पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६५३

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तुकासम कर और किसीने जमानत दे कर तुकारामको स किसीसे कर्ज मिलना दुम । मलाई सातिपय विपसिसे रक्षा की। तुकाराम के बन्धुबान्धवोकी ऐसो रहस्थकी लड़की थी, उसके अपर बातों का विश्वास धारणा धो कि विठोवाकी भक्ति हो उनको पवनतिका था। उसने २०० वर्ष पर खामोको दिये और कारण है। एक दिन कई बन्धुषोंने तुकारामसे कहा- बहुत समझा-भूभा कर व्यवसाय करने के लिये कहा। "तुम विठोबाकी भक्ति छोड़ कर सांसारिक कार्य में लग तुकाराम रुपये लेकर व्यवसाय के लिए बालाघाट नामक जागो, इस संसारमें विठोवाको भक्ति करके किसने उबति स्थानमें गये । इस बार सरोद-चकर ईएम-चर्याय प्राल को है? इस तरह तुकाराम चारों पोरसे तिरस्मत लाभ हुपा। घर लौटते समय तुकारामने देखा कि रामा- होने लगे। घरमें अवलापोंको भो यही धारणा थो; चरगव एक बाधषको हपन चुका सकामे कारण भो सर्वदा कहती थीं कि विठोबा भक्तिसे हो आम लोगों. ध कर ले जा रहे हैं, उसको जो भो रोती हुई उसके को पवनति हुई है । घरमें खो, बाहरमें बन्धुबान्धव पोछे जा रही है। बामपने माय परिणोधके लिये १२ सभो उनको उत्चत करने लगे। इधर एहस्थोका दारुण वर्ष तक क्रमागत भोख मांगी; किन्तु वह कुछ संग्रहन कष्ट था, उधर उन लोगोंका भाट । तुकाराम सभोको कर मका । ब्राधापको ऐसो दुर्दशा देखकर तुकारामका बातें सह लेते थे। वे विठोवा प्रेममें निमम्न रहते, हृदय दयासे पिघल गया। उन्होंने अपना व्यवसायी प्रास इसीसे सांसारिक दुःख उन्हें उतना कष्टकर नहीं सब दृष्य ब्रामणको देकर उसे उसी समय मण-मुक्त मालूम पड़ता था। लोगोंको ताड़नासे, स्त्रोको भनासे किया तथा ब्राह्मणके चौरकार्य पोर दानको दक्षिणा उनका भगवनम और भो अधिक बढ़ता जाता था। दश ब्राह्मणों को भोजन कराया। मबार तुकारामकी बषिकों के लिए व्यवसाय के सिवा जोविका-निर्वाह वचो-खुचो सब पूजी खतम हो गई। का कोई दूसरा उपाय नहीं है। सुतरी तुकारामने स तुकारामके घर पानसे पहले ही याबाद चारों बार अन्तिम उद्यमका बीड़ा उठाया। उनके पास जो पोर फेल गया पोर रुब "पागल समझने लगे। कुछ पूजी बची थी, उसोसे उन्होंने लालमिर्च खरोदो पबलाई दरिद्रताको पोड़ासे कठोरस्वभावा हो गई थी। पोर उसे बचनेके लिए कोहणदेश गये। यद्यपि वे स्वामोके रस व्यवहारसे उसने पम्निमूत्ति धारण को। नये दृश्यको ले कर भिव देशमें गए थे, तोभी उनके व्यव. पब तुकारामका घरमें रहना भो कठिन हो गया। सो मायको रोति पूर्ववत् थो। नूतन व्यवसायीको देख समय दारुण दुर्भिक्ष मो उपखित हुपा रुपये में दो मेर कर मुंडके मुड ग्राहक पाने लगे पोर मूल्य दे कर पोर मय हैकर धान बिकने लगा। इस दुर्भिच तुकारामका परिवार इच्छानुसार मौदा खरीदमे लगे। बहुतों ने उधार भो। वर्ग अबके अभावसे दारण लोग भोगने लगा। जब लिया। इस तरह थोड़े हो दिनों में लाभकी बात तो तुकाराम पड़ोसियोंसे सहायता मांगने जाते, तो वे उन्हे दूर रही, मुलधन भी गायब हो गया। . मिच बच कर अवज्ञाके साथ भगा देते थे। कोई कोई तो उन यह जो उनके पास बचा, उसे लेकर स्वदेशको लौटे। किन्तु कह कर चिढ़ाते थे कि “अब तुम्हारा विस्त देवता कहां देवको एसो विडम्बना हुई कि रास्ते में पाते समय वे गया ? विद्या मनिका परिणाम देख चुके न!" ऐसे एक ठगके उलझनमें फंस गये। वह ठग उन्हें बहतसे वचनोम तुकाराम बहुत ही मर्माहत होते थे; किन्तु कतिम सुवलकार दे कर इनको मब पूजी ले नौ दो उस समय दुर्भिसका प्रकोप बढ़ता हो जाता था, तुका. ग्यारह हो गया । तुकाराम घर पा कर इस दुहिताके रामको बड़ो सो तो पहले ही कासरोगसे योड़ित कारण पानीय स्वजनों के निकट बड़े लाग्छित हुए। थो। अमाहार और कपसे रस समय उसने म लोकदो अधर घरटहस्थोके कष्टने भी अपना पूरा रंग परित्याग किया। उसको मत्युसे समी तुकारामको धिक्का दिखाया उनकी खीने देखा कि स्वामो सर्वखान्त हो रने लगे। इसके कुछ दिन बाद तुलारामक बड़े पुत्र गये, उनके अपर लोगोंका विश्वास जाता था: पब मोजीका भी प्रान्त एमा। 'तुकाराम पन्धोजी पर Vol. I. 161