पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३१९

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तरेटी-तक सरेटो (हि.स्त्रो० ) वह जमीन जो पहाड़के मोचे ररतौ ३१३ उ० तथा देशा० ७७३७ और ७० ५१. पू में है। तराई, घाटो। अवस्थित है। इस राज्यका क्षेत्रफल ७वा मोल है। तरेड़ा (जि. पु. ) तरेग देखो। थोड़े मुसलमान छोड़ कर इस प्रदेशके सभी अधिवामो सपना (हि. क्रि०) दृष्टि कुपित करना, ओं व शारे- हिन्दू हैं। तरीच पहले सरमोके राज्य के अन्तर्गत था । से प्रमन्तोष जाहिर करना । • अंगरेजोंके हाथ पाने के समय ठाकुर कमरसिंह तराच के तौनी (जि. स्त्रो.) हरिम और हलको एकमे मटाये. शासनकर्ता थे। किन्तु वाईक्य ग्युत्ता वे कोई कार्य नहीं रखने का पचर। कर सकते थे। उनके भाई झोबू मनस्त राज कार्य च नाते तरेला (जि. पु. ) किमो स्त्रोका वह पुत्र जो उसके थे । १८१८ में करममिहको मृत्यम बाद झोबूको एक समट मिलो, जिसमें उनके तथा उनके उत्तराधिकागके दूमरे पतिमे जन्मा हो। हाथ तरोच राज्यका शासनभार अप गा किया गया। नगेलो (हि. स्त्रो०) तर नी देखो। १८८५ ई में ठाकुर केदारसिंह तगै के राजा थे । केदार तरच (हि. स्त्रो०) १ क घों के नोचेको लकड़ो । २ तरॉछी मिक मृत्य के बाद ठाकुर शम्भ सिंह राजा हुए। देखो। - हम गज्यको प्राय प्रायः ६०१० रु. है। राजाको नरोडा (दि.१७) फसनका वह परिमित अवजा इल. .. मना रखनेका अधिकार है। वाहे आदि मजदूरों को देने के लिये निकाल दिया या तशेना (हि. पु० ) १ एक प्रकारका गहना जिसे स्त्रियाँ है जाता है। कानमें पहनती हैं, तरको । २ कर्णफल नामा नगेई (हि स्त्रो० ) तुरई देखो। गहना । ३ मिठाईका खोचा रखनका मोढ़ा। राता हि पु० ) मध्यभारत और दक्षिण भारतमें तक (म. पु.) तक भावे अच । १ व्यभिचाराशङ्का- होनिवाला एक प्रकारका लम्बा "पेड़। इसके छिलके निवतक ऊहभेद, अर्थात् अविज्ञात अर्थ के विषय में मयः चमड़ा मिझाने के काममें पाना है।, दमका दूसरा नाम लिक कारण हारा तक विशेष, वह तक जो शास्त्र ने तरवर है। अविरोधी और मन्दिग्ध पूर्वपक्षको निराश कर उत्तरपक्ष- तराला - मथुग जिले के अन्तर्गत छाता तहशीनका एक में व्यवस्थापनपूर्वक गास्त्राथ में निशताका अवधार छोटा ग्राम। यह अक्षा० २७४० ४६ उ० और देशा० करता है। २ आकांक्षा, चाह। ३ व्याप्यके आरोप से ७७ ३७ ४५ पू में अवस्थित है। कृषिकार्य के लिये कारण व्यापकका प्रमञ्जन । ४ आगम का विरोधो यह ग्राम उल्लेखयाग्य है। इस स्थानका गधागाविन्द न्याय: ५ आगमार्य परीक्षा । ६ मोमांमारूप विचार वा देवका मन्दिर विशेष प्रमिद्ध है। प्रति वर्ष कात्तिक शास्त्रार्थ । ७ मानम ज्ञानभेद। ८ अपनो बुद्धि माममें त्रयोदशीमे पूणिमा पर्यन्त उक्त मन्दिरके निकट अनुमार तर्क ( विचार) मात्र । ( वेदान्तप्र.) एक मेला लगता है। जो भ व अचिन्तनीय हैं, किसो हालत में भो जिनका तरौंछो (हिं. स्त्रो. : १ हत्य में नोचेको ओर लगी हुई विषय चिम्सा में नहीं आ सकता, उन विषयोका कभी भी लकड़ो। २ बैल गाडोमे सुजावाके नीचे लगो हुई एक तर्क हारा निर्णय न करें। क्योंकि अप्रतिष्ठित तर्क लकड़ी। हारा कभी भी गम्भोर अर्थ का निसय नहीं हो सकता । तरोंटा (हिं. पु. ) चोके नीचेका पत्थर । इस प्रकारका तक करनसे पप्रतिष्ठादोष लगता तरौता (हि.पु. ) छाजनमें ठाटके नोचे दिये जानेको है। सर्क में अप्रतिष्ठा दोष होने पर, वह निराकत होता लकड़ी। है; वह तर्क ग्रहणीय नहीं । तक बिना किये शास्त्र- तरीच-- सिमला पहाड़के अन्तर्गत और पचाच गवर्मेण्टके मामांसा न करें ऐसी विधि है; किन्तु वह तक कुतर्क अधीन एक देशीय राज्य। यह पा ३०५४ और न होना चाहिये। धर्म धाखसे एक मत हो कर तक