पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


टोसो सभामें इनकी काफी खातिर तबज्ज हुई। न को जिया किमोने फरमाया कि अभी उसे पोर भो कवित्वमय और लियोनारा नामका दो गजकन्याएँ, जो अविवा. बनाना चाहिए इत्यादि । टामोन भाजिलकं आदर्श पर हिता और टामोम १० वर्ष उमग्में बड़ो थों, उनकी हर इम महाकाव्यको रचना को थो । उन्होंने किमी के कहने एक नरम स्वातिरदारी करने लगो। टामो राजकुमागे में कुछ परिवर्तन करना उचित न समझा । १५६५म लियोनाराक प्र ममं पड़ गये थे। उम प्रेसको सुप्रसिद्ध दूहाने "काव्यको रोनि" नामक जिस मन्दर्भ की रचना कहानोको म्म नि अब भी उनके काव्यान्नोक, प्रकाशमान को थी, उसके अनुसार इन्हें भी चलना पड़ा। है। १५८५ मे १ ई. तक इनके जोवनका मर्वापेक्षा ! इस महाकाव्यमें गडफे को नायक बना कर उनके म 'मय ममय था । १५६८ ई में इनके किलाको मृत्यु ! धर्मभावके प्रति हमारे मन को प्राकष्ट करने को चेष्टा हो गई. जिममें इनका भावप्रवण हट्य शोकायन को जान पर भो यथार्थ नायक के रूप में हम भावप्रवण दया था। ग्निाल्डोको, विषम्म टानक डको ओर वोदय मुसल १५८० ई में ये कास्मिान्न महोदय के माथ पाग मानको ग्रहण करते हैं । सुन्दरो आमि दान ईमाइयों में नारोमें भ्रमण करने गये। ये बड़े निर्भीक और : किम तरह विशदका बीज बोया और फिर वह पष्टवक्ता थे, इसलिए कार्डिनालके माय बनती थो। कैसे विफन्न-मनारय हुई. इमो विषयको ले कर हम दूपर वर्ष ये फ्रानामे फेगरा गये और वहाँ । महाकाव्य की रचना की गई है । अन्त में प्रामि दा एक डिउक के प्रधान कार्य करने लगे । परवर्ती ईमाई वार पर प्रामत हो गई और उसके प्रेममें पड़ चार वर्षांमें इन्होंने "अामनिया" और "जाकमान्लेम कर उमन ईमाई धन ग्रहण कर लिया। वोर रमणो मक्ति" नामक दो जाँचे लंगक ग्रन्य बनाये। “श्राम क्रोग्दिानं किम तरह अपने प्रणयोके माथ युद्ध करने निया" किमानों को जोवनियाँ आधार पर नाटकको रत प्राण दिये और अन्तिम समय में कैसे ईसाई धर्म- और पर निग्वा गया था. किन्तु उभमें गोति कविताका को अपनाया, किम तरह प्रारमनियान दुःग्वा का रापमा और तदानोनयन इट नोका भाव मौजूद था। पर मारना किया, इत्यादि घटनाको पढ़ते पढ़ते पाषाण • वर्ता टोमो वर्ष तक जो भाव काव्य और नाटक इटली. हदयों को अखि भो भर पाता हैं। ईमाको मालह लिखे गये थ, उमससे अधिकांश ग्रन्या में हम "श्राम वीं शताब्दो डस मक व्य नागको मम्मिा ऊँचे निया"का प्रभाव दृष्टिगोचर होगा। इमलिए उसे है। स्वामे गायो गई। मवरवों शताब्दोम "अरुसालेम" टामाको श्रेय ओर प्रयोजनोय रचना कह मकते हैं। महाकाव्य के नायकों के नाम य गेपमें घर घर उच्चारित जम्मानरी निवाराट का प्रभाव यरोगोय माहित्य और मसालोचित होन धे। म और भी अधिक पड़ा है। यर ग्रन्थ उस युमा टाम के ग्रन्थों के तदानीन्तन ममालोचकगण उन्हें म ध्य ममझा जाता है : इम ग्रन्थक कारण है। इतना तङ्ग पारने लगे कि फिर वे क्लान्त और उन्माद- उनका नाम तालमा व्याम, होमर, भाजिल या िके भावापन्न हो गये। जरुसालेम" महाकाव्यको उस समय म. लिया आता। टामीन तोम वर्ष की उमर त उन्होंने कृपया नहीं था। इसी बीचमें वे फ्लोरेन्म में

य मकाव्य ममाम किया था। इस ग्रन्थको कार्य ग्रहण करने के लिए बातचीत कर रहे थे। इसमे

+AIR माथ ही उनझं जोवन का मीत्कष्ट भाग फेराराक डिउक अत्यन्त कड हुए ; उन्होंने सोचा इस कातीत या ! म बाद नन्ह दःखान घर निया। समय यदि टासो फलोग्न्म आयगे, तो "जेरुसालेम" शासनि "अंकमा ।'महाकाय नयन काप कार, मकाव्य वहांके.शासनकर्ता मेडिसी के नाम समर्पित उनका प्रधान धान लोगांक पाम समालोचनार्थ किया जायगा। परिणाम यह होगा कि पान तक भज दिया . फिर क्या था : नाना मुनिः नाना मत : फरारा के डिउकन जो उनका भरण-पोषण किया, उसका कोई कहने लगे कि और भी संयन बनानको जरूरत है, उन कुछ प्रसिदाम न मिलेगा। इसा बोच में ( १५७५-