पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३५६

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ताजगी-ताजपुर तातार लोग वोरत्व-गाथा ग्चना और उमको गाना , विशेष प्रचलित है। प्रजाको प्रति बीर्घ में एक रुपया खूब पमन्द करते हैं। मालगुजारी देनी पड़ती है। २ यवनाचार्य का बनाया हुआ ज्योतिषका एक, इस परगनेमें ४४ जौंदारो लगती है। यहाँका कर प्रध। पहले यह ग्रन्थ अग्बो और फारमोमें था। बाद । प्राय: ६८८४२ रु. है। गजा ममरसिंह. नोलकण्ठ आदिमे यह संस्कृतमें बनाया | ताजपुर-१ दिनाजपुर मिलेका एक परगना । यह जिलेके गया। ताजिक देगा। दक्षिण पश्चिम कोगा में अवस्थित है। इस प्रदेशको जमोन. माजगी ( फा• स्त्रो० ) १ शुष्कता का अभाव, हरापन, ' ममतल नहीं है, कहीं ऊँचो ओर कहीं नोची है तथा ताजापन । २ प्रफुल्लता, म्वस्थता । ३ नयापन । दक्षिण-पश्चिमको पोर ढाल है । यह प्रदेश समुद्रपृष्ठसे माजत् ( ५० वि० ) तन्ज मङ्गोचे प्रादिजिननोवौ। शोघ्र। १५० फुट ऊँचा है। थोड़े परिश्रमसे हो खेत में पच्छो माजदार ( फा० वि० ) १ ताजके आकार का । (पु. १२ फमनउपजतो है। कहीं कहीं घातको जमोन और ताज पहननवाला बादशाह । जलाभूमि है। वर्षाकालमें परगनेको सभी नदियोंका जला माजना (वै पु० । कोविदारवृक्ष, कचमारका पेड़। बहुत बढ़ जाता है जिसमे मब ग्राम जलमय हो आता ताजन ( फा• पु० ) चाबुक, कोड़ा। ताजना (हिं० पु. ) ताजन देखो। धान, ईख, तिल मरमा, उरद इत्यादि यहाँके प्रधान ताजपराकाठि-चम्बई विभागके बोउड़ और गधार अञ्चन- उत्पन्न द्रव्य हैं। ग्रामके निकटस्थ जमीनमें तमाकू बहुत धामो एक आति । उपजता है। पहले यहाँ बहतमो नोलको जमोन थो। ताजपुर-१ दरभन्ना जिलेका एक उपविभाग । यह पहले ताजपुर परगने के सभी स्थानाम मन्नो पाई जाती त्रिहत के अन्तर्गत था। १८७५ ई० को रन्नो जनवगेमे दर- है। धोवर मछलो पकड़ कर गरगञ्ज और निकटवर्ती भङ्गा, मधुवनो भोर ताजपुर इन तीन मरकुम को ले कर बाजार में बेचते हैं। दरभङ्गा जिला संगठित हुआ है। १८६७ ई०को इम १८७४ ई० के दुर्भिक्षकालमें दुर्भिव-प्रपोड़ित स्थानमें प्रथम महकुमा स्थापित हुआ था। यह प्रसार मनुष्यों क थोड़े व मे परगने में कई एक राहें तैयार २५२८१५ और २६२ उ तथा देशा. ८५३६ पोर ! हो गई हैं। ८ ०में अवस्थित है। भूपरिमाण ७६४ वर्गमोल यहाँको जमीन कुछ कुछ धूसरवर्ण तथा बाल है। हिन्दू, मुसलमान, ईमाई, कोन प्रभृति यहाँ वाम करते हैं। हिन्द को मख्या सबसे अधिक है। मिली हुई कोचड़मी है। ताजपुर महकुम में ३ याना, एक दोवानी और पन परगमेका जनवायु स्वास्थ्यकर नहीं है। वर्षा में फौजदारो पदालते हैं। बाद हो स्वरका प्रकोप भारम्भ होता है, जिससे अनेक २ उक्त ताजपुर महकुमेका प्रधान गर । यर प्रक्षा. लोगोंको मृत्यु हो जातो है। ग्रोमकान्तमें दिन के समय २५५१ ३३ उ० और देशा० ८५४३ पृ० के मध्य मुजा अत्यन्त गरमी पोर रातके समय ठण्टा माल म पड़ती फ्फरपुरमे २४ मोल दर दलसिङ्गमरायके रास्ते पर अव है। बहुत दिनों तक ज्वरके रह जानेसे वात-रोग हो है। बहुत दिनों तक ज्वरक र जानस स्थित है। यहाँ एक स्कूल, दातय पोषधालय और जाता है। अतोमार भोर कुष्ठ रोगका प्रकोप भी यहाँ विचारालय है। शहर के नोचे वलन नदो प्रवाहित है। कम नहीं है। ताजपुर-पुर्णिया जिनका एक परगना। दम परगर्नमें । २ दिनाजपुर जिलेके विजयनगर परगने अधीन एक धान, तिल, सरमों, भालू इत्यादि बहुत उपजते है । ग्राम । यह याम अत्यन्त पाधुनिक नहीं है। मुसलमानों १. परगनेके किसी किसो स्थानमें 8 से ७ हायका ममयम यह स्थान विशेष प्रसिद्ध था। उस समय कहा चलता। साधारणतः ४ से ५ हाथका कहा हो ताजपुर एक प्रधान सेन्यावासके रूप में मिना जाता था