पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५२४

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५२० तिनका-तिन्दुक तिनका (हि. पु. ) हगण, सूखो धाम । न्तिडा। Tamarindos !ndica', कच्ची रमलो अत्यन्त तिनगना (हि. कि. ) तिनकना देखो। कफ और पित्तकारक तथा वातनाशक होतो है। सिनगरी (हि.स्त्री० ) एक पकवान । ___पको रमलो दोपन, रुचिकारक, भेदक, उण, कफ तिमतिमिया (हि.प. ) मनवा कपाम । और वासनाशक, विष्टम्भनाशक, मधुराम्ल; पित्त, दाह, सिनधग (हि. स्त्रो०) एक प्रकारको रेती जिममें तोन अम्र और कफदोषप्रकोपक है । पको इमनोका मधुराब, धार कस्तो हैं। यह नागके दांतों को तेज करने के काममें रुचिप्रद, शोफ भोर पाककर है : इमका लेप देनेसे प्रण- आतो है। दोष जाता रहता है । मलों के पत्ते के गुण-गोफ, रक्त. निमपहन (Eि.वि.) तिनपहला देखो। दोष और व्यथामाशक हैं । इमली को सूखी छाल-शून तिमपाला (जि.वि.) जिम में तीन पा हो. जिममें पोर मन्दाग्निनाशक है। रमलोके पके फलको जलसे सोन पहल हों। अच्छी तरह पोस कर गुड़ पोर मिर्च मिला दें, बाद तिनमिना । हि.पु.) वर माना जिम के बीच में मोनेका नवन और हींगसे सुगन्धित करें; इस तरहसे जो या जड़ाज जुगम हो। पामोय प्रस्तुत होता है, वह अत्यन्त मुखरोचक, वात तिनवा (जि. पु०) घरमा और कोटा-नागपुरमें होनेवाला नाशक, पित्तनमाकर और वलिरोधक है। (भावप्रकाश) एक प्रकारका बॉम। यह इमारतों में लगता है और तिन्तिड़ो ( म० पु. लो०) तिम-ई-कन् निपातनात चटायां बनाने के काममें आता है। माधुः । वृक्षाल, इमलो। तिनाशक (सं० पु. ) तिनिश म्वार्थे कन् पृषोदगदित्वात् सिन्सिडोका ( म स्त्रो०) नाम्न इमली। प्रात्वं । तिनिश वृक्ष । तिन्तिडोद्य त ( म० क्लो०) तिन्तिड़ोभिः तिन्तिडीजात- तिनिश ( स० पु.) वृक्षविशेष, मोममको जातिका एक ा त यय तं । चुच्चरो, वह जत्रा जो इमलीके चित्रों पेड़। इमकी पत्तियां शमो या खेरको सो होतो हैं। से खेला जाय। मस्त पर्याय-स्यन्दन, नेमी रथट, अतिमतक. | तिन्तिराग ( स० पु.) वचनोह. इसपात। वजन, चित्रकत, चक्रो शतात. शकट, रथ, रथिक, तिन्तिलिका ( म० स्त्र. ) तिन्तिडिका इस्य लत्वं । भस्मगर्म, मेषी, जन्नधा, स्यन्दनि, पक्षक और तिनाशक निन्तिड़ी, इमली। ( Dalbergis Ougoinsis)। एमके गुण-कषाय. तिन्तिली ( म स्त्रो) निम्तिड़ो इस्य लत्व। इमली। उष्ण, कफ, रक्त, अतिवातामयनाशक, ग्राहक, दाह, तिन्तिलीका ( म०प्त्री० । तिन्तिड़ोका इस्य लत्व। जनक, नेमा, पित्त, रक्तदोष, मेद, कुष्ठ, प्रमेह, वित्र, इमली। तिन्तिलोफल ( म०लो. ) जयपालवीज, जमालगोटेका दाह, व्रण, पाण्डु और कमिनाशक है। बोया। तिसिड़ ( स० पु०) तिन्तिड़ो पृषोदगदित्वात् माधुः। तिन्दिश ( म० पु. ) दिगिडश वृक्ष, टिंडसो नामक वृक्षाम्न, मनो। तरकारो, डेंढसो। तिन्तिडिका (म० स्त्रो० ) तिन्तिड़ो स्वार्थे कन्-टाप पूर्व तिन्द (म० पु०) तिम्यति पार्टीभवति तिम-कु प्रत्ययेन इस्खश्च । सिन्तिहो, मलो। निपातनात् साधुः। तिन्दुक वृक्ष, ते दूका पेड़। सिन्तिड़ो (म स्त्रो. ) तियत लिद्यसे मुखाभ्यन्तरमनेन तिन्दक ( स० को०) तिन्दुरिव कायति के-क। १ कर्ष। तिम-कन् पृषोदरा । वृक्षविशेष, इमली। दमक परिमाण, दो तोला। (पु० स्त्रो० ) तिन्दु स्वार्थ अन् । संस्कृत पर्याय-चिच्चा, पत्रिका. सिन्सिडिक, तिन्तिड़िका, २ रक्तलोध्र वृक्ष, तेंदूका पेड़। इसके सस्त पर्याय- अम्लोका, पाम्निका. पात्रोको चुक्र, चुका, क्रिका. स्फूजक, कालस्कन्ध, शितिधारक, केन्द्र, तिन्द, तिन्दुल, अम्ला, अत्यन्ना, भुना, भक्तिका. चारित्रा, गुरुयता, पिच्छि. तिन्दकि, तिन्दुको, नोलमार, प्रतिमुत्तक, स्वर्यक, ला, यमदूतिका, शाकचुकिका, सुचुनिका और सुति- रामण, स्फ जन, स्पन्दनाय और कालसार।.