पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६९०

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तुरुक रनक समय में मोण्टंनि तुसंधों के अधीन गव्यरूपमें : पतिवार करने के लिये अमर होमो । भी गिना जाने लगा । १८७६ ई० में अबदुल हमोद ( श्य) २८ तारीखको भन्दुल हमीदने उन लोगों के इस प्रस्ताव राज्यनिहामन पर अभिषित हुए। इन्हीं के ममयों को खोकार कर घोषणापत्रके हारा पूर्वतम १८७३ विख्यात रूस मोर तुम का युद्ध पारम्भ हुआ था। कम- राजतन्त्रके मानने की प्रतिज्ञा को। यद्यपि इस विद्रोह- में अपना नष्ट गौरव पुनराहार करनेके लिये इस बार को सम्प ग सफल नहीं कहा जा सकता, तथापि रस वे भोमबलमे तुमका पर पाक्रामण किया। बारबार कस. सुलतानशा खेच्छाचार बहुत कुछ प्रमित पा सारोख को जय होने लगो। अन्तमें तुमक राजने १८७८ अगस्तको प्रोक, पर्मेनियन, शेख सल इसलाम धादि १ में इसको बटम, कारस और पार्भाहन छोड़ दिये।। ममस्त सम्प्रदाय के प्रतिनिधियोको लेकर एक नवोन वे मका यु.पव्यय २२ करोड़ रुपये देनेको गजो हुए 'कविमेट' (मन्त्रिसभा ) संगठित हुभा। पौर उसोके अनुसार उन्हें प्रति वर्ष ३१८१८० रुपये ____परन्तु नव्यतुर्की दलको विजय पधिक दिन तक कम गवर्मेण्टको देने पड़ते थे। निष्कण्टक न रहो। सुलतानके अनुचरगण अपनो पूर्व- • तुरुक-राज्यपाले बहुत विस्त होने पर भी प्रमो क्षमता प्रान करने के लिए भरसक कोशिस करने लगे। इसका भूपरिमाण ५५०० वग मोल पोर लोकसख्या इसलिए नव्यतुर्कीदलने अबदुल रमोदको सिंहासनसे लगभग ४५६८... है। उतार दिया पोर उनके कनिष्ठ माता महमद रेशाद बीसवीं शताम्दीमें तुरुष्क-खोसौं शताब्दोके शेष | एफान्दोको सुलतान गद प्रदान किया, परन्तु अबसे भागले हो तुमको नव जागरण को पावाजे उठी थौं। बास्तवमें भव्यतुर्कीदलके ख्यातनामा नेता भानोयर वे तुरुष्याके युवक-सम्प्रदायने युरोपोयों के समक्ष यह हो समग्र तुर्कीका यासन करने लगे। प्रमाणित करना चाहा कि तुरुक बिलकुल मरा रस समय मुस्ताफा कमाल पायाने इच्छानुसार दुपा नहीं है-उसमें अब भी प्राय है।' अबदुल सैन्धवार किया। उनके पादेशसे पसंलग्न संनिकाम मोदके शासन काल में "नव्य तुळ-सम्प्रदाय" नामसे | संधवहभावसे पाधुनिक समर विधानुमोदित तुर्की सेनाके तरको युवकों की एक संखा स्थापित हुई थो। न लिए उपयोगो कूच वाजका प्रचलन हुपा। वे पहले. लोगोंका उहख था, कि अबदुल मोदका उच्छेद कर | से हो मेनाको युद्धोत्साहितको पोर इष्टि रखते थे : नव्य. तुर्कीवा नवोन रोतिमे मंगठन किया जाय पहले तुर्की-विश्व प्रथम वर्ष में उन्होंने से लोनिकामें मैन्य. उन लोगोंने तुर्की के सैन्यदलको वशमें किया। फिर | परिचालन में अपना असिव दिखा कर सवालोन प्रवोण १८०१०को २२ जुलाई को नियाजिब पधिनाय- तुर्की-सेनापतियोंको विस्मित कर दिया। १९१० में वात्व में तत्कालोन तुर्को-गवर्म एके विवस इन लोगोंने कमाल पाया समर सचिवको अनुमति अनुसार प्रान्स विद्रोहको घोषणा की। मनष्टि और पविदाके मध्यपथमें , गये और पिकडि में उन्होंने कौशलपूर्ण परिचालना हाग रेजमा नगरमें हो प्रथम विद्रोह शुरु एमा। रस पाक. फ्रान्सको सहायता पहुँचाई। यहीं उन्हें फरासोसी स्मिक घटनासे बस और रंगबण्डने फिर तुकि बोच | जातिके पाचार-व्यवहार भोर सेनाको युद्धमोति के साथ उस्तक्षेप करनेका साहस न किया। दूसरे दिन पानो- विशेषरूपसे परिचित होनेका सुयोग प्रा हुआ था। बार बेके सभापतित्वमें सैलनिकाकी 'ऐक्य पौर| बलकानके युबमें तुर्कोको बड़ी विपत्तिमें पड़ना पड़ा उजाति:मम्मति को सरफसे नवीन राजतन्त्रको घोषणा था परन्तु मनोयार और कमा पायाने दम विपत्तिसे at। उन लोगों ने सुखसानसे उस घोषणा मान्य करने- तुर्कोको रक्षा को थो। बुल्गेरियाके हाथमे पादिया. के लिए अनुरोध करते हुए यह भी सूचित किया कि मोपलने तुर्कीको छोन बियां। . .. यदि पौधही उन लोगों के प्रस्ताव पर सुलतान समति १८१४ के अगस्त महोने में युरोपमें महायुद्धका सूत्र- भने, तोगी और तीन नम्बर सेना बनडिलोप पात पा | तुर्की के साथ इस युगवा कुछ भी सम्बन्धन