पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२८२

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सवरी-तमकोही तबरो-सबरिस्तानके एक प्रमिड ऐतिहामिक तथा । तभ ( म० पु. ) छाग, बकरा। 'तारीख सब रो" के रचयता। इनको इच्छा तो अरतभो । हि अव्य.) १ उसो समय, उसो वक्त । २ इमो अधिक थी, लेकिन मिवा आग्रहसे केवल ३०००० कारण, इमो वजहसे । कागज तम्तोम हो इन्होंने माधारण पनिहाम ममाप्त नमचा ( फा० पु.) १ छोटो बन्दुक, पिस्तोल। २ एक को थी। ८२२ ई० में इनका देहान्त हुआ। प्रकारका लम्बा पत्थर । यह दरवाजाको मजब तोके लिये तबल ( फा० पु० ) १ बड़ा ढोल । २ नगारा. इंका। । बगलम लगाया जाता है। तबलची (प. पु०) छोटा तबला बजानेवाला, तबलिया। तम ( म० लो० ) ताम्यत्यनेन तम करणे सजाया घअर्थ सबला अ. पु०) ताल देनेका काठका एक प्रकार का बाजा। घ१ अन्धकार, अंधेरा। २ पाढाय. परका अगला यह काठ वाग्वला और लम्बोसग होना है। इस पर भाग। ३ तमोगुणा । ४ राह। (पु.) ५ तमालवृक्षा गोन चमड़ा मढ़ा रहता है । लोहचन, भावे, लोई, मरेम, बराह, सूअर । ७ पाप । ८ अज्ञान । ८ कालिव, कालिमा, मैंगरेले और तेन्नको मिला कर एक प्रकारको स्याही | श्यामता। १० नरक। ११ मोह । १२ सांख्य के अनुसार बमाई जाती है और इसोको गोल टिकिया तनने के ऊपर। अविद्या । १३ प्रकृतिका तीमग गुण। १४ राह ! १५ अच्छी तरह जमा कर चिकन पत्थरसे घोटी जाती क्रोध, गुम्मा । रमो स्याही पर श्राडात पड़नेमे तबलेमसे आवाज निक- 'तमप्र (अ. स्त्रो०) १ लालच, लोभ २ चाह, इच्छा। नती है। मढ़ा हुआ चमड़ा कु डममे चमाई के फोत हारा तमक ( म०प्र०) ताम्यत्यत्र तम बुन् । खासरोगभेट । मजबूतीमे जकड़ा रहता है और इसमें काठको गुन्नियों इममें दम फलने के साथ माय बहुत प्याम लगती है. भी रख दो जाती है। इन्हों गुलियोको महायतामे तब मीना आता है, जी मिचलता है और गले में घरधरा- लेका स्वर ममय पड़न पर चढ़ाया और उतारा जाता हट होती है। मेघाच्छनक दिन इसका प्रकोप अधिक है। यह बाजा अकेला नहीं बजाया जाता, इमो तरह होता है। और दूसरे बाज डुग्गीकै माथ बजाया जाता है। वाता- तमकना (हि क्रि०) क्रोधका भावेश दिखलाना, गुस्माक वरण अधिक ठंढा हो जानके कारण भी तबला आपमे मार उछल पड़ना। पाप उतर जाता है और अधिक गरमौके कारण आपसे तमकप्रभा ( म स्त्रो०) जैनशास्त्रानुमार अधोलोकमें आप चढ़ जाता है। सात भूमि है उनमें यह छठो भूमिका नाम है। इसमें तबनिया ( अ० पु. ) तबला बजानेवाला, तबलचो। घोर अन्धकार है और छठा नरक भी यहीं है। सवाक (अ.पु. बड़ा थाल, परात। समकखाम (म.पु.) एक प्रकारका दमा । इसमें कंठ तबाबत ( अ० स्त्रो. ) चिकित्सा, इलाज | रुक जाता है और घरघराहट होती है। यह बहुत खतर- सबागौर ( हि पु०) बंशलोचन । नाक वीमारी है। इसमें रोगोको प्राणका डर रहता है। तबाह (फा०वि० ) नष्ट, बरबाद, चौपट । तमका ( स०स्त्रो०) १तमाल वृक्ष। Phyllanthur तबाहो ( फा. स्त्रो०) अध:पतन, नाश, बरबादो। Emblica ) २ भूम्यामलको, भुई आँवला। तबियत (हि. स्त्री० ' तबीयत देखा। ३ जेनशास्त्रानुमार धूमप्रभा नामक पांचवी नरक तबीयत (अ. स्त्री०) १ चित्त, मन, जो । २ बुद्धि, ममझ, प्रथ्वो में पांच इन्ट्रकविल है। उनमेंसे एक विलका नाम है। भाव। तमको ( म० स्त्री० ) जैनशास्त्रानुसार चतुर्थ नरकभूमिके सबो मतदार (अ० वि०) १ समझदार, अलमन्द । २ भाबुक, रसज, रसिक । सात इन्द्रविलों में एक। सोपसदारो । प. स्त्री० ) १ समझदारो, होशियारी। तमकोहो-युक्त प्रदेशके बस्ती तथा गोरखपुर जिलेका एक २ भावुकता, रमन्नता। प्रतिष्ठित गन्य । युतप्रदेशान्तर्गत गोरखपुर तथा बस्ती तबीब (प.पु.) वैष, चिकोम । जिसने २३०, बिहारप्रान्तके सारण जिलेमें ४ पौर