पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५४१

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समा। चिरतुषारात पर्वतमालाको पार करने में उम राजा बन बैठे और उन्होंने एका विधवा रानोमे विवाह कर कार होने लगा सहो, किन्तु उसके लिये मरना और लिया। तोनों राजकुमारने कोनो नामक स्थानमें भाग जीना दोनों बराबर था, इस कारण वह क्यों हतोत्साह कर प्राण रक्षा को।नीरानी और राजकुमारों की माता होता ? क्रमशः पार्य अवलोकितेश्वरकी लपासे ने योग-बमसे यह लह-तसम्मो मामक अपदेवताको बालक तिब्बतके तुषारमण्डित लहरि पर्वत पर पहुंचा। प्रसन्न कर एक पुत्र प्राप्त किया। यह पुत्र कालक्रममे पस स्थानको थोसामे मुग्ध होकर वह क्रमशः पार करता मन्त्रो के पद पर अभिषित हुए । बाद उन्होंने दुष्ट मन्त्रि हुपा चारों और चार पर्शियष्ट चन अब नामक राजको निहत कर उन भगे हुए तोनों राजकमागेको मालभूमि में जा पहुंचा। यहाँ के लोगांने उसके महिमा अपने देश में बुलवा मंगाया। उनमेंसे बड़े था-थि-नसम्बो वित प्राकारको देखकर उसमे परिचय पूछा । लड़का उस गजा हुए । इन्होंने रोम-ध नामको एक कन्याल गादो- देशको भाषा तो नहीं जानता था, केवल इशारेमे उन्हें को । म वंशके राजा पहलेसे २७ पुरुष तक "वोम" सूचित किया कि वह एक राजपुत्र है और लहरि पर्वतको नाम धर्मावलम्बो थे। हम धर्म में अनेक प्रकारके अप- भोरमे पा रहा है। तिब्बतवामिगौन समझा कि यह देवताओं को उपासना है। पहलेसे पाठ राजा दि-गुम. ऊपरसे पा रहा है, अत: यह बानक देवता के मिवा और तमम्मोके राजत्व-काल में इस धर्म को विशेष उनति हुई। टूमरा कोई नहीं हो सकता। सभी ने उन्हें दण्डवत् इन गजात्रों के नाम रखते समय उनके पितामाताके कर उस देशकै राजा होने के लिये उनसे अनुरोध किया। नाम का कुछ कुछ अंश लिया जाता था । दि.गुमसमम्मो इस पर वह बालक भो राजो हो गया। बाद वे उन्हें और उनके परवर्ती एक राजा तिब्धतमें पैविध दि माम. एक काठक प्रामन पर बिठा अपने कन्धे पर चढ़ाकर से पकारे जाते थे। राजाको मृत्यु के समय रानो अपने देशको ले गये। आसन पर बैठ कर मनुषाके कन्ध मे अपने स्वामोको ले कर स्वर्गको चलो जातो थी, उनका ढोये जामके कारण लड़के का नाम नहथि-सम्य) ( नर- एक भी चिक पृथ्वो पर नहीं रह जाता था। य-धि- पोठ । थि वा यि, काठका आसन, त्मम्मो = राजा ) रवा तसम्मोके परवर्ती छह राजा 'सैलग' ( भौमवर ) नाम- गया। प्रभो जहाँ लामा नगरी प्रवस्थित है, उसो जगह में इतिहासमें प्रमिद हुए। इनके बाद ८ राजामों के नये वृपतिने यम्ब-लगद नामकी एक बड़ी अट्टालिका नामके पहने "३" उपसर्ग लगाया गया जो संस्कृत निर्माण को। 'मेन' शब्दाथ प्रकाशक है। उनके बाद तो-रि-लोतमन उस नवीन नृपतिने नम-मूग मृग नामक एक तिब्ब- नामक राजा हुए। इनमें पांच राजा नमन । राजा) तीय रमणीके साथ विवाह किया। अत्यन्त प्रशंमा पोर नाममे विख्यात हुए । यद्यपि इस समय भी बोमधर्म का अपक्षपातसे प्रजाको पालन करते हुए अन्तमें वे पर- प्रभुत्व प्रवल था, तो भो बौद्ध धर्म का विन्दुमान तिब्बतमें लोकको सिधारी । पछि रनके पत्र मगथि-तसम्यो राजा प्रचारित.ना । हुए। नये राजासे निम्न मात राजा "नखि" नामसे ४४११०में तिब्बतके सविख्यात राजा लह-यो.वो गि इतिहासमें अभिहित हुए हैं। पाठवें राजा दि-तुम ___ ननसमनने जमा किया। ये बोन धर्म के प्रधान समम्योने लुमसनमेर चम नामको कन्याको व्याहा। इसके देवता कुन्तु तसम्मके अवतार माने जाते थे। ये वीस गर्भ से राजाके तीन पुत्र हुए । राजमन्त्रो लोनमने उच्चा- वर्ष की अवस्था में गजसिंहासन पर बैठे । राजा सहयो. भिलाषके वशमें पा कर बिद्रोह ठान दिया। घममान थोरिक ८० वर्ष की उम्र में ५२१ ई०को बम्बूलगं मासाटके खड़ाई हुई, गजा मारे गये। मो युधमें तिब्बत में अपर आकाशमे एक कोमतो सन्दूक निरा । उसमें 'दोदे पहले पासप व (लोह वम ) व्यवास हा धां । धम समतोम' (स्वान्तपिटक ) 'सेक्वि-छोतन' (सोने की प्रदेशके मारखम नामक स्थान ते यह कबच पहली बार बनी हुई एक छोटो बेदो ) "पनको-च-ग्य छैन पो" पस देशमें लाया गया था । मन्त्रो लड़ाई में जय प्राप्त कर (सामुद्रिक शास्त्र ) और 'चिन्तामणि नपो ( चिनामणि Vol. Ix. 135