पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३५९

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ताजमहल-गानिक FADITAL ताजमहल पूछा कि-'कहो कैमा देना ?-तब उनको स्त्रोके | दोनों कोंके ऊपर हो बह वैसी भी दो करें अपर मुंहसे यही निकला कि-"अगर मेरे ऊपर भी ऐसा ही बनो हुई है। यथार्थ को नीचे हैं। प्रवेशद्वारमे मकबरा बने, तो मैं कन मरनेको तैयार है।" वास्तव. घुमते ही मामने मोचे जाने के लिये मोपानश्रेणो है। में जिम स्त्रोमे एक बार ताजमहल देखा है, उसकी माल म होता है, जपरको को लोगों के देखने के लिये दयमें इस तरह के भावका उदय हुपा है। चबूतरेके बराबर (ऊँचाई के समान) बनाई गई है, ताजमहल के दोनों बगलमें नोन गुम्बजोवालो मफेद तथा एमसे भीतरको शोभा भी अपूर्व हो गई है। भीतर मङ्गमर्मरको दो मसजिदें हैं। दाहिनी तरफको मम. जानमे यह माल म होता है, कि मानो ये हो (अपरकी) असलो कहै । पहले जहाँ जहाँ तारीख खुद हुई हैं, जिदको माधारण लोग जबाब कहते हैं, इसमें उपाम- मादि नहीं होतो ! इसको गुमटी पर पोतलक गोला, उन मभो लदावों पर सुधरा लिपिमें कुरानके उपदेश अर्धचन्द्र और कोलक दिखलाई देते हैं। पूर्ण मुरा लिखे हुए हैं। इसी तरह फाटकके सामने "पवित्र और सरल पदय ! चिरशान्तिमय स्वर्गीय उद्यान- ताजमहलका कौनमा अंश कब बना है, यह भी में पायो!" इत्यादि वाक्य लिखे हैं। यहाँके शिलालेखों द्वारा विदित हो सकता है। मस- ताज़ा ( फा० वि०) १ जो सूखा न हो, हराभरा । २ जो जिटके सामने पश्चिम दिशाके लदावकी रोक पर शाह· · डालसे तोड़ कर तुरन्त लाया गया हो। ३ जो श्रान्त जहानके राज्यका १०वा वर्ष और १०४६ हिजरा खुदा न हो, स्वस्थ, प्रफुल्ल । ४ मद्य प्रस्तुत, हाम्लका बना ९मा है। ताजमहलके भीतर प्रवेशपथके बाई पोर हा। ५ जिमको व्यवहारमें लानेके लिये तुरन्त १.४८ हिजरा पोर फाटकके सामने १०५० हिजरा निकाला हो। (पर्थात् १६४८ ) खुदा हुआ है। यह अन्तिम पड सालिक (सं० लो०) एक ज्योतिषका अन्य । यवनाचार्य- हो ताजमहल पूरा होने का समय है। इसी तरह लत जातकविषयक ग्रन्य जो फारसी पौर अरबो भाषामें मुमताज महलको काबक जपर १.४. हिजरा और लिखा हुआ था। राजा समरसिक, मोलकण्ठ प्रादिने भासमानकीका पर१.७५ जिरा पदापाम से मसात भाषा पनुवादित किया था।