पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१८७

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सम्बोर--पदस्थ ९८३ हुई कि मैं शिवजीके पायतनसे बड़ी हो जाऊँ। यह यह मगर पहले दक्षिण प्रदेशके प्रबल पराक्रान्त हिन्दू मोच कर वह प्रतिदिन बढ़ने लगो। शिवजो भो नन्दो. राजवशको राजधानो तथा राजनीति, धर्म मोति, मे छोटे रहने की इच्छा न करते हुए दिनों दिन बढ़ने विद्यानुयोलन प्रभृप्तिका केन्द्रस्थान था। यह स्थान लगे। अर्च कगण यह देख कर बहत संकट में पड़ गये। प्राचीन हिन्दू राजा गोंको कीति तथा पूर्व सन स्थापता- अन्समें उन्होंने नन्दीको वृद्धि निवारगा करने के लिये नन्दी नैपुण्य का परिचायक है । यहाँका मन्दिर भुवनविख्यात के पिछले भागमें एक बड़ो लोहेको कोन ठोक दो। है और इसको ऊँचाई १८.० फुट है। इसके सिवा उम उम दिनमे नन्दी और बढ़ न सको । महादेव भी उसी मन्दिरमें हो बहुतमे छोटे छोटे देवालय हैं। उनमेमे अवस्थाम हैं। यह प्रवाद मत्य वा अमत्य जो कुछ हो. किमी किसीको गठनप्रणाली और निर्माणपारिपाट्य किन्तु इस तरहका बड़ा मन्दिर लिङ्ग और नन्दो मूनि | टेखनेसे पाय खाना पड़ता है। मन्दिरको देवमूर्ति अन्यत्र देखने में नहीं पातो। वृष मुर्ति आदि भी विस्मयकर है। हिन्दू राजामोंके शामन कालमें तञ्जोर मच प्रकारके तखोरका भग्नावशिष्ट दुर्ग बहुत दूर तक फैला शिल्य, वाद्ययन्त्र, स्वरविद्या, काव्यरचना और चित्रविद्या- हुआ है। दुर्ग के प्राचारके अभ्यन्तर ही राजप्रामाद और का केन्द्रस्वरूप था। अभी उक्त मभी विषय धोरे धोरे नगर स्थापित है। राजपामादको प्रकागड़ अहानिकानों लोप होते जा रहे हैं। लेकिन अब भो तनोग्मं जो ममें एक ऊपर गजाओंका पुस्तकालय था। उममें चित्र बनता है, वह अत्यन्त मनोहर दीव पड़ता है। इन मस्कृतग्रन्थ थे कि उतने और कहीं पाये नहीं हावभावमें यह कलकत्तेके आर्टष्ट डिपो के चित्रको अपेक्षा जति । मन्द्राजक मिभिन्नमभि सके भूतपूर्व डाका बाणेन. अनेक अंशमें श्रेष्ठ है। ने उन पुस्तकाकी एक सूची बनाई है। २मन्द्राज प्रदेशको अन्तर्गत तञ्जोर जिले का धान उप- तजोर नगर बागेक शिल्पकार्यो के लिये विख्यात विभाग और तालुक। यह अक्षा० १०२६ से १० । है। यहाँका रेशमो काट, नक्काशी करनेका पतला ५५ उ० और देशा० ७८४७ मे १८२२ पू०में अब तांबे का तार र नरके खिलोने रत्याटि प्रत्या स्थित है। भू-परिमाण ६८८ वर्ग मोन और जनसंख्या सुन्दर होते हैं। लञ्जोरसे ले कर पूर्व की ओर ममुद्र प्रायः ४०७०३८ है। इसमें तञ्जोर, तिरूपदो. वजन | किनारे नग्नपत्तन चन्दर तक तया पश्चिमम त्रिचिनापनो और अयमपते नाम के चार शहर तथा २६२ ग्राम | 1 तक रेल पथ हारा मयुक्त है। लगते हैं। दक्षिा भारतीय रेलपथ इस उपविभाग तटक (हि. पु. ) कर्ण फूल, एक प्रकारका गहना जो उत्तरमें प्रवेश कर तञ्जोर नगर होता हुआ पश्चिमको कानमें पहना जाता है। गया है। यहाँ सब अनाजांसे धानको फसल हो अच्छी होती है। तट (म० क्लो०) तट अच । १ नदो प्रभृतिका कून किनारा, ३ मन्द्राज प्रदेशके अन्तर्गत तञ्जोर जिन्लेका प्रधान तोर। २ उच्चक्षेत्र, ऊँची जमीन। ( पु०) ३ शिव । नगर और मदर। इसका पलत नाम सनावर है। शिवको प्रधान देवा ममझ कर उनका नाम तट रखा यह अक्षा० १० ४७ उ० और देशा० ७८.८ गया है । “नमस्ताय तदय य तटानां पतये नमः । पू० पर दक्षिण भारतीय रेलपथके किनारे मन्द्राज मे (भारत १२ २८४६६) २१८ मील और तुतीकोरिनमे २२६ मौलको दूरी पर (त्रि०) ४ उच्छ्रित, उग्रत, उठा हुआ। स्थित है। जनमख्या प्रायः ५७८७० है, जिनमेसे सटग (म पु०) तड़ाग पृषो० साधुः । १ साग, तालान, मैकड़े ८५ हिन्दू, ३६०. मुसलमान, ४७८६ ईमाई ओर मरोवर ( वि०) तट गम ड। २ तटगामी, तालाब पर १५४ जैम है। जानवाला । यहाँ जिलके जज, कलकर, मजिष्ट्रेट प्रभृति बास तटस्थ (स. त्रि.) तटे समीपे तिष्ठति स्था-क। १ ममोप- करते हैं । रस नगरमें म्य निसपालिटी है। स्थित, समीप रहनेवाला । २ उदासीन व्यक्ति, निरपेच,