पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५३०

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१२६ उनको मृत्व नहीं है लेकिन कभी कभी शरोर बदला हद-मफमय चहो (मानस सरोवर), नन-चसो कि. करते हैं। दलाई लामाको मृत्यु होने पर शास्त्रात विशेष उग-मो, चहा-चहो, यर बो गयु पहो, फग-पहो, हो लक्षणयुक्त शिशको दलाई लामाका 'नवशरोधारणा' कियरेंग मोरङ्ग, खो-स हो, गीया-मो प्रभृति प्रदा जाम कर उसोको उक्त पद पर अभिषित करते हैं। म एतशिव और भी कई एक परिष्कार मीठे पोर खाक कोई पहले दलाई लामाको देहको मन्दिरमें रख पूजा जलयुक्त द इस देश माना स्थानों में देखे जाता करते हैं। नशिलामा बुद्ध पंश ममझे जाते हैं। ये नदी।--चांग-पो { ब्रह्मपुत्र ), सेन खबब् ( मिन्धु ), चौन-सम्राट के गुरु पोर धर्मोपदेशक हैं। मच्चिय खब्ब, चहा-महिक, ज छ, ग,छ. बि-छ, मह, सिञ्चत के समस्त मन्दिरोंमें बुद्ध प्रतिमा प्रतिष्ठित हैं (होयाङ, हो), मे-छ. बे-छ, मान-छ, हजुलगा-छ और यहांको भाषा स्वतन्त्र है। पक्षर बहत कुछ नागरी चाणा-छ अपनी अमख्य उपनदियों के साथ इस देश के प्रत्तरसे मिलते जुलते हैं। ईसाको ७वों शताब्दोमें यह नाना स्थानों में प्रवाहित हैं। लिपि भारतवर्ष से तिब्बतको चला गई है। ये काष्ठ विस्त त पाण्य, चारणभूमि, तृणमय प्रान्तर, टगपूर्ण फलकमें खोद कर पुस्तकादि मुद्रित करते हैं। उपत्यका, कर्षित क्षेत्र घोर अनुवर अधित्यका वालुका- ___ ले. लासा पोर टिसुलम्ब ये तोन नगर इम देशमें मय मरुदेशके नाना स्थानाम है । ग्यनग (चीन), ग्यगर सर्व प्रधान है। लामा नगरमें दलाई लामाका मन्दिर है। (भारतवर्ष ), परमिग ( पारस्य ) प्रभृति वृहत् देशों को सोसे यह बहुत पवित्र स्थान माना गया है। काश्मोरके सोमामें जिस तरह बड़े बड़े समुद्र हैं, इसके चारों ओर ममोप सदवग ( लदाक) प्रदेश को छोड़ कर तिब्बतके भो उसो तरह बड़े बड़े पर्वत हैं। इन पर्वतोंके टूमरे को और सभी पंश चोनके अधीन है। चीनराजके एक | पारमें ग्य-नग (चोन), ग्य-गर ( भारतवर्ष ), मोन् प्रतिनिधि यहाँक शामनकर्ता हैं । लासा नगरमें हो ये । (हिमालय प्रान्तवर्ती प्रदेश ), ब-यो (नेपाल), ख-छे रहते हैं। सदाकको गजधानोले है। लदाक देखो। (कामोर ), स्तम्-सिसगस् ( ताजिक वा पारस्य ) और पामदो नामक स्थान के लामा सोमपो नोमनखन होर ( तातार ) प्रभृति बड़े बड़े देश अवस्थित है। पून तिब्बतका भू-विवरण लिख गये हैं, जिससे निम्नलिखित देशोंको उबरता जिन बडी नदियां होती है, उनका विवरण संरहोत हुपा है- अधिकांश हो दम 'पो' ( तिब्बत वा भोट ) देशसे उत्पन तिब्बत देशमें शीत और उणताका घश बराबर होने के कारण यह प्रदेश जम्ब लिङ्ग ( जम्ब दोप) खगा. रहमके कारण यहां न तो अत्यन्त गर्मी पड़ती है और न का केन्द्रस्थान कहा जा सकता है। अत्यन्त शोतहीका प्रादुर्भाव है। इसी कारण यहां दुर्भिन नहीं और हिसक पशु तथा कीटादि नहीं पाये 'पो' देश प्रधानतः तोन भागों में विभक्त है- १। तोगहरो कोर-सुम-जचा या छोटा तिब्बत । जात। शब-सा (चार प्रदेशों में विभता)-प्रवास तिब्बत। ___ पर्वतमाला।-लोहमा प्रदेशमें सेमी, चोमोकनकर, फुलहरी, कुन-कन्ग्रो ; उत्तर नांग प्रदेशम ये दो- । दो, खम और गा बड़ा तिब्बत । कान्दम प्रदेशमें ब्धि-काचरित और नाङ-छैन-मङ्गल जचा तिब्बत ( संक्षेपमें पो छुङ्ग )-इसके कई उप- है। इनके सिवा यरला-सहम्ब , सोगकों, खवा- विभाग है- तमग-मो लदवग, मङ्ग-यू-सहान सहारा लोदि, सानाकर्पो, मनिपोमर प्रत्यादि बर्फ से ढकी हई गुगवुहरण (पुरङ्ग)। प्रत्ये क उपविभाग नौ जिलों में सफेद शिखरयुक्त जची पर्वतमाला है। होति गोहिया. विभक्त है। मरि-वर थम, जोमोनगरी, कोन्स-तस्थन छेमी प्रभृति पर्वत पहले 'पो' देशको शामन-सीमा तरुष्क या तुकोंक सुगन्धि घास, जड़ी बूटोके उजिद और सुन्दर तरलता- देश कोण तक विस्त त थी। जंचा तिब्बत प्रत उत्तर गुल्मसे परिपूर्ण है। इसके अतिरिक्ष पपर्वत देश- और दक्षिण इन दो भागों में विभक्त है। उत्तरभाग बद- मय ब्याट। कथानके मध्यम है। यहां तिब्बतियों का एक दमोह