पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४६६

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४६२ तारमत-तारस्य या विण होता है। जम्बोरो नोबूके रस हारा म्वेद जिस तरह दृढ़तया पावह रहते है, सरल और वाष्पय दे कर मेषमङ्गो भोर कदलारममें एक दिन पाक करने पदार्थो के परमाणु वैसे नहीं होते। से भो तारमाक्षिक विशुद्ध होता है। कठिन वस्तु के परमाणु निविड़ विवेषके कारण तारमूल (म. ल. ) म्यानमेट, एक स्थान का नाम। महज डोमें पलग नहीं होते, किन्तु तरल और तारयिट (मवि. ) उभार करनेवाला, तारनेवाला। वाष्याय दयों के परमाणु महज होमें थोड़े विनिवेशमे ताग्न (म० को०) नान एव अगा। १ सरल । २ मष्ट। हो मचालित हो जाते हैं। कठिन (ठोस) पदार्थो में हर सारन्य (मnt.) तरन्न वस्तु का धर्म, कठिन और एकको एक निर्दिष्ट प्राकति होता है. किन्त सरल और तरल पदार्थ में प्रभेद । कठिन ट्रयोंके ममम्त अणु महज वाष्पोय पदार्थोको कोई निर्दिष्ट प्राति नहीं है। इन्हें हो मञ्चालित नहीं होते : मोना, चांदो, तोचा, लोहा. जैमे बर्तन में रक्खा जायगा, इनकी कमी हो पातति पत्थर, ईट भादि द्रव्यों के अणु एक ओरसे दूमरी भोर हो जायगी। नहीं ले जाये जा मकते, किन्तु जन्न इत्यादि तरल द्रव्यां तरल और वाष्पीय द्रव्यों का प्रभेद -जिस प्रकार ताल के अण थोड़ा बलप्रयोग करने पर मञ्चानित होते हैं । द्रव्यों के परमाणु महज हो मचालित होते हैं, उमो ओर उनके एक पोरके कण महज ही दूमरोपोर ले जाये प्रकार वायवीय द्रव्योंके प्रण भो थोड़े हो बलप्रयोगमे आ सकते। मंचालित होते हैं ; किन्तु वायोय ट्रय जिम प्रकार जिस गुलमे जलादि द्रव्यों के पण मरज होम मंचालित दबाव पडनेसे मकुचित होते हैं, तरल पदार्थ वैसे नहीं और प्रवाहित होते हैं, उसे तारण्य कहते हैं। यही गुण होते । जैसे समस्त वाष्योय द्रव्य पाकुञ्जनाय होते हैं। होने के कारण जल प्रादि पदार्थोको तरल पदार्थ कहा व मे ममस्त तरल पदार्थ दुराक अनीय हैं। परन्तु जाता है। यह नहीं कि तरल पदार्थ बिलकुल ही आकुञ्चनोय ममम्त द्रव पदार्थों में यह गुण दिखाई देता है, परन्तु नहीं। पदार्थ विद विद्वानों ने परीक्षाहारा स्थिर किया सबमें समान परिमाणमें नहीं होता। है कि अधिक बलप्रयोग करनेमे सभी तरत्न पदाचं कुछ इधर नामक द्रव पदार्थ अतिशय तरल है। घो, शहद, कुछ पाकुञ्चित होते हैं। फो पञ्च साड़े मात सेर गुड़ प्रभृति द्रव्योंका तारल्यगुण अत्यन्त अन्य है : इसोमे दवाव देनसे दश लाख भाग जलके पायतनमें पाँच भाग ये ममय समय पर कठिन भाव धारगा कर लेते हैं। कम हो जाता है, पौर दवाब हटा लेने पर जल या जल- प्राणविक पाकर्षण और पागणविक विकर्षण के तार वत् मभो पदार्थ पुन: प्रमारित हो कर अपने पूर्व पाय- सम्यसे ममस्त जड पदार्थ कभो कठिन, कभी तरल और तनको प्राप्त हो जाते हैं। प्रतएव यह स्वीकार करना कभी वापीय पावार प्राप्त करते हैं। प्राणविक विक होगा कि सभी तरल वस्तुएँ स्थितिस्थापक गुपमम्पन है। षगको अपेक्षा पाणविक पाकर्षण अधिक होनेसे तरल पदार्थीमें चाप संचालनका नियम- तरल वस्तुके कठिनताका मबार होता है। दोनोंका पराक्रम प्रायः एक पशमें चाप प्रयोग करनेमे वह सच और समभागसे ममान होनेमे तारख्यकी उत्पत्ति होती है। और प्राक. संचालित होता है। ईसवीको सत्रहवीं सदोके मध्य- घणकी अपेक्षा विकर्षण अधिक बलशाली हो तो भागमें पास्कल नामक एक फरामोसो विहान्ने तरल ममम्त पदार्थ वाष्पाकार धारण करेंगे। उष्णताको पदार्थो में चाप मचालन के नियमका आविष्कार किया ; जितमो वृद्धि होगो विकर्षणका बल भी उतना हो बढेगा। इसी लिए यह नियम पास्कलका नियम नामसे प्रसिद्ध इसीलिये तापके प्रभावमे जिन वस्तुओंके उपादान विभिन है। महों होते, उत्तम होनेसे वे ही द्रव्य कठिनसे तरल पौर जलादिके एक पोर चाप प्रयोग करनेसे वह उसके तरसने वाध्य हो जाते हैं। सभो भोर सम भावसे संचालित होता है। यह विशेष कठिन बसोंके परमाण भावविक पाकर्षण गुपसे । परीक्षा हारा देखा गया है।