इधर उधर हाथ रखना। ३ बोल ४ टङ्गान, सुहागा। ५ परिमाणविशेष. चार माशको एक चालमेही किमो के हृदय के भावको धार लेना। ४ परोक्षा तौल। करना, परखना, अजमाना। टङ्गगन (म० ए० को०) टकण पृषोदरादि० माधुः । टङ्गण, टहनो (स'. स्त्री०) रति शब्दमयति नो-ड गौरा सुहागा। टनाये गै-विवाङ्ग र राज्यके अन्तर्गत अटिश शामना- डोष । ज्येष्ठो, विपकलो । धोन एक ग्राम। यह अक्षा० ८५४ ७० ओर देशा. टटर (सिं० पु० ) बॉमको फटियों पादिका बमा हा ०६ ३५ पू० में पवस्थित है। भूपरिमाण ८८ एकड़ और। ___ पल्ला। यह प्रोट, रोक या रक्षाके लिये दरवाजे इत्यादि. में लगाया जाता है। लोकसंख्या प्रायः १७३३ है। यह पहले पोतु गोन और इचका वामस्थान था। आजकल यहां गेमन टहरो ( म० स्त्री०) टोति शब्द राति ग-क गौराटि. कालिक रहते हैं। डोष् । १ पटहवाद्य, ढोलका शब्द । २ लम्बावाक्य, लंबी टङ्गिनी ( . स्त्रो० ) टक मिनि पृषोदरा० माधु: । वृक्ष चौड़ी बात । ३ मिष्या वाक्य, झठी बात, चुस्लवाजो, विशेष, पाठा। ठट्ठा। टङ्गो-युक्त प्रदेश पेशावर जिलेके अन्तर्गत चारसह टटा ( हि पु० ) १ एक बॉसकी फहियोंका परदा, टहर । तहसौलका एक शार। यह अक्षा. ३४१७ उ० और २ लकड़ीका पला। देशा० ७१ ४२ पू० के मध्य पेशावर शहरसे २८ मोल. टधा--१ बम्बई प्रदेश अन्तर्गत सिन्धुप्रदेशमें कराची को दूरी पर अवस्थित है। लोकमख्या प्रायः ८०८५ है। जिन्लेका उपविभाग। यह कगची, टहा, मिरपुर मकर स्थात मामको नदी शहरके पश्चिम हो कर प्रवाहित है। और घोड़ावाडी तालुक ले कर ममठिन हा है। . अधिवामी मुहम्मदजई. पठान है। २ बम्बई प्रदेशक अन्तर्गत मिन्धुप्रदेशमें कगयो जिन्नेक टपटच (तिक्रि०वि० धाय धांय, धक धक। झोरक उपविभागका एक तालुक । यह अता. २४. ३१ टचनी (हि. स्रो०) कमेरेका एक पोशार जिसमे वह से २५ २७ उ• और देशा०६७° ३४ मे ६८.२४ पृ॰में बरतनी में नहाथी करता है। अवस्थित है। क्षेत्रफल १२२२८ वर्ग मोल पोर लोक-