पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६६९

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तूतिया तुतराना-तुनि है। ताड़का गुड़ और ताडको चोनो यहां यथेष्ट पाई दूसरे प्रकारसे-बिल्लोको बटने साथ तूतिया पोमते माती है। यहांका खास्थ्य उत्तम है, किन्तु मोठे जल का और उनमें चतुर्थाश मधु और सुहागा मिला कर बहुत प्रभाव है। आजकल पार्टि जेन कूप खोदे गये सोन भार पुट देनेसे वमन और भ्रमिकर शक्ति रहित है। शहर के समुद्रतोरवर्ती बहत अंश प्रजाविशिष्ट और होनसे शुद्ध हो जाता है। अधिन को दूसरोरोति-तृतियामें समृद्धिशालो हैं। यहां हिन्दुओं के रहने के कई एक छत्र उसका पर्दाश गन्धक मिलाकर चार दण्ड पाक करते और साहबके लिये एक उत्तम होटल है। यहां 'तुतकुड़ो है। वमन और भ्रमनिरहित होनेसे पाक मिड टारमिमश' नामक रेलको एक स्टेशन है। होता है। तूतियाके गुण-कट, क्षार, काय रम, त तराना (हिं. कि. ) तुतलाना देखो। विषद. मधु, लेखन, विरेचक, चाक्षुष, कगड, कमि और त तलाना (हि. कि.) शब्दों और वर्षों का अस्पष्ट उच्चा विषनाशक है। (रसेन्द्रसारसं० ) रण करना, माफ न बोलना। सुत्थक ( स०क्लो. ) तुत्थमेव स्वार्थे कन् । तुत्य, तसलो (हि.वि. तोतली देखो। तु तान (म पु०) मोमांमकभेद । तुत्या ( सं स्त्रो. ) तुत्य टाप । १ नोलो वृक्ष, मोलका तुत रो-एक तरहका छोटा शृङ्गयन्त्र । यह यन्त्र पौधा। २ दैला, छोटो इलायचो । माङ्गलिक कर्म और देवमन्दिरों में व्यवहत होता है। स्थानन ( म० लो०) तुत्स्थञ्च तत् अञ्जनञ्चति कर्म धा। ततवाणि (स• पु०) तीवनि जनमय बेहे पृषोदरादि- उपधातुविशेष, तूतिया, नोलाथोथा । त्वात् साधुः । त भजम, जल्दो जल्दो भजन करनेको तुध (सं० पु०) तु-यक् तुदायक । पृषो० माधुः । १ हनन· दिया। कर्ता, मारनेवाला, कमल करनेवाला। २ ब्रह्मा। तत्य (म० पु. ) त दति पोड़यत्यनेन त द-यक । पात- ३ दक्षिणाविभाजक, ब्रह्मरूप ऋत्विग भेद। . तुदेति । वण २।३।१ प्रस्तर, पत्थर । २ पम्नि, पाग। तुदन ( पु.) १ व्यथा देनेको क्रिया, पोड़न । २ व्यथा, ३ अञ्जनभेद। ४ नीलाक्ष, नोलका पौधा । ५ सूक्ष्म ला, पोड़ा। ३ चुभाने या गडानको किया । छोटो इलायची। ६ उपधातुविशेष, तृतिया । तुदादि (स. पु. ) धातुगणविशेष । इस गगाको धानु. इसके मस्कृत पर्याय-नीलाञ्जन, हरिताश्म, तुत्थक, के बाद 'स' पाता है। "तुदादिभ्यः स इम 'म' प्रचयके मय रमोवक, सामगर्भ, अमृतोद्भव, मय रसुत्थ, शिखि- होनेसे गुण नहीं होता, इसोसे इसका नाम अगुण हुआ कण्ड, नील, सुत्थाजन, शिखिग्रोव, वितुनक, मय रक, है। विशेष विवरण धातु शब्दमें देखो। भूतक, मूसातुस्थ, मृतामद और हेममार। इममें तुन (हिं. पु. ) एक बहुत बड़ा पेड़ तुनि देखा। . तविका भाग थोड़ा हो है। इसमें अन्यान्य द्रव्य संयुक्त तुनकामौज ( लश पु०) छोटा ममुद्र। है, इसीसे इममें दूमरे दूसरे गुण भी हैं। इसके तुनको ( फा० स्त्री. ) एक तरहको खस्ता रोटो। . गुण-क्षारसयुक्ता, कट, कषायरस, वमनकारक, लघु, तुनतुनो (हिं० स्त्री०) तुन तुन शब्द देनेवाला एक प्रकार- लेखनगुणयुत्ता, भेदक, श्रोतवो, चक्षुका हितकर एवं का बाजा। कफपित्त, विष, पश्मरी, कुष्ठ, और कण्ड नाशक है। तुनि-१ मन्द्राजके गोदावरी जिलेको एक जमींदारोका (भाव-प्र.) रमेन्द्रसारम ग्रहो मतसे इसकी शोधन- सहसोल। यह प्रमा० १७११ ओर १७ ३२ उ० प्रणाली इस तरह है,-विक्षो और कबूतरको बोटमे तथा देशा०८२और ८२° ३६ पू॰में अवस्थित तू तिया पोस कर उसके दश भागोंमसे एक भागके बरा है। भूपरिमाण २१६ वर्गमोल और लोकसंख्या बर सुहागा मिलाते और मृदु पुटमें पाक करते है। इसके ५८७६२ के लगभग है। इसमें एक शहर पोर ४८ ग्राम बाद सैन्धव लवपके साथ मधु दे कर पुट देने से यह लगते हैं। सहसोलका पधिकांश पहाड़ और जङ्गलसे विद्या होता है। पाच्छादित है। Vol. Ix. 165