पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४२

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टीबडलं वर्ष भर अध्यापकोका कार्य करनेसे टोण्डलका जान लौट कर तुषारगथिको गतिक सम्बन्धम एक सम्पूर्ण और भी बढ़ गया । वे विधानुशोलनको इच्छामे जम नो नतन पुस्तक लिख डाली। स पुस्तकमे गतिक चल दिये। प्रिय मित्र फेशन्गड़ भी इनके साथ गये सम्बन्धमें जितने भो कारण दिखलाये गये थे, पाजकल थे। दोनो मितीने मारवर्ग विश्वविद्यालय के प्रमिह वे मब विज्ञान सन्मन माने जाते है। अध्यापक पाम (क दिन रह कर अध्ययन किया १८७२१ में टोहलपमेरिका पहुंचे। विज्ञानानु- पोछे उन्होंने स्वाधीनभावमे वैज्ञानिक तत्वों का अनुसन्धान रागो मार्कोनोंने प्रत्ये क नगरमें रनको विशेष अभ्यर्थना और चिसा करनका नियम किया । .बूनमेन प्रादि की थी। अमेरिका-भ्रमणके समय पाप निवित न थे ; प्रमिद अध्यापकगण वैदेशिक छात्रयुगलको प्रतिभाको युक्तराज्य के प्रधान प्रधान नगरों में पापने विविध वैज्ञा. देख कर विस्मित हुए थे ; उन्हें यह स्वीकार कर । निक विषयोंको वक्त ताएं दी थीं। इन वक्त तानों से पड़ा था कि अल्पायाम मोर अल्प ममय में दुरूह वैज्ञा २५॥३० तो लिपिवद्ध है और उमको भाषा अत्यन्त सरल निक विषयों को सम्म णतया मख ना, केवलमात्र है। विज्ञानसे सर्वथा अनभिन्न व्यक्ति भी सहजमें वैज्ञा- पाइरीम युवक टोगडालके लिए हो मम्भवपर था। विश्व निक तत्वों को समझ सकता है। टौण्डल केवल अपनी विद्यालयको पढ़ाई भमान कर ये वार्मिनस्थ सुप्रसिद्ध बुद्धित्तिको चरमोवति कर क्षान्त न होते थे; किन्तु मेगनम परीक्षागारमें स्वाधीनतापूर्वक नाना वैज्ञानिक जिमसे विज्ञानामुरागी प्रतिभासम्पन्न व्यक्ति स्वाधीम चिन्ता गवेषणानों के लिए नियुक्त हुए। इनके इस मियके और गवेषणा हारा विज्ञानको पुष्टि कर सके, उसके भी अनुसन्धान पोर चिसापाके फलसे ही इनके जोवनको उपाय निकालते थे तथा दरिद्र वैज्ञानिकोको हर एक महतो कीर्ति थी। उनके द्वारा पावित । चुम्बक और विषयमें उत्साह देते थे । अमेरिकामें पापने वता,ता द्वारा पालोक विज्ञानक सत्य पाधुनिक विज्ञानको प्रसुन्ननोय करोब माठ हजार रुपये कमाये, जिसमें से अपनी पाय. सम्बत्ति है, इस बात को सभी स्वीकार करते है। श्यकताओं की पूर्तिके लिए कुछ छोड़ कर पवशिष्ट रुपयों- १८५१ ई० में टोगडल जमनासे स्वदेशको लौट आर्य मे पर्म रिकाके कलोम्बिया कालेजमें एक छात्रवृत्तिकी खटेशकी विज्ञान-मगडलो में ये विशेष आदरक साथ स्थापना कर पाये। अमेरिकामें स्वाधीन भावमे चिन्ता सम्मानित हुए और नाना वैज्ञानिक समाजो से इन्हें और वैज्ञानिक अनुसन्धान करनेवाले योग्य छानोको नामा ममानसूचक उपाधियाँ प्रात हुई थीं। कुछ दिनों अब भो यह वृत्ति दी जाती है। में ये सुप्रमिच "रायल इनष्टिटिउसन"में जड़ विज्ञानके अमेरिकामे स्वदेश लौट कर अध्यापक टोडल साप- प्राचार्य पद पर नियुक्त हो गये और विख्यात वैज्ञानिक निवारण विषयमें नाना प्रकार अनुसन्धान करमेमें फैडाडक पदत्यागके बाद उनके स्थान पर तत्त्वाव- नियत एए, और थोड़े हो दिनों में बम विषयमें अपना धायकताका कार्य करने लगे। म्वाधान मत प्रकट किया इससे उनको ख्याति और भी चार वर्ष तक रङ्गलेण्डमें उपर्युक्त कार्यों में नियुक्त र बढ़ गई थी। कर १८५६ ९० में ये सुरजरलण्ड चल दिये। सइजर- १८७६ ई० में ५६ वर्षको अवस्थामै टोहलने लार्ड लेगलके पावं त्यप्रदेशस्थ वर्फको गतिका निर्णय करना लडहामिल्टनको प्रथमा दुहिताका पाणिग्रहण किया। तथा कठिन तुषारराशिका तरल पदार्थ यत् प्रवाहित इनका दाम्पत्य-जोवन बड़े सुखमे बीता । ज्यादा समय होने के यथार्थ कारणको खोज करना, यही इनका विवाह करनेसे प्रायः गाईस्थ्य शान्तिमा होनेका डर उहख था। प्रसिद्ध वैज्ञानिक सवालो टोन के साथ रहता है, किन्तु इनका शेष जीवन बई पानन्दसे बीता थे और भीषण जनहोन पार्वत्य प्रदेश में वैज्ञानिक बन्धु था। वह टोगडलने करोड बीस बाईस बजानिक पाय के परिदर्शन-कार्यमें महायता पहुँचाया करते थे। लिखे है। इनका प्रत्येक अन्य सुन्दर और सरल है। छ दिन परिदर्थ नादि करनक बाद टोडलने खदेश सरल भाषामें अब लिखना, या उनका एक प्रधान