पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/२८६

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२८२ नमक प्राचोर हा वेष्टित र मोन भूमिके अपर राजभवन । वहो मन्दिर वर्तमान वर्ग भोमाका मन्दिर । कहते अनाया गया था। वर्तमान कैवर्त राजाभोंक प्रामादक है कि इस कुएं में कोई द्रव्य फेकनेमे वह सोना हो पश्चिम भागमें उन मय ग्वशक गजभवनका वशावशेष जाना है। देवोका मन्दिा कानारायण नदो के किनारे देखा जाता है. ?मका पार दूमा चित्र कुछ भी नहीं प्रतिष्ठिम है। ब्रह्मपुराणम निवा है कि विश्वकर्माने है। कंवर्त गजप्रामाद रूपनारायण नहीक किनार ३० मा कर हम मन्दिरको बनाया था। तालिम देखो। एकर जमीन पर अवस्थित है। फिर भो तमलक व मान केवलवगीय राजा. तमलकको वग भीमा । कालो ) दयाका मन्दिर का कहना , कि उनक आदि पुरुषने ११ मन्दिरका मजम प्रोमड है। उम मन्दिर निर्माण के विषयम बहत . निर्माण किया है। दुमो वृत्तान्तमे हम लोगों को पता मा कहानियाँ हैं। उनमेमे केवन एक कहानी पर नमः चलता है, कि धनपति नामक कोई प्रमिह वणिक रूप- कर अधिकांश अधिवामो विखाम करते हैं-मयरवंश : नागयण नदो हो कर जाते ममय तमलक बन्द ग्में उतरे राजा पकड़ध्वजके आदेशमे एक धोवर दिन प्रति थे। यहां उन्होंने एक मनष्यको एक मोनका कलम ले जात राजाकं ग्वान के लिये शोल मछलो लाया करता था। , इण् देवा। कथाप्रमान में उन्हें मालूम पड़ा कि निकट एक टिन अनक चेष्टा करज पर भी उमे शोल्न मानो न वर्ती एक झरनके जनसे पोतनका परतन माना हो मिन्नो। रम पर गजान क्रोधित हो कर उमे मृत्य, . जाता है। उम मनु ने उन्हें वह भग्ना दिखना दिया। पालको पाना दो। वह दरिद्र श्रीवा शिमो मायम . धनपति तमलुक बाजारका ममम्त पोतन खरीद कर उन्हें कामगारमे निकल कर जङ्गलमें भाग गया। वहा . मानमें परिणत किया और मिहल के अधिवामियों के निकट भोमाद बोर्न उमके मामने उपस्थित होकर दविका: बेन कर यथेट लाभ उठाया । उन्हनि लाट कर तमलुकमें कारण पला। धौवरन अादिम अन्त तक मब बातें कम उक्त मन्दिर बनवाया था। दम मन्दिरका शिल्पनं पुण्य सनाई। गंभीमान बहतमो मकलियां पकड़ कर अत्यन्त विस्मयजनक है। मन्दिर विगवत प्राचोरम घिरा उममे कहा कि तुम इन्ह अकी तरह मग्वा कर रग्वो। है जो देखनम बहुत सुन्दर लगता है : प्राचार ६० फुट बाद उन्हनि एक कएको दिखना कर यह जता दिया. : ऊँचा है और पत्तनकं ऊपर इमको चोड़ाई ८ फुट क दमका जन्न उन सम्बो हुई मनियों पर डाम्नर्ममे वे है। उमन्दिरमं कहीं कही मि व कागड पत्थर लगाये फिर भी जॉरागी। धोबर देवांक अनग्रामे उक्त उपाय गये हैं. जिन्हें देख कर चमत्क त होना पड़ता है। दाग प्रतिदिन राजाको मछन्नी ने लगा। प्रति दिन आधुनिक यम्बादिको विना महायतार्क इतने ऊँचे पर धावर मन्नो ना कर देता है, यह देख गजा बहत किम तरस ये प्रकागड पत्थरवगड उठा कर रखे गये थ. चमकत हो गये और किम उपायमे यह रोज गंज मछली उम और ध्यान देनसे तमलुकवामाको अमव्य धन्यवाद नाता है, यह जानने के लिये उन्होंने धोवरम प का। दिये बिना रहा नहीं जाता। मन्दिरके शिखर पर पहले तो वह इम गुप्त रहस्यको प्रकाश करने में अमहमत विष्ण,चक्र दोख पड़ता है। मन्दिर ४ अंशों में विभत्ता है. हा. किन्तु पोछे राजाकै भयसे उमने उम मृतसंजीवक (१) बड़ा देवालय (यहाँ देवोमूर्ति स्थापित है), (२) कूपको कथा कर मनाई। भीमाद वो धीवरके प्रति अनु. जगमोहन, (३) यन्त्रमण्डप, (४) नाटमन्दिर । मन्दिर ग्रह कर उमौके घरमें विराज करती थौं, किन्तु कुएँ का के बाहर दरवाजमे ले कर साधारण पथ तक बहुतमो विषय प्रकाश हो जाने पर वे बहुत गुस्सा कर उसके सीढ़ियां हैं और मोदी के दोनों बगल दो खम्भ है। धरमे भन्साहित हो गई और पत्थरको मूर्ति धारण कर मन्दिरके पविक्षत स्थानों में बाहरको घोर एक केलि. कुएं के मुंहके निकट बैठ गई। धीवरने राजाको वह को कदम्बका बचा है। प्रवाद है, किम हपको अपास बन्ध्या दिखला दिया। राजा कुएँ के निकट जान सके. उन्होंने मारी भो सन्तान पातो । खोगपहचवा अनुग्रह काम उसो पावरको मूर्ति के ऊपर एक मन्दिर बनवा दिया। करने के लिये अपने बाल पतलो रस्सी बनाकर उसमें-