पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७०९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


ज्वावरी हम प्रदेवम तणभाषा प्रचलित है। लगभग चार खभावन (संशो०) तुन्य भावनएक प्रकारको लाख मनुष्य यह भाषा बोलते हैं। छह प्रधान द्राविक राशिका मिलान । भाषापोंमें तलु भो एक है। इस भाषामें कोई अन्य पात्र | तुल्यमूल्य (स'• वि.) तुल्य मूल यस्व । १ समान मूल्य- तक नहीं बनाये गये हैं। मलयालम् अथवा कनाड़ो। विशिष्ट, बराबर दामवाला । २ समान, बराबरं । अवरों में हो इस भाषाके लिखनका काम किया | तुख्ययोगिता (सं.सी.) बाबालारविशेष, एक जाता है। . अलार जिसमें प्रस्तुतो या खतावा अर्थात् बातो कनाड़ाके इतिहास के साथ तुलुवका इतिहास मिसा | उपमेयों या उपमानोका एक ही धर्म बतलाया जाय।. दुधा। . तुख्ययोगी (सं. वि.) ममाम सम्बन्ध रखनेवाला । तुलली (हि. खो०) पेशाव इत्यादिको बंधी हुई धार| तुल्वरूप (• वि.) तुज्यं रूपं बस । एकरूप, सहय। जो कुछ दूर पर जा कर पड़े। तुस्थति (सं.वि.) तुल्या इत्तिला एक व्यखायो, तुलोपतुला (स' स्त्रो०) तुला और उपतुला, चतुर्वभागका | एक रोजगारके। नाम तुला और तोय भागका नाम उपतुला है। . तुल्यास (पव्य ) तुख वोसायस । बराबर बराबर । "भवति तुलो तुलानां मूलपादेन पादेन।" नुस्याचति (सं• वि० ) तथा पालतियवा सहयाति. (वृहत्महिता ५॥३.) | जो देखने में एक्से हो। . तुल्य (सं० वि०) तुलया सम्मित यत्। नौवयोधर्मेति । तुखल ( स० पु. ) विमह, एवं षिवा नाम : पा ९१ ) साहण्य, बराबरी । इसके सखत | तुव-तब देखो। पर्याय -सम, सदृक्ष, मय, सहक, साधारण, समान, तुषर (म.पु.को.) तवति रिमति रोगान् तु-वार- सधर्म, सम्मित और स्वरूप । इनके उत्तरपदमें रहनसे वरच । १ वाषाय रस, कसला रस । २ धाग्यमद, तुल्यवाचक होता है। निभ, सराय, नोकाथ प्रतोकाय, | एक प्रकारका धान। एपादक परहर। नदियों उपमा, भूत, रूप, कल्प, प्रभ, ये भो तुल्य के पर्याय है। पोर समुद्री तटपर होनेवाला एका पौधा। इसके पास २ समान, बराचर। (पु.) ३ खनामख्यात गन्धर्व । इमन्नौके समान होते है, जिनके सानिले परापोवा दूध तुल्यकाणिक ( Equiangular ) जिस क्षेत्रके सब.कोम बढ़ता है।५ पजातका गवि, 4 गाय जिस सौंग बराबर हो। नहीं निकले हों। (वि.) । वाय, का । तुल्यन (R• पु०) तुल्यं जानाति तुल-भा क । तुज्यमानी, ७ तिला, नोता । महोन, बिना दाढ़ी-मूहका। बराबर बराबर मानवाले । तुवरयावनाल (सं• पु०) दुवः कवायः यावनासा तुल्यता ( स० स्त्री० ) तुल्यस्य भावः तस्य तल -टाप । कर्मधा० । धान्यमेद, सास चार, सास करी । १ मादृश्य । २ समता, बराबरी। पर्याय-तुवर, वाषाययावनास, रसायावनाम, सोषित. तुख्यदर्शन (सं० वि०) तुल्य दर्य न यस्य, बहुवी० । समान-| कुस्तु पुरु धान्य। यह गुप-ग्रावाय, उप विरेचक, दर्शना संग्राही, वातनाशक, विदाही पोर शोषवारक। तुल्यपान ( स'.ली.) तुत्य : सह पान। स्वजातिके | तुवरिका ( • जी.) तुवरः वायरसोऽस्त्वनाः लोगोंके साथ मिलजुल कर खानापोना। तुवर-ठन् । १ सौरा मृत्तिका, गोपीचन्द्रन । २ पाढ़का, तुल्यप्रधानव्यंग्य (स.पु. ) वह व्यंग्य जिसमें वाचार्य पौर व्ययार्थ बराबर हो। तवरो (• खो.) तुवर शिवा यित्वात् डोष । तुल्यबल (सं. नि.) तुल्य बल' यस्य। १ समभक्ति १ पालकी, परार। २ धान्यभेद, एक प्रकारका धाम । सम्पब, समान ताकतवाला । (लो..) तुल्य वली गुण - यह धारक, सा, तोच उणवोय, पति- • वर्मधा२ समान बस बराबर जोर। . | कारण और कफ, पिक कौर बोकमत . Vol. Ix. 175 ..