पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/४७४

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ताराबाई-तारामाहरगुड़ होगो।" जयमलने थोड़ा उहार करनेको प्रतोचा की। जिम समय पृथ्वीराज अपने उद्यत भाई सङ्गको किन्तु उनकी प्रतिज्ञा पृण न होनम पिताके कराल ! शामित करने के लिए श्रीनगरको तरफ अग्रमर हो रहे थे, कवलमें पड़ कर उन्हें अपनी जानमे हाथ धोना पड़ा। उम समय मिरोड़ों के सामन्त को पत्रो अर्थात् उनकी मेह- जयमलके भाई पृथ्वोगज माड़वारमें निर्वासित थे। थोर्ड मयो भगिनोका एक पत्र मिन्ना । म पत्रसे उन्हें मामन्त दिनमें उन्होंन महावारत्व प्रकट कर गड़वार राज्य उद्धार प्रभुराव हारा उनकी भगिनोकी अशेष लान्छनाका हाल किया. जिमम पितान उनको क्षमा प्रदान को। माल म हुआ। भगिमौके कष्ट को सुन उनका हृदय अब वारवर पृथ्वोगज भाईको प्रतिज्ञा पूर्ण करनः प्रधोर हो उठा । वे शोघ्र हो मिगेही पहचे और पामाद- को अग्रसर हए । शव मित्र मभो पृथ्वीराज वोरत्वको को प्राचोर उन का शागित प्रमि हाथ में लिए भगिनी- प्रशमा करते थे। उस प्रशसामे ताराबाई के श्रवणकु र पतिक शयनकक्षमें घुम गये। ग्यालक को भोममूर्ति परिट हुए । इधर पृथ्वोराजन ताराबाई माथ विवाह देख कर प्रभुरावके आत्माराम उड़ गये, उन्होंने स्त्रो और करने का प्रस्ताव किया। पिताके प्रादेशमे तागबाईने शालकसे क्षमा-प्रार्थना को। यहां पृथ्वीराज चार पांच पृथ्वोराजको पतिरूपमें वरण करने के लिए सम्मति दे दो रोज रह कर चल दिये। आते ममय प्रभुगवने इनको किन्तु विवाहके समय इन्होंने कहा था कि. "यदि पृथ्वो- मार्ग में खाने के लिए कुछ लड्डू रख दिये। कमलभोरमें गज थोड़ा उहार न करें. तो वे राजपून हो नहीं हैं।" पहुंच कर पृथ्वीराज ने उनमें से एक लडड वाया। माता- बम बातको पृथ्वोराज कभी न भूले थे। देवो के मन्दिर के पास पहुंचतं पहुंचते उनका शरीर मुहर्रम के दिन पाये। थोड़ाके मभो मुसलमान अवसब हो गया। उन्होंने अपना पन्तिम काल उपस्थित उत्सव उन्मत्त थे। महासमारोहमे ताजिया निकाल जान ताराबाईको मवाद दिया किन्तु अन्त समय उन. को प्रणयिनोसे मुलाकात न हो पाई। रहा था। दम्पती पचाम चुने हुए प्रश्वारोहियों के माथ थोड़ामें उपस्थित हए । नगर के कुछ दूर पर मेनाको छोड़ पतिको अकालमृत्य का मवाट पा कर ताराबाईने कर पृथ्वोराम. तागवाई और मेनगढ़ म मन्तोन नगर- चितारोहण किया। अब भो गजबाड़े में बहुतसे लोग में प्रवेश किया। ताजिया माथ अफगानके नायक भो वीरबाला ताराबाई भोर वीरवर पृथ्वीराजको वीरगाथा सजधज माथ जा रहे थे। वे बोम्म उठे-" नये तोन जने और प्रणयकथा गाया करते हैं। कौन है?" इतना कहने के साथ हो पृथ्वीराज के बरछा ताराबेगम-मम्राट अकबरको एक स्त्री। प्रागरेमें इनके चौर सारामाईक तारन मुसलमान मर्दारको भूतनशायो ५० बौघका एक उद्यान था, जो भग्नावस्था में पड़ा है। कर दिया। उपस्थित सभी लोग अकस्मात् भोत और वन्त तागभ ( म० पु० ) नारद । हो गये। वे क्या करेंगे, इस बात का निश्चय भो म कर तागभूषा ( म स्त्रो० ) साग भूषा भूषण यस्याः, पाये थे कि इतने में तीनों जन नगरके तोरणद्वारके पाम बहुव्री। गत्रि, गम । पहुंच गये । वहाँ एक विराटकाय हस्तोन उनके गन्तव्य नारान (मपु. ) तार: निर्मल: अमो मेघव शुध. पथमें वाधा पहुंचाई, वीरबाला ताराबाईने तलवारसे त्वात्। कपूर, कपूर । उमका मस्तक काट कर जानेका मार्ग साफ कर दिया। सारामगडल (म लो० ) ताराणां मोतिकानों मण्डल ___थोड़ी हो देरमें राजपूत-सेमाने अफगानों पर प्राक. यत्र। १ खरमण्डलभेद, एक प्रकारका देवमन्दिर । मण किया। अफगान-मेमा तितर बितर हो गई। थोड़े सारागां मण्डन ६-तत्। २ नक्षत्रमण्डल, नक्षत्रोंका की पायाससे थोड़े का उहार हो गया। इसके बाद पृथ्वी समूह या घेरा। ३ एक प्रकारको पातशबाजी। राज मालवेखरको बन्दी करके पिताके पास ले गये। तारामगड रगुड़ ( स० पु.) पोषधविशेष, एक प्रकारको एमके कुछ दिन बाद हो महावीर पृथ्वीराजका नवोम दवा । इसको प्रस्तुत प्रणाली-गुड मण्हरपाल, गोमूत्र जीवनमुकुल इस प्रकारसे छिब हुमा- १८ पल, गुड़ पसमें विड़ा, पितामूल, चई विफला,