पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१५३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


और फरीदपुर ढाका कमित्ररीके साथ मिला दिये गये।; भेजी। यूरोपीय पोर य रेसियन भी नगरकोरबा १९०३-१८.४ में ढाकासे ५२१००० रु. राजस्व वसूल लिये मैन्यदलमें अपना अपना नाम लिखाया। २१ हुमा है। हटिश गवर्मेण्टने सायर कर उठा कर शराज, नवम्बर तक कोई विशेष घटना न हुई। उस दिन पफोम इत्यादि मादक द्रोंक अपर कर रखा। ऐसा सबाट पाया कि ग्राम मिपाही विद्रोही हो ___ ढाकामे ८८४३ जमीन्दारी चिरस्थायो बन्दोवस्त गये है। यह समाचार पाकर गवर्मेटने ढाकाक अधीन है पोछे ४५० जमीन्दारी और उक्त बन्दोवस्तके मिपाहियों को पन छोड देनेके लिये कहा। दूमरे अधीन हुई और २१४ लाखराज जमीन है। इस जिले के दिन प्रातःकाल के ५ बजे सिपाहियोंको निरस्त करने के १३५० जमीन्दारियों का स्वत्व गवर्मेण्ट ने बेच दिया है। लिये य रोपोय सेना पहुंचो । मबसे पहले कोषालयमा निर्दिष्ट समय पर कर नहीं चुकानसे गधर्म गट चिर पहरू निरस्त किया गया: बाद नौ-मेनागने खान स्थायो प्रवन्धके अन्तर्गत सभी जमीन्दारोको प्रकाश्य बागको ओर यात्रा को। कार्य को प्रथम प्रवखा देख नोलाममें बेच डालतो थो। १२ जनवरो, २८ मार्च कर मालूम पड़ता था, कि मिपाको महजहोमें गवर्मेण्ट के २८ जन और २८ सितम्बर ढाका कलकरोमें कर जमा प्रस्तावको स्वीकार कर लेंगे, किन्तु लालबागमें पहुंच करने का निर्धारित समय है। ढाका जरियके ममय बहु- कर अंग्रेजोंने देखा, कि मिपाहो मामना करने के लिये तमी लाखराज जमीन प्रकाशित हो पड़ी है। गवर्मण्टने प्रस्तुत हो गये हैं। अत: दोनों पक्ष में एक छोटो नाही सबसे पहले इन्हींको अपनाया किन्तु बहुत समय तक किड़ गई। सिपाही पराजित हा कर भाग चले। इनमें गवर्मेण्टका कोई स्वत्व नहीं रहनेमे अथवा अन्य जमौं- से कई एक पकड़े गये पोर उन्ह' फामी हो गई। दारीके अन्तर्गत हो जानेसे गवर्मेण्ट इन्हें छोड़नेको १५५८ १०में मम्राट अकबरके राजस्व सचिव टोडर- बाध्य हुई। मलमे करग्रहणको सुविधा लिये बाजुहा और सोनार अगरेजोंको नाई फरासीसो और पोलन्दाजोंने ढाकामें गाँव इन दो विभागों में ढाकाको विभत किया था। वाणिज्य कोठियों खोलौं। किन्तु वे भो क्रमश: १७७८ ढाका शहर प्रथम विभागके अन्तर्गत था तथा पूर्वको और १७८१ ई. में अङ्गारेजों के हाथ लगी। मुसलमानों के पोर बारवकाबादसे श्रोह तक विस्त त था। मुगल शासनकाम्नमें ढाकेका वस्त्रव्यवमाय और साधारण सम्राटग महल पार सायर इन दो श्रेणियों के राजख वाणिज्य विशेष प्रसिद्ध था। ढाकेको मलमलको प्रशसा वसूल करते थे। जमोनको मालगुजारो अदा करने के लिये मब जगह फैली हुई थी। किन्तु अग्रेज-गासनमें बाजुहा ३२ और सोनारगाँव ५२ परगौम विभत हुपा यहाँका व्यवसाय लोप हो गया है, मैंचेष्टरो महामन्त्रसे था। प्रत्येक विभागमे यथाक्रम ८८७८२०) और यहाँक तौतियोंका कुल निमूल हो गया है। अंग्रेज- २५८२८०, रु. वसल होते थे। १७२२ में वन्देश बणिकीने ढाका अधिकार कर वहाँ व्यवसाय प्रारम्भ १३ चकलों में परिवर्तित हुा। सोनारगांव, बाकरगञ्ज, किया। किन्तु धीरे धीरे पाय कम जानसे १८१७ ई.में बाजुझा विभागके कई अंश, विपुग, सुन्दरवन पौर उनकी कोठियाँ उठा दी गई। नोपाखालो फेगोनदो तक जहांगोरनगर ( ढाका) अग्रेज गमत्वकालको ढाकाम उतनी अधिक राज विभागके अन्तगत थे। ये फिर २३६ परगनों में पौर कीय दुर्घटना नघटी, किन्तु १८५७ ई०का सिपाही कई एक जमींदारियों में विभक्त हुए। इस प्रदेशसे विद्रोह उखयोग्य है। ७३ नं० देशीय पदातिक १८२८२८) रु. कर निर्धारित हुआ था । * सैन्य दो दलमें यहां रहती थी। मेरठ के सिपाही विद्रोहो ३ बालके अन्तर्गत ढाका जिलेका सदर उपविभाग । हुए, यह सम्बाद पा कर ढाकेके सिपाहियों में भी प्रस- ढाकेका विस्तृत विवरण जाननेके लिये निम्नलिखित प्रन्य द्रष्टव्य तोषका चिक झलकाने लगा। टिप गवर्मण्टने भावो Dr. Taylor's 'Topograply of Dacca, Droyley's Antiquit. पमा जानबर पारको रक्षाके लिये बहुनसो सेना ies of Dacca, Hunter's statistical Account of Bengal. Vol.vii. Vol. IX 38